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 उत्तर प्रदेश में राज्यसभा से जातिगत समीकरण साधेंगे  अमित शाह

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नई दिल्ली- मार्च में 16 राज्यों की 58 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों के साथ भारतीय जनता पार्टी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी, लेकिन इसके बावजूद भी भाजपा राज्यसभा में बहुमत के आंकड़े से दूर रहेगी। उत्तर प्रदेश से भाजपा सबसे ज्यादा सदस्य राज्यसभा के लिए भेजेगी । यूपी में 10 राज्यसभा की सीटें खाली हो रही है। जिनमें से 9 सीटें भाजपा के खाते में जा सकती है एक सीट समाजवादी पार्टी के खाते में जाएगी । 8 सीटों पर बीजपी के जीत पक्की है लेकिन 1 सीट के लिए उसे जोड़-तोड़ का सहारा लेना पड़ सकता है जबकि हाल में ही भाजपा उत्तर प्रदेश से अपने एक विधायकों को खो चुकी है अब सवाल उठता है कि भाजपा उत्तर प्रदेश से किसको राज्यसभा का टिकट थमाएगी।

अगर जातिगत आंकड़ों और हाल-फिलहाल के राजनैतिक घटनाक्रम पर नजर डाले तो स्थिति लगभग साफ हो जाती है कि अमित शाह आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश से यूपी के रहने वालों पर ही दांव लगाएंगे।  देश के सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले सूबे उत्तर प्रदेश में जातिगत राजनीति किसी से छिपी नहीं है इसलिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पर किसी भी हालत में जातिगत समीकरणों को साधने का दवाब होगा। उत्तर प्रदेश में पिछले साल विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजपूत जाति से तालुक रखते हैं और उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ब्राह्मण जाति से तालुक रखते हैं जबकि केशव प्रसाद मौर्य पिछड़े वर्ग से तालुक रखते हैं तो इन तीनों वर्गों से राज्यसभा भेजने के लिए फिलहाल पार्टी पर दवाब नहीं है लेकिन भाजपा के साथ सदा से जुड़े रहे वैश्य समाज को उत्तर प्रदेश से उचित प्रतिनिधित्व की उम्मीद है ।

 

अरविंद केजरीवाल के दांव से भाजपा के परम्परागत वोटबैंक में सेंध

दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों में से दो सीट वैश्य समाज को देकर अरविंद केजरीवाल ने अपना दांव खेल दिया है जब-तब केजरीवाल सार्वजनिक मंच से दो वैश्यों को राज्यसभा भेजने का जिक्र भी करते रहते हैं। अरविंद केजरीवाल का निशाना साफ है किसी भी हालत में वैश्य समाज में खुद वैश्य समाज का हितैषी साबित करना , खुद अरविंद केजरीवाल का वैश्य समाज सम्बंध रखना भी उनके इस दांव की गहराई भी दिखाता है। दो वैश्य़ों को राज्यसभा भेजना भाजपा के पराम्परागत वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश है ।

केजरीवाल के दांव की काट

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भाजपा केजरीवाल के दांव की काट उत्तर प्रदेश के दो वैश्य समाज के लोगों को राज्यसभा भेजकर कर सकती है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह किसी भी हालत में 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर अपने पराम्परागत वोट बैंक सेंध नहीं चाहेंगे। अरविंद केजरीवाल के चीजों को भुनाने के रिकॉर्ड को देखते हुए कहा जा सकता है कि वो आगामी लोकसभा चुनावों में खुद को वैश्य समाज का हितैषी दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।

कौन वैश्य हो सकते हैं राज्यसभा के दावेदार

वैश्य समाज से फिलहाल जिन लोगों की स्थिति मजबूत नजर आ रही है भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल ,  राष्ट्रीय महामंत्री अनिल जैन और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ।

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सुनील बंसल जहां राजस्थान से संबंध रखते हैं लेकिन उन्होंने कार्यक्षेत्र यूपी को बनाया हुआ है और पिछले विधानसभा चुनावों में उनकी क्षमताओं से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खासे प्रभावित भी है वहीं अनिल जैन का सम्बंध उत्तर  प्रदेश से है भाजपा में काफी सक्रिय माने जाते हैं। भाजपा के उपाध्यक्ष श्याम जाजू का तालुक महाराष्ट्र से है और दिल्ली के प्रभारी है तो उनकी भी दावेदारी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए बनती है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल नोएडा के रहने वाले है और आर्थिक मुद्दों पर गहरी पकड़ रखते हैं औऱ विभिन्न प्रत्र-पत्रिकाओं से लेकर टी.वी डिबेट्स में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के मजबूती से रखते नजर आते है । आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर गोपाल अग्रवाल पार्टी के लिए ट्रम्प कार्ड हो सकते हैं वैश्य समाज से जुड़े होने के कारण , उनको राज्यसभा में भेजना वैश्य समाज में अच्छा संदेश जाएगा ऐसी राजनैतिक हलकों में चर्चा है ।

आगामी लोकसभा चुनावों में पार्टी को संसद में एक ऐसे चेहरे के जरुरत है जो सरकार की आर्थिक नीतियों की गहरी समझ रखता हो , क्योंकि आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा से अर्थव्यवस्था को लेकर सवाल पूछे जाएंगे तो पार्टी अमित शाह चाहेंगे कि संसद में अर्थव्यवस्था की अच्छी समझ ऱखने वाले एक व्यक्ति सांसद बन जाता है तो ये पार्टी के लिए राहत की बात होगी।

दूसरी ओर गोपाल कृष्ण अग्रवाल और सुनील बंसल दोनों ही संघ में गहरी पैठ ऱखते हैं तो वैश्य समाज से इनकी दावेदारी बहुत मजबूत बनती है।

जेटली को यूपी से भेजकर साधेंगे ब्राह्मण

गुजरात से बीजेपी के राज्यसभा सदस्य अरूण जेटली पुरुषोत्तम रूपाला मनसुख मांडविया और शंकर वेगड का कार्यकाल पूरा हो रहा है। जातिगत समीकरण साधने के मद्देनजर बीजेपी में केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को गुजरात की बजाय उत्तप्रदेश से राज्यसभा भेजने के गणित पर विचार चल रहा है। अरुण जेटली बीजेपी के बड़े नेता हैं। टीम मोदी में जेटली अहम माने जाते हैं। ऐसे में उनका राज्यसभा जाना तय है। अरूण जेटली बड़े ब्राह्मण चेहरे हैं।

अनुसुचित जाति से राज्यसभा भेजने का दवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई नीतियां  गरीब अतिपिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति पर फोकस रही हैं। आगामी लोकसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार के पास गरीब और पिछड़ा वर्ग से किसी को राज्यसभा भेजने का करीब करीब अंतिम मौका है तो अमित शाह इस मौके को जरुर भुनाने चाहेंगे। अमित शाह की कार्यप्रणाली को देखते हुए अमित शाह इन राज्यसभा सीटों से 2019 को साधेंगे और अनसूचित जाति से भाजपा प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री पर दांव लगा सकते हैं ।

 

 

 

 

 

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