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पानी के व्यवसायीकरण और निजीकरण के खिलाफ आंदोलन

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दिल्ली – पानी के व्यवसायीकरण और निजीकरण के विरूद्ध जलाधिकार द्वारा चलाए जा रही देशव्यापी आंदोलन के महत्वपूर्ण पड़ाव में गांधी दर्शन समिति एवं स्मृति समिति के सहयोग से एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के मुख्य विषय के तौर पर जल रहा, जलाधिकार संगठन का मानना है कि जल मानव को प्रकृति द्वारा प्रदत्त तत्व है और इसका व्यवसायीकरण नहीं होना चाहिए और साफ पानी हर किसी का मूलभूत अधिकार है पानी हमें प्रकृति द्वारा मिला है और समस्त जीव जंतुओं का इसपर समान अधिकार है इसलिए इसका व्यवसायीकरण नहीं होना चाहिए।

कार्यक्रम में दिल्ली युनिवर्सिटी से आए 500 विद्यार्थियों ने भाग लिया, कार्यक्रम सुबह 10 बजे से लेकर शाम को 5 बजे तक चला और सभी कुर्सिय़ां पूरे टाइम भरी नजर आई जिससे साफ नजर आया कि पानी को लेकर लोगों में जागरुकता बढ़ रही हैं दिल्ली युनिर्वर्सिटी और जामिया युनिवर्सिटी के कुल 25 प्राचार्यो और हेड ऑफ डिपार्टमेंट ने कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दिखाई और अपने विचार रखे। उनमें से प्रमुख रूप से हंसराज कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रमा, शोभित युनिवर्सिटी के वीसी शेखर अग्रवाल, आर्यभट्ट कॉलेज के प्राचार्य डॉ मनोज सिन्हा , डीएवी के डॉ. रविद्र सिंह, कालिंदी कॉलेज की प्राचार्य डॉ अनुल्या, कालिंदी कॉलेज के चैयरमैन दिनेश कुमार, दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स के ज्यॉग्राफी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर आरबी सिंह जामिया युनिवर्सिटी के कई हेड ऑफ डिपार्टमेंट भी शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में करीब 12 बच्चों ने भी पानी को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन जलाधिकार के कैलाश गोदुका और अध्यक्षता श्री गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने की । कार्यक्रम के अंत में एक शोध पत्रिका का भी विमोचन किया गया ।

पानी पर शोध पत्र का विमोचन करते जलाधिकार के सदस्य

इस अवसर पर मुख्य अथिति स्वामी चिदरूपानंद ने कहा कि हम सभी को पानी के महत्व को समझना होगा उन्होंने कहा कि जल-अधिकार से पहले हमें जल दायित्व को समझना होगा कि हमारा प्रकृति के प्रति क्या उत्तरदायित्व है । उन्होंने कहा कि मनुष्य को सादा जीवन उच्च विचार के सिद्धांत का अनुशरण करना चाहिए, पानी का संरक्षण बहुत जरुरी है महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब पांडव तेरह साल के लिए वनवास गए थे तो इन तेरह सालों में पांडवों में प्रकृति के साथ तालमेल का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया था

पूर्व सांसद महेशचंद शर्मा ने कहा कि हम प्रकृति से दूर हो रहे हैं और स्वंय में स्थित नहीं हैं इसलिए स्वस्थ्य नहीं हैं। बाजार और सरकार हमारे ऊपर हावी हो चुके हैं। स्वच्छ जल हरेक आदमी का अधिकार है लेकिन बाजार और सरकार इस अधिकार को आहत कर रहे हैं। उन्होंने कहा बोतलबंद पानी पी पी कर हम अपने प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर रहे हैं जिसकी वजह से बीमार हो रहे हैं।

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महेश शर्मा झबुआ ने कहा  कि तीसरा विश्वयुद्ध पानी को लेकर होगा इसलिए हमें सभी को पानी संरक्षण पर अधिकाधिक ध्यान देना चाहिए।

जलाधिकार फाउंडेशन के कार्यक्रम में उपस्थित लोग

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इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जलाधिकार संगठन के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि जलाधिकार एक संगठन नहीं है बल्कि एक आंदोलन है राष्ट्र के नीति निर्धारण में जल आंदोलन  का बहुत महत्व है एक स्पष्ट विचार एक स्पष्ट लक्ष्य के साथ ही सम्भव है उन्होंने कहा कि संसार पंचतत्व नामक मूल तत्वों से बना है जोकि प्रकृति द्वारा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कराए गए हैं। इन तत्वों का संरक्षण एवं शुद्धता बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है पंचतत्वों का शोषण करने पर इनका संतुलन पूरी तरह से बिगड़ जाएगा जिसका परिमाण प्राकृतिक असंतुलन और मानव के विनाश के रुप में होना निश्चित है समाज का निर्माण इस तरह होना चाहिए कि प्रकृति संसाधनों का उपयोग बिना किसी भेदभाव हो।

पानी पर सभी का समान अधिकार है इसलिए पानी का व्यवसायीकरण नहीं होना चाहिए

शोभित विश्वविद्यालय के वीसी शेखर अग्रवाल ने कहा कि सरकार को हर किसी को साफ पानी उपबल्ध कराना चाहिए । उन्होंने कहा कि वो सरकार से मांग करते हैं कि बोतल बंद पानी की ब्रिकी को बैन किया जाए। पानी का व्यवसायीबंद होना चाहिए।

कालिंदी कॉलिज की प्रधानाचार्य डॉ. अनुला मोर्य ने कहा कि उनके कॉलेज ने प्लास्टिक बोतल बैन है उन्होंने कहा कि ये सरकार का उत्तरदायित्व है कि वो अपने नागरिकों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराए उन्होंने कहा कि सरकार अपने नागरिकों से टैक्स लेती है तो सरकारों को अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन भी करना चाहिए । उन्होंने कहा कि पानी के संरक्षण को लेकर और साफ पानी की उपलब्धता को लेकर जलाधिकार अच्छा काम कर रहा है और हमारा सहयोग हमेशा जलाधिकार को मिलता रहेगा।

प्रर्यावरणविद् दीवान सिंह ने कहा कि धरती के पास इतनी नदी हैं कि सबकी प्यास बुझा सके लेकिन इन नदियों का संरक्षण करना हमारा काम है उन्होंने कहा कि यमुना में 22 गन्दे नाले मिलते हैं रेनवाटर हार्वेस्टिंग से पानी को बचाया जा सकता है और साफ भी किया जा सकता है।

जलाधिकार संगठन के महासचिव कैलाश गोदुका कहा पानी का व्यवसाय करने वालों ने हमारे अंदर डर बैठा दिया है कि अगर हम बोतलबंद पानी नहीं पियेंगे तो हम बीमार  हो सकते हैं बाजार को डर दिखाकर बढ़ाया जा रहा है।

हंसराज कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रमा ने कहा कि जब जब देश को सरकारों ने चलाया है तब तब दिक्कत होती हैं और जब जब देश जनता के द्वारा चलाया गया है तब तब सब ठीक रहा है।

कार्यक्रम  सुबह 9 बजे शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक चला कार्यक्रम में मुख्य रूप से  कैलाश गोदुका महासचिव जलाधिकार ,दीपांकर निदेशक गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति , अध्यक्ष जलाधिकार गोपाल कृष्ण अग्रवाल , दीनदयाल अग्रवाल  उपाध्यक्ष जलाधिकार , अवधेश उपाध्याय  महासचिव जलाधिकार,  आशीष सरकार  सचिव जलाधिकार , राजकुमार गुप्ता कोषाध्यक्ष जलाधिकार और डॉ रुचिश्री सहसंयोजक का मुख्य सहयोग रहा ।

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