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भारत लड़ रहा है कोरोना से कारगर लड़ाई

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नई दिल्ली- विश्व में कोरोना वायरस का प्रभाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है विश्व के करीब सभी देश इसकी चपेट में आ चुके हैं पूरा यूरोप में करीब लॉकडाउन की स्थिति हैं अमेरिका की भी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है भारत में भी कोरोना वायरस से ग्रसित मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। जो चिंताजनक बात है एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले तीन सप्ताह बहुत महत्वपूर्ण होने वाले हैं अगर भारत आगामी तीन सप्ताह तक इस महामारी को थर्ड स्टेज में जाने से रोक पाया तो यह बहुत बड़ी सफलता होगी । थर्ड स्टेज का मतलब कम्युनिटी ट्रांसमीशन से है जब कोरोना से पीड़ित व्यक्ति को पता ही नहीं होता है कि वो किस व्यक्ति द्वारा इन्फैक्टेड हुआ हैं ये अवस्था सबसे खतरनाक है ,इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ और ‘जनता कर्फ्यू’ जैसे उपायों पर बात करनी पड़ी रही है  , कोरोना से लड़ने के लिए अभी किसी भी वैक्सीन की कोई खोज नहीं हुई है इसलिए इससे बचाव ही सबसे कोरोना से लड़ने का सबसे कारगर तरीका है । पूरे देश में लॉकडाइन की स्थिति का अच्छे से पालन हो रहा है एकाध मामलों को छोड़ दिया जाए तो ।  क्या लॉकडाइन ही कोरोना वायरस से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है मेरी नजरों में लॉकडाउन ही एकमात्र उपाय है जिससे हम इस वायरस  से कारगर तरीके से लड़ सकते हैं तीन सप्ताह के लॉकडाउन से बात नहीं बनने वाली है मुझे लगता है कि लॉकडाउन की स्थिति को अभी अधिक बढ़ाना होगा  । अगर ये माहमारी अपने थर्ड स्टेज में पहुंच गई तो फिर लॉकडाउन से भी बात नहीं बनेगी , तबलीगी जमात जैसे संगठनों से जो इस लॉकडाउन में सहयोग नहीं कर रहे हैं उनसे सख्ती से पेश आना होगा । पूरे विश्व की अपेक्षा भारत में अभी भी स्थिति नियत्रंण में इसलिए घबराने जैसी स्थिति नहीं है । भारत सरकार और सभी  राज्य सरकारें पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है इसलिए भारत अच्छे तरीके से इस बीमारी से लड़ पा रहा है ।

आलोचक लगातार केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना कर रहे हैं कि देश में एन 95 मास्क और पर्सनल प्रोटेक्शन इक्युपमेंट की कमी है ,  पूरे विश्व में ही मास्क , पीपीई और वेंटीलेटर की कमी है , कोविड 19 ने पूरे विश्व की स्वास्थ्य सेवाओं को धवस्त कर दिया है ।

अगर भारत में कोरोना की माहमारी थर्ड स्टेज में पहुंच जाती है तो इसके नुकसान की कल्पना भी नहीं की जा सकती भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में जनहानि की कल्पना से ही मन में सिहरन सी पैदा हो जाती है । जनहानि से साथ साथ ये माहमारी भारतीय अर्थव्यवस्था को बरबाद कर देगी। इस वायरस ने पूरे विश्व की टूररिस्ट इंडस्ट्री  को तबाह कर दिया पूरे विश्व की विमानन कम्पनियां आगामी दिनों में घाटा दर्ज करेंगी। भारत अमेरिका और चीन को करीब 150 अरब डॉलर का निर्यात करता है जिस पर फर्क पड़ना लाजिमी है। निर्यात नहीं होने की वजह से उत्पादन को रोकना होगा। पहले से मंदी की मार झेल रही ऑटो इंडस्ट्री के लिए कोरोना तबाही लेकर आया है । विभिन्न रेटिंग एजेंसियों नें भारत की विकास दर के अनुमान में एक प्रतिशत की कमी कर दी है ।

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कारोबार की इकोनॉमिक्स बहुत साधारण सी होती है अगर कारोबारी को फायदा होगा तो वो अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए नई नौकरी पैदा करेगा और इससे इम्पलॉयमेंट जनरेट होगा । लेकिन जो स्थितियां हैं उनमें नौकरी जाने का खतरा बहुत बढ़ गया है जिससे भारत में बेरोजगारी के प्रतिशत में काफी इजाफा होगा । जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर अतरिक्त भार पड़ेगा। इसलिए सरकार को बहुत संवेदनशीलता के साथ इन परिस्थितियों को संभाल होगा।

भारत में कॉम्युनिटी स्प्रेड से पहले ही कोरोना को रोक लिया जाता है तो यह बहुत बड़ी जीत होगी और विश्वभर में भारत की प्रतिष्ठा स्थापित होगी । इसको ऐसे समझना होगा अगर हम इस बीमारी को भारत में फैलने से रोक पाए तो भारत का भविष्य सुनहरा होगा ।अगर ये बीमारी भारत में फैल गई तो जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हम इक्कीस साल पीछे चले जाएंगे तो ऐसा ही होगी । जब विश्व में कोई आपदा आती है तो पूरी दुनिया में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं कोरोना वैश्विक महामारी बन चुका है इसलिए इसके बाद वर्ल्ड ऑर्डर में बदलाव आना लाजिमी है । विश्व के सभी देशों को अपने स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ाने होंगे । चीन को भी इसके परिणाम भुगतने होंगे । कई देशों ने नेताओं ने चीन के खिलाफ बयान देने शुरू भी कर दिए हैं ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने इसकी अगुवाई की है ।

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जैसे जैसे चीन विश्व के अन्य देशों का भरोसा खोयेगा वैसे ही भारत के लिए नए  अवसरों के द्वार खुलेंगे। अब जब कोरोना से लड़ाई खत्म होगी तो पश्चिम के देशों और खासकर अमेरिका का निशाना चीन होगा और चीन की मुश्किले शुरू हो जाएंगी। इसलिए भारत की व्यापारियों को इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए खुद को तैयार रखना होगा।

राहुल तालान- लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं

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