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भारत को क्यों हिन्दु राष्ट्र होना चाहिए , एक ब्रिटिशर-पाकिस्तानी का नजरिया

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नई दिल्ली- नरेंद्र मोदी और भाजपा पर यह आरोप लगाया जाता है कि वह भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। अगर ऐसा है भी तो मैं पूछना चाहता हूँ कि इसमें हर्ज ही क्या है ? भारत के हिन्दू राष्ट्र होने के पक्ष में मैं निम्नलिखित तर्क देता हूं ?
विश्व भर में फैले हिन्दुओं की जन्मभूमि और कर्मभूमि होने, उनमें से 15 प्रतिशत की शरणस्थली होने, और कम से कम पांच हजार साल पुरानी सनातन हिन्दू सभ्यता का केन्द्र होने के कारण भारतवर्ष को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। भारत को अपनी पहचान एक हिन्दू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में लज्जित होने की कोई आवश्यकता नहीं। हिन्दू धर्म जनसंख्या की दृष्टि से ईसाई और इस्लाम धर्मों के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है, पर इसका भौगोलिक विस्तार अन्य धर्मों की अपेक्षा सीमित रहा है। विश्व के संतानवे प्रतिशत हिन्दू केवल तीन हिन्दू-बहुल देशों- भारत, मॉरिशस और नेपाल में निवास करते हैं, और इस प्रकार अन्य विस्तारवादी धर्मों की अपेक्षा हिन्दू धर्म भारत और उससे भौगोलिक  रूप से जुड़े क्षेत्रों में केन्द्रीभूत है। विश्व के 95 प्रतिशत हिन्दू भारत में रहते हैं जबकि इस्लाम की जन्मभूमि अबेरिया में विश्व के केवल 1.6 प्रतिशत मुसलमान रहते हैं।

विश्व के वामपंथी और तथाकथित उदारवादी चिन्तकों को विश्व के विशाल मुस्लिम बहुमत वाले 53 देशों, जिनमें से 27 का शासकीय धर्म ही इस्लाम है, 100 से अधिक विशाल ईसाई-बहुमत वाले देशों के बीच ब्रिटेन, ग्रीस, आइसलैण्ड, नॉर्वे, हंगरी, डेनमार्क सरीखे ईसाई धर्म को अपना राजकीय धर्म घोषित कर चुके देशों, बौद्ध मत को शासकीय धर्म मानने वाले 6 देशों और यहूदी देश इज़राइल से कोई समस्या नहीं है, पर भारत के एक हिन्दू राष्ट्र होने की कल्पना मात्र से विक्षिप्त हो जाने वाले इस बात के लिए कोई तर्क नहीं दे पाते कि भारत को हिन्दू राष्ट्र क्यों नहीं होना चाहिए ?

भारत के हिन्दू राष्ट्र हो जाने से उसका पंथनिरपेक्ष चरित्र खतरे में आ जाएगा- यह मानने का कोई कारण नहीं है। पारसी, जैन, सिख, इस्लाम और जरसुस्थ-सभी धर्मों के मानने वाले भारत में फले-फूले हैं- यही इस बात को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि हिन्दू अन्य मतों के प्रति असहिष्णु नहीं हैं। भारत में अन्य धर्मों के पूजा-स्थलों में हिन्दू भी पूजा करते देखे जा सकते हैं। हिन्दू धर्म में धर्मान्तरण के लिए कोई स्थान है ही नहीं। अनेक मुस्लिम और ईसाई देश हैं जो समय-समय पर अन्य देशों- जैसे म्याँमार, फिलिस्तीन, यमन आदि में इन धर्मों के मानने वालों के धार्मिक उत्पीड़न पर मानवाधिकार-हनन का शोर मचाते रहते हैं, पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिन्दुओं और सिखों पर हुए अमानवीय अत्याचारों पर मुँह खोलना उन्होंने कभी ज़रूरी नहीं समझा। क्या आज कोई याद भी करता है कि 1971 में पाकिस्तान की फौज ने बांग्लादेश के निरीह हिन्दुओं का किस पैमाने पर नरसंहार किया और अत्याचार किया था ? वन्धमा (गान्दरबल) सहित कश्मीर के नरसंहार, पाकिस्तान से हिन्दुओं के सर्वांगी उन्मूलन और अरब (उदाहरण के लिए मस्कट) में ऐतिहासिक हिन्दू मन्दिरों और हिन्दू धर्म को नष्ट किये जाने की आज कोई बातें भी करना चाहता है?

भारतीय शासन-तन्त्र की धर्मनिरपेक्षता का ढिंढोरा पीटने वाली नीतियाँ सीधे-सीधे धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धान्तों के विरुद्ध और विशाल हिन्दू बहुमत के प्रति भेदभाव कारी रही हैं। क्या आपने भारत में दी जाने वाली हज-सब्सिडी का नाम सुना है? सन 2000 से 15 लाख भारतीय मुसलमान इसका फायदा उठा चुके हैं। भारतीय सुप्रीम कोर्ट को इसमें हस्तक्षेप करके भारत सरकार को निर्देश देना पड़ा कि वह अगले दस सालों में इस सब्सिडी को क्रमशः समाप्त करे। दुनिया का अन्य कोई धर्मनिरपेक्ष देश किसी विशेष मत के अनुयायियों के धार्मिक पर्यटन के लिए इस प्रकार की छूट देता है? 2008 में यह छूट प्रति मुस्लिम तीर्थयात्री 1000 अमरीकी डॉलर थी।
जब भारत अपने देश के मुसलमानों की उनके मजहबी कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता कर रहा था, तब सऊदी अरब में जहाँ हिन्दू-प्रतीक मूर्तिपूजा के नाम पर अवैधानिक, निन्दनीय एवम् दण्डनीय बना रहा था, भारत सहित पूरे विश्व में वहाबी अतिवाद का निर्यात कर रहा था। हिन्दुओं को सऊदी अरब में अपना मन्दिर बनाने की इजाज़त नहीं है, पर हिन्दू करदाताओं के पैसों से भारत सरकार मजहबी तीर्थयात्राओं के द्वारा सऊदी अरब के अर्थतन्त्र को मजबूती प्रदान करने में लगी थी।
किसी भी वास्तविक सेक्युलर राष्ट्र में सभी नागरिकों के लिए एक सामान कानून होते हैं, पर भारत में विभिन्न धर्म के मानने वालों के लिए अगल कानून हैं (जो भारतीय संविधान से टकराते रहते हैं)। सरकार अनेक मन्दिरों को अपने अधिकार में रखती है पर मस्जिदें और चर्च पूर्ण स्वायत्त हैं। हज-यात्रा पर छूट है पर अमरनाथ या कुम्भ की यात्रा के लिए नहीं। एक सेक्युलर राष्ट्र को किसी मजहबी पर्यटन पर छूट नहीं देनी चाहिए- इस पर तर्क-वितर्क की कोई गुंजाइश नहीं है।

हिन्दुओं ने हमेशा अल्पमत का आदर किया है और उन्हें सुरक्षा प्रदान की है, उनका सहिष्णुता का इतिहास ध्यान देने योग्य है। पारसी जब हर जगह उत्पीड़ित हो रहे थे, तब भारत ने उन्हें शरण दी, पिछले हज़ार सालों में देश की जनसंख्या में नगण्य हिस्सेदारी के बावजूद वह स्वयं भी विकसित हुए हैं और देश के विकास में भी सहभागी हुए हैं।
दुनिया भर में प्रताड़ित होने वाले यहूदियों को 2000 साल पहले और सीरियाई ईसाईयों को 1800 साल पहले भारत में ही शरण मिली। जैन, बौद्ध और सिख धर्म तो हिन्दू धर्म की शाखाएं ही हैं और इनके अनुयायी बिना किसी समस्या के हिन्दुओं के साथ शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व में रहते आये हैं। हिन्दुओं को अपने इस सहिष्णु इतिहास पर गर्व करना चाहिए न कि शर्मिन्दा होना चाहिए।

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भारत आज अगर एक सेक्युलर राज्य है, तो 1976 के संविधान-संशोधन या उसके कानून बनाने वाले कारण नहीं, बल्कि उसके विशाल हिन्दू बहुमत के कारण, जो स्वाभाव से ही सेक्युलर है। हिन्दू धर्म की प्रकृति ही, न कि कोई काग़ज़ का टुकड़ा जो 1000 सालों के सहिष्णु व्यवहार के बाद अस्तित्त्व में आया,जो पन्थनिरपेक्षता की गारण्टी है। भारत को अपने को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए और जैन, बौद्ध और सिख धर्मों के अनुयायियों की सुरक्षा करनी चाहिए क्योंकि दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं कर रहा है।
भारत हिन्दू राष्ट्र होना उसकी विशाल हिन्दू जनसंख्या के छल-बल से मतान्तरण और अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण को रोकने के मार्ग प्रशस्त करेगा। भारत एक प्रगतिशील और विकासोन्मुख राष्ट्र तभी तक रहेगा जब तक वह सेक्युलर है, और वह सेक्युलर तभी तक रह सकता है जब तक देश के जनसांख्यकीय स्वरूप में हिन्दुओं का वर्चस्व बना रहता है। पन्थनिरपेक्षता और हिन्दू धर्म एक ही सिक्के के दो पहलू हैं; सिक्का किसी ओर गिरे, जीत भारत की ही होगी।

अगर भारत एक हिन्दू राष्ट्र बन जाता है, तो इससे अच्छी बात कोई हो ही नहीं सकती। देश में एक ही आचार संहिता होगी जो सब पर बाध्यकारी होगी। देश में कानून का शासन होगा जो किसी भी देश के विकास के लिए एक आवश्यक तत्व होता है । (अमरीका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान आदि इसके उदहारण हैं)। छल-बल से मतान्तरण जो विभिन्न मतों के बीच टकराव का मूल कारण रहा है, पर पूर्ण रोक लगेगी जिससे हर व्यक्ति नास्तिकता सहित अपने मत का पालन करने के लिए पूर्ण स्वतन्त्र होगा। बहुत से लोगों के लिए यह एक आश्चर्यजनक समाचार होगा कि निरीश्वरवाद (ईश्वर के अस्तित्व को नकारना) भी हिन्दू-दर्शन का एक अंग है। क्या विश्व में इस तरह का कोई दूसरा धर्म है जो अपने धर्म को न मानने वालों का भी इस तरह सम्मान करता हो?

मुस्लिम आक्रान्ताओं द्वारा लगभग 800 सालों तक चले विध्वंसकारी युग से बहुत पहले से धार्मिक सहिष्णुता और पन्थनिरपेक्षता इस भूभाग के निवासियों का मूल स्वभाव ही रहा है। इन इस्लामी आक्रमणों में जो लगभग 1000 ईसवी सन से 1739 तक अनवरत जारी रहे, कम से कम 10 करोड़ हिन्दू मारे गये जो इतिहास में किसी भूभाग में घटित सबसे बड़ा हत्याकाण्ड है, पर हिन्दुओं ने इन आक्रान्ताओं के वंशजों से उनका बदला लेने की कभी कोशिश नहीं की। वर्तमान समय में दिख रहे हिन्दू बहुमत और इस्लामी अल्पमत के बीच टकराव के लिए सरकारों की छद्म धर्मनिरपेक्ष नीतियाँ जिम्मेदार हैं, हिन्दू-धर्म नहीं। हिन्दू भारत में अ-हिन्दुओं की धार्मिक स्वतन्त्रता पर कोई बन्धन नहीं होगा।
हिन्दुओं को अपने राष्ट्र के इतिहास पर गर्व होना चाहिए। उन्हें अपने मतभेद ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर हल करने चाहिए। वास्तविकता से भागने के प्रयास इस देश के लिए जो लम्बे समय तक धार्मिक सहिष्णुता की संस्कृति का ध्वजवाहक रहा है, अन्ततः विनाशकारी ही सिद्ध होगा। भारत मुस्लिम राष्ट्रों को प्रसन्न करने के लिए अपने बहुमूल्य सिद्धान्तों का बलिदान करने की मूर्खता करता रहा है, सेक्युलरवाद के नाम पर तुष्टीकरण की नीतियों का भी अनुसरण लम्बे समय से करता रहा है। हिन्दुओं को अब अपने अन्दर की शान्ति को बाहर प्रकट करने के लिए एक होकर देश पर अपना दावा पेश करना चाहिए। हिन्दू राष्ट्र के रूप में स्वभाव से ही, और संविधान में लिखित किसी भूमिका या अनुच्छेद के कारण नहीं बना है, सेक्युलर भारत शेष विश्व के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
और ऐसा करने का समय है।

अभी; तुरन्त।

ये आर्टिकल मूलत इंग्लिश में है और फेसबुक से लिया गया है और इसके लेखक पाकिस्तानी मूल खालिद उमर हैं जो इस वक्त ब्रिटेन में रह रहे हैं

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2 Comments
  1. DHANOJ KUMAR says

    वेद पुराण के माध्यम से भारतीय सभ्यता एवम् संस्कृति का महत्तव पता चलता है, इतिहास के घटित घटना के माध्यम से भारत का वैभता एवम् विशालता के महत्तव का पता चलता है भारत की सुंदरता एवम् सफलता के वजह से ही मुगल एवम् अंग्रेज भारत पर छल प्रपंच से अधिकार प्राप्त किए इस सब घटित घटना से प्रतीत होता है भारत एक बहुत ही विशाल एवम् संबृद हिन्दू राष्ट्र था भारत भूमि पर रामायण एवम् महाभारत की घटित घटना भी साक्षी है कि भारत हिन्दू वीर की जन्म भूमि रही जहां भगवान श्रीराम एवम् श्री कृष्ण अवतार लिए जो ये गवाही देता है कि भारत पूर्ण प्रभूत हिन्दू राष्ट्र था , इसलिए भारत को अपने पुराने भैभव को प्राप्त करने हेतु ही वर्तमान सरकार के मुखिया देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर मोदी जी ने भारत के प्रधानमंत्री के पद पर आसीन होकर आज पूरे विश्व में एक हिन्दू शक्ति का लोहा मनवाया है इसलिए भारत को विश्व कल्याण एवं उन्नति के लिए हिन्दू राष्ट्र होना चाहिए

  2. Rahul says

    बहुत अच्छे तर्क हैं

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