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नहीं माना नेपाल , नए नक्शे को लेकर सविंधान संशोधन पेश, भारत से बिगडेंगे सम्बंध

चीन के इशारे पर चल रहा है नेपाल

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नई दिल्ली- भारत के साथ सीमा विवाद के बीच नेपाल सरकार ने रविवार को विवादित नए नक्शे को लेकर संसद में एक संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया । नए नक्शे में अपने इलाकों को दिखाए जाने पर भारत द्वारा कड़ी आपत्ति जताने के बावजूद नेपाल ऐसा करने से नहीं माना। नेपाल सरकार की ओर से कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्री शिवमया तुंबांगफे ने इस विधेयक को पेश किया। इससे एक दिन पहले मुख्य विपक्षी नेपाली कांग्रेस ने भी कानून का समर्थन किया था। यह संविधान का दूसरा संशोधन होगा। नेपाल ने हाल ही में लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा के रणनीतिक प्रमुख क्षेत्रों पर दावा करते हुए देश का संशोधित राजनीतिक और प्रशासनिक मैप जारी किया। भारत ने इसपर कड़ी आपत्ति जताई थी। भारत ने  कहा था कि कृत्रिम तरीके से बढ़ाई जमीन को स्वीकार नहीं किया जा सकता है और पड़ोसी देश को इस तरह के ‘अनुचित दावे’ से परहेज करना चाहिए।

कैसे शुरू हुआ विवाद
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जब लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर जाने वाले रास्ते का उद्घाटन किया, तब नेपाल ने इसका विरोध किया था। उसके बाद 18 मई को नेपाल ने नए नक्‍शे में यह हरकत कर दी। भारत ने साफ कहा था कि ‘नेपाल को भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। नेपाल के नेतृत्व को ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिससे बैठकर बात हो सके।’

कितना पुराना है विवाद

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भारत और नेपाल के वर्तमान विवाद की शुरुआत 1816 में हुई थी। नेपाल के राजा ब्रिटिश हुकूमत के हाथों कई इलाके हार गए थे।जिसके बाद सुगौली की संधि हुई संधि में नेपाल के राजा को सिक्किम, नैनीताल, दार्जिलिंग, लिपुलेख, कालापानी को भारत को देना पड़ा था। यही नहीं तराई का इलाका भी अंग्रेजों ने नेपाल से छीन ल‍िया था। जब नेपाल के राजा ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों का साथ दिया था तब अंग्रेजी हुकुमत ने खुश होकर  पूरा तराई का इलाका इनाम में दे दिया था ।

नेपाल के वर्तमान प्रधानमंत्री भारत विरोधी है 

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नेपाल में इन दिनों राजनीति में वामपंथियों का दबदबा है। वर्तमान प्रधानमंत्री केपी शर्मा भी वामपंथी हैं। वो नेपाल में संविधान को अपनाए जाने के बाद वर्ष 2015 में पहले प्रधानमंत्री बने थे। उन्‍हें नेपाल के वामपंथी दलों का समर्थन हासिल था। केपी शर्मा ओली पहले भी कई बार भारत विरोधी बयान दे चुके हैं ।अपनी भारत विरोधी भावनाओं के लिए जाने जाते हैं। ओली ने पिछले चुनाव में भारत के खिलाफ जमकर बयानबाजी की थी। 

किसी और के उससावे पर नेपाल कर रहा है ऐसी हरकत

भारत के सेना प्रमुख पहले ही बयान दे चुके हैं कि नेपाल भारत विरोधी हरकत किसी दूसरे देश के उकसावे पर कर रहा है। नेपाल सरकार इस कदम से दोनों देशों के सम्बंधों में गिरावट आने की आशंका है ।

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