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चीन को कई फ्रंट पर घेर रहा है भारत , यह हम नहीं चीनी अखबार कह रहा है

एक तरफ चीनी लद्दाख में भारतीय सीमा पर सैनिको का जमावड़ा बढ़ा रहा है। वहीं दूसरी ओर भारत पर खुद को घेरने के आरोप भी मढ रहा है।

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन ने गुरुवार (जून 4, 2020) को एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सम्बन्ध को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने में मदद मिलेगी, इसीलिए इस डील को  बेहद अहम माना जा रहा है। दोनो देशों के बीच इस साझेदारी ने चीन के कान खड़े कर दिए हैं। चीनी मीडिया इसे चीन को घेरने की रणनीति के रूप में देख रही है। चीनी सरकार के प्रोपेगैंडा समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’  ने लिखा कि बीजिंग को अलग-थलग करने के लिए अन्य देशों के साथ भारत समझौता कर रहा है और भारत चीन को कई फ्रंट्स पर घेरना चाहता है।

विदेश नीति के चीनी विशेषज्ञों के हवाले से अखबार कहता है कि चीन का मुकाबला करने के लिए ही भारत और ऑस्ट्रेलिया ने हाथ मिलाया है। ऑस्ट्रेलिया से भी हाल के दिनों में चीन के सम्बन्ध अच्छे नहीं रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया रक्षा मामलों में अभी कर अमेरिका और आर्थिक मामलों में चीन पर ही निर्भर रहा है। वह दोनों देशों के बीच संतुलन बनाकर चलता रहा है। लेकिन, एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है। अखबार लिखता है कि हाल के दिनों में ऑस्ट्रेलिया ने कई बार चीन का विरोध किया है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन पर भले ही ऑस्ट्रेलिया की निर्भरता हो लेकिन अब उसने उससे दूरी बनानीशुरू कर दी है।

 लेख में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2018 में वुहान में पहले वुहान समिट में शिरकत की थी जिसके बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय सम्बंधों में खासा सुधार हुआ था। सीमा विवाद सहित संवेदनशील मुद्दों को हल करने के लिए एक समझ विकसित हुई थी।

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लेख में भारत के संदर्भ में कहा गया है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2017 में इंडो-पैसिफिक स्ट्रेटजी बनाई थी।, इसलिए ट्रम्प प्रशासन चाहता है कि भारत इस रणनीति में शामिल हो । मोदी को जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित करना ट्रम्प का इसी रणनीति का हिस्सा है ।

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्वाडीलेटरल बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है और अब ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के सबंधों में नजदीकियाँ भी बढ़ने लगी हैं। हिन्द महासागर में भारत और ऑस्ट्रेलिया वैसे भी प्रतिस्पर्द्धी रहे हैं। लोकेशन के हिसाब से ऑस्ट्रेलिया इंडोनेशिया जैसे देशों का क़रीबी भी रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ पर विश्वास रहा है, ताकि दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों के भारत के सम्बन्ध मजबूत हो सकें

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दक्षिण-पूर्वी एशिया और हिन्द महासागर में भारत बड़ा किरदार अदा करने की रणनीति पर लगा हुआ है। भारत ने ‘Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation (BIMSTEC)’ का भी सदस्य बना रखा है, जो सात देशों का समूह है। इसके सेक्रेटेरिएट के ख़र्च का लगभग एक तिहाई हिस्सा भारत ही वहन करता रहा है। भारत अब तक ऑस्ट्रेलिया के साथ सैन्य साझेदारी से कतराता रहा है। लेकिन दोनों देशों के बीच रक्षा समझौते बाद ऑस्ट्रेलिया अब मालाबार नौ सैन्य अभ्यास में शामिल हो सकेगा। विशेष रूप से सैन्य सहयोग के मामले में ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच साझेदारी बढ़ी है, जो  पूरे इन्डो-पैसिफिक रीजन में रणनीतिक तौर पर एक नया बदलाव लाएगी । इस बदलाव इन्डो-पैसेफिक में शांति और स्थिरता को खतरे पैदा होगा और टकराव बढेगा। वैश्विक प्रभाव वाली एक शक्ति के रूप में भारत, अमेरिका की स्ट्रैटजी के साथ पूरी तरह से समन्वय करेगा। भारत अपनी कूटनीतिक स्वतंत्रता पर जोर देता रहा है। यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑस्ट्रेलिया और भारत चीन का सामना करने के लिए अपनी रणनीतियों का समन्वय करेंगे या नहीं ।

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