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जिस संस्कृत को बिसरा रहा है भारत , पूरा विश्व उसी पर शोध में जुटा है

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नई दिल्ली-मानव सभ्यता सनातन है और सनातन है संस्कृत , ऐसा माना जाता है कि शिव जी के डमरू से संस्कृत व्याकरण की उत्पत्ति हुई है और संस्कृत है जिसके शब्दों में छिपा है ज्ञान के रहस्य। बेशक संस्कृत को आज हम गुजरे जमाने की भाषा मानते हैं और जिसे हमने अपनी जरूरतों की सूची से बाहर कर दिया है लेकिन पूरा विश्व आज उसी भाषा पर शोध कर रहा है।

आइए जानते है संस्कृत के बारे में कुछ रोचक तथ्य

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  • फोर्ब्स पत्रिका 1987 के अनुसार संस्कृत कंप्यूटर में इस्तेमाल के लिए सबसे अच्छी भाषा है।

  • जर्मन स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा यह सिद्ध किया गया कि भारतीय विक्रम संवत कैलेंडर (जिसमें नया साल सौर प्रणाली के भूवैज्ञानिक परिवर्तन के साथ शुरू होता है) सबसे अच्छे प्रकार का कैलेंडर है।

  • अमेरीकन हिन्दू यूनिवर्सिटी (शोध के बाद) इस तथ्य को जानकर आपको बेहद हैरानी होगी कि दवा के लिए सबसे उपयोगी भाषा अर्थात संस्कृत में बात करने से बीपी, मधुमैह , कोलेस्ट्रॉल आदि जैसे रोग से मुक्त हो सकती है और व्यक्ति स्वस्थ्य भी रहेगा । कारण यह है कि संस्कृत में बात करने से मानव शरीर का तंत्रिका तंत्र सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश(Positive Charges) के साथ सक्रिय हो जाता है।

  • रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी का दावा है कि संस्कृत ऐसी भाषा है जो अपनी पुस्तकों वेद, उपनिषदों, श्रुति, स्मृति, पुराणों, महाभारत,रामायण आदि में सबसे विकसित प्रौद्योगिकी (Technology) रखती है।

 

  • नासा 60,000 ताड़ के पत्ते की पांडुलिपियों निरंतर अध्ययन कर उसे उपयोग कर रहा हैं। वहीं असत्यापित रिपोर्ट का कहना है कि रूसी, जर्मन, जापानी, अमेरिकी सक्रिय रूप से हमारी पवित्र पुस्तकों से ली गई आलौकिक चीजों पर शोध कर उन्हें वापस दुनिया के सामने अपने नाम से रख रहे हैं।

  • दुनिया के ज्यादातर देशों में एक या अधिक संस्कृत विश्वविद्यालय संस्कृत के बारे में अध्ययन और नई प्रौद्योगिकी प्राप्त करने के लिए है, परंतु दुर्भाग्य से संस्कृत को समर्पित उसके वास्तविक अध्ययन के लिए एक भी संस्कृत विश्वविद्यालय भारत में नहीं है।

  • नासा के वैज्ञानिक द्वारा एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका छठी और सातवीं पीढ़ी के सुपर कंप्यूटर संस्कृत भाषा पर आधारित बना रहा है जिससे कंप्यूटर की सीमा को कई गुणा तक बढ़ाया जा सकता है । परियोजना का लक्ष्य 2025 (छठी पीढ़ी के लिए) और 2034 (सातवीं पीढ़ी के लिए) है, इसके बाद संस्कृत सीखने के लिए होड़ मचेगी।

  • संस्कृत भाषा मौजूदा वक्त में “उन्नत किर्लियन फोटोग्राफी” तकनीक में इस्तेमाल की जा रही है। (वर्तमान में, उन्नत किर्लियन फोटोग्राफी तकनीक सिर्फ रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका में ही मौजूद हैं। लेकिन भारत को यह सौभाग्य प्राप्त नही है।

  • ब्रिटेन मौजूदा वक्त में हमारे श्री चक्र पर आधारित एक रक्षा प्रणाली पर शोध कर रहा है।

  • नासा (नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन)ने संस्कृत भाषा को अंतरिक्ष में कोई भी मैसेज भेजने के लिए सबसे उपयोगी भाषा माना है ! नासा के वैज्ञानिकों की मानें तो जब वह स्पेस ट्रैवलर्स को मैसेज भेजते थे तो उनके वाक्य उलटे हो जाते थे। इस वजह से मेसेज का अर्थ ही बदल जाता था। उन्होंने दुनिया के कई भाषा का इस्तेमाल किया लेकिन हर बार यही समस्या आई। आखिर में उन्होंने संस्कृत में मेसेज भेजा क्योंकि संस्कृत के वाक्य उलटे हो जाने पर भी अपना अर्थ नहीं बदलते हैं।

अतः हमें याद रखना है कि हमें अपनी प्राचीन धरोहर संस्कृत को समृद्ध करने के लिए इसके अध्ययन की आवश्यकता है ।

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