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एलएसी पर झड़प में चीनी कमांडर समेत 43 सैनिक मारे गए

चीन कि ओर से कमाडिंग ऑफिसर समेत 43 जवान शहिद हो गए है । सीमा पर लगातार एंबुलेंस कि आवाजाही से अंदाजा लगाया जा रहा है कि चीन के तरफ भारी नुकसान हुआ है।

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 नई दिल्ली- भारत और चीन के बीच काफी दिनों से लद्दाख सीमा पर चल रहा तनाव अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। बीते दिन भारतीय सेना ने अपने एक बयान में जानकारी दी कि गलवान घाटी के पास चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए हैं, इनमें एक कमांडिंग अफसर भी शामिल हैं। इस झड़प में चीन को भी काफी नुकसान हुआ है। सेना के सूत्रों का कहना है  कि चीन कि ओर से कमाडिंग ऑफिसर समेत 43 जवान शहिद हो गए है । सीमा पर लगातार एंबुलेंस कि आवाजाही से अंदाजा लगाया जा रहा है कि चीन के तरफ भारी नुकसान हुआ है। अब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। कूटनीति के स्तर पर लगातार सुलझाने की कोशिश भी चल रही है।

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वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनातनी अंतत: खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई। गालवन घाटी में भारत का सड़क बनाना चीन को पच नहीं रहा है, हालांकि यह सड़क पूरी तरह भारतीय सीमा है। धोखे के लिए के लिए मशहूर चीनियों ने हर मौके पर दोहरी चाल चली। एक ओर चीन के नेता बातचीत का राग अलापते हैं, तो दूसरी ओर उसके सैनिक अचानक हमला कर देते हैं।
जिस गलवान घाटी में तनाव के बाद भारत- चीन के बीच 1962 में युद्ध की नौबत आई, उसी गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प हुई। दरअसल, गलवान घाटी सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से चीन को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर एकतरफा बढ़त लेने से रोकती है।

यही कारण है कि चीन अरसे से इस घाटी पर निगाह जमाए बैठा था। 1962 की जंग में गालवन घाटी में गोरखा सैनिकों की पोस्ट को चीनी सेना ने 4 महीने तक घेरे रखा था। इस दौरान 33 भारतीयों की जान गई थी। यह घाटी चारों तरफ से बर्फीली पहाड़ियों से घिरी है।

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