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चीनी कम्पनियों पर प्रतिबंध की फैसला ले सकती है सरकार , कर रही है कानूनी पहलूओं पर विचार

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नई दिल्ली-  गालवन घाटी में चीन जिस धोखे का परिचय दिया है उससे भारत के लोग आहत हैंं । देश भर में चीनी सामानों का बहिष्कार भी शुरू हो गया है लोग चीनी प्रीमियर शी जिनपिंग के पुतले जला रहे हैं। भारत सरकार भी जिन प्रोजेक्ट को चीनी कम्पनियां बना रही है उन को रद्द करने पर विचार कर रही है । सूत्रों के माने तो सरकार दिल्ली- मेरठ RRTS प्रोजेक्ट को रद्द कर सकती है । इस RRTS प्रोजेक्ट में हाल में चीन की एक कम्पनी को एक पांच किलोमीटर की टनल बनाने का ठेका मिला था । सूत्रों का कहना है कि सरकार इस ठेके को रद्द करने पर विचार कर रही है।

क्या है RRTS

दिल्ली-मेरठ सेमी हाई रेल कॉरिडोर को RRTS  कहते हैं । दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड स्ट्रेच बनाने के लिए सबसे कम बोली एक चीनी कंपनी शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (STEC) ने लगाई थी । जिसके बाद इस कम्पनी को इस टनल को बनाने का ठेका दे दिया गया । लेकिन सरकार अब इस ठेके को रद्द करने पर विचार कर रही है।

आपको बता दे कि गालवन घाटी में सोमवार की दरम्यानी रात को चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों की एक छोटी टुकड़ी पर हमला कर दिया था जिसमें 20 जवानों समेत एक कमांडिंग ऑफिसर सतोष बाबू शहीद हो गए थे । अभी कई सैनिक गम्भीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। वहीं भारतीय सेना कार्रवाई में 43 चीनी सैनिकों के मारे जाने की खबर है साथ ही एक चीनी कमांडिंग ऑफिसर भी मारा गया है। वहीं अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में एक कमांडिंग ऑफिसर समेत 35 चीनी सैनिकों के मारे जाने की बात कही गई है।

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चीनी विदेश मंत्रालय ने किया गालवन घाटी की अपना दावा

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चीनी विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया है कि गालवन घाटी पर चीन का अधिकार है । साथ चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वो भारत के साथ बातचीत से मुद्दा सुलझा लेगें। वहीं प्रवक्ता ने दावा किया कि गालवन हमेशा से चीन का था । साथ ही आरोप लगाया कि भारतीय सैनिक लगातार एलएसी का अतिक्रमण करते रहते हैं। वहीं भारतीय सेना लगातार एलएसी पर अपनी स्थिति मजबूत कर रही है । आईटीबीपी के साथ आर्मी भी एलएसी पर पोजिशन ले रही है।

चीन लड़ रहा है इन्फॉर्मेशन वॉर

चीनी सबसे पहले एक इन्फॉर्मेंशन वॉर लड़ता है । वो झूठी इन्फॉर्मेंशन लोगों में फैलता है । अमेरिकी खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट कहती है कि 35 चीनी सैनिक भारत के साथ एलएसी पर झड़प में मारे गए है । लेकिन चीन की तरफ अभी तक कोई ऑफिशियल बयान नहीं आया है। 24 घण्टे में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता दो बार प्रेस कॉंफ्रेंस कर चुके हैं और अपने प्रोपेगैंडा के तहत सारे वाकये का दोष भारतीय आर्मी पर मढ़ने की कोशिश हो रही है । साथ ही वो अपने स्टेटमेंट गलवान घाटी को अपना बताते नजर आते हैं। इसलिए हमें चायना की इन्फॉर्मेंशन वॉर में नहीं फंसना होगा । अपनी स्ट्रेटजी पर लगातार काम करते रहना होगा ।

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1 Comment
  1. […] कुछ भारतीय संस्थान है जो बोलने की आजादी का फायदा उठाकर […]

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