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भारत चीन सीमा विवादः प्रतिशोध की आग में उबल रहा देश, हर तरफ चीनीयों के खिलाफ आक्रोश और प्रदर्शन

गलवान घाटी में हिंसक झड़प से देश भर में प्रतिशोध की भावना जग उठी है

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नई दिल्ली- भारत और चीन के बीच की हालात आज युद्ध स्तर पर जा रहा है । हर तरफ माहौल में चीन और चीनी के खिलाफ धृणा नजर आ रही है ।गुजरात से लेकर बंगाल तक तथा जम्मु से लेकर केरल तक लोगों में आक्रोश और प्रदर्शन का माहौल बन गया है । हर तरफ लोगो का हुजुम चीनी समानों के बहिष्कार में लगा है। इसकी शुरुआत बीते दिनों लद्दाख के गलवान घाटी में हिंसक झड़प से हुई है जहां भारत के कमाडिंग ऑफिसर समेत 20 सैनिकों के मारे जाने कि सूचना मिली। इस झड़प में चीन को भी काफी नुकसान हुआ है। सेना के सूत्रों का कहना है कि चीन कि ओर से कमाडिंग ऑफिसर समेत 43 जवान शहिद हो गए है । सीमा पर लगातार एंबुलेंस कि आवाजाही से अंदाजा लगाया जा रहा है कि चीन के तरफ भारी नुकसान हुआ है। अब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। कूटनीति के स्तर पर लगातार सुलझाने की कोशिश भी चल रही है। लेकिन बात बद से बदत्तर कि ओर जा रहा है । प्रधानमंत्री लगातार मामले पर नजर बनाए हुए है इसके साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सेना को कमांड कर रहे है ।

1967 के युद्ध में जनरल सगत सिंह ने चीन के सैनिकों को छक्के छुड़ा दिए।

आज कि स्थिति 1962 के य़ुद्ध के दौरान घटित मामले की याद दिला रही है तब एक सेनानायक ने पूरे खेल को बदल कर रख दिया था। सिकिम्म के नाथुला पास पर उसके आदेश पर भारतीय सैनिकों ने छोटे से युद्ध में 400 चीनी सैनिकों को धराशायी कर दिया था हजारों घायल हुए थे। इस वीर सेनानायक का नाम था मेजर जनरल सगत सिंह । 1962 के बाद पहली बार जनरल सगत सिंह ने दिखाया कि

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फाइल फोटो

चीनियों के साथ न सिर्फ़ बराबरी की टक्कर ली जा सकती है, बल्कि उन पर भारी भी पड़ा जा सकता है। लेकिन एक चीज़ ध्यान देने लायक थी कि 1962 की लड़ाई के बाद भारतीय सैनिकों के मन में चीनियों के प्रति जो दहशत बैठ गई थी, वो जनरल सगत सिंह के कारण खत्म हो गई। भारत के जवान को अहसास हो गया कि वो भी चीनियों को मार सकते हैं। पहली बार वी गेव द चाइनीज अ ब्लडी नोज।

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आज के हालात

आज का भारत 1962 के भारत जैसा बिल्कूल नही रहा है । देश कई गुणा तेजी से विकशित हुआ है । देश ने परमाणु से लेकर कई रक्षा तंत्र मजबूत किए है । भारत महाशक्तिशाली देशों के कतार में अव्वल आ रहा है । ऐसे में चीन को समझना पड़ेगा नए भारत से मुकाबले में उसकी एक नही चलेगी । चीन भी इस बात को बेहतर समझ रही है भारत से युद्ध अब उसकी नासमझी होगी , उसे कई मोड़ पर पटखनी मिलेगी । आज चीन का कारोबार बड़े पैमाने पर भारत में चलता है अगर इसकी बहिष्कार भारतीयों ने की तो चीनी कि अर्थव्यवस्था पुरी तरह डगमगा जायेगा। । ऐसे में चीन के लिए युद्ध कि बात करना नासमझी ही कहा जाएगा ।

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