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चीन पर भारत सरकार का एक्शन- BSNL में 4G की स्थापना से दूर होंगी चीनी कम्पनी

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नई दिल्ली- धोखे से भारतीय जवानों मारने वाले चीन पर भारत सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है । भारतीय जवानों के खून का बदला फौज कैसे लेगी अभी वो भविष्य की गर्भ में है । लेकिन भारत सरकार ने चीन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की शुरूआत कर दी है । भारत सरकार ने टेलीकॉम मंत्रालय के अधीन काम करने वाली कंपनी बीएसएनएल की 4जी टेक्नोलॉजी की स्थापना में चीन की कंपनियों को दूर रखने का निर्णय लिया है । उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार संचार मंत्रालय ने बीएसएनएल को इसका निर्देश दे दिया है। इस दिशा में जारी टेंडर को रिवर्स करने का भी फैसला किया गया है। साफ है कि चीनी कंपनियां अब इससे बाहर की जाएंगी।

खत्म होने के कगार पर पंहुच चुकी बीएसएनएल को रिवाइव करने के लिए इन दिनों संचार विभाग की तरफ से कई प्रयास किए जा रहे हैं। बीएसएनएल की 4जी सेवा की स्थापना उनमें से एक हैं। 4जी सेवा की स्थापना के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। सूत्रों के मुताबिक इस टेंडर में चीनी कंपनियों को रोकने के लिए टेंडर को नए नियमों के साथ फिर से जारी करने का निर्देश दिया गया है। चीनी उपकरणों को लेकर भारत सरकार के सख्त रवैये को देखते हुए अब 5जी टेक्नोलॉजी के टेंडर में भी चीनी कंपनियों की को हिस्सा नहीं लेने दिया जाएगा। यह चीन के लिए बड़ा नुकसान होगा।

संचार के क्षेत्र में उपयोग होने वाले चीनी उपकरणों पर भी लगेगा प्रतिबंध

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मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक संचार विभाग मोबाइल सेवा के क्षेत्र में भी चीन पर निर्भरता को कम करने की दिशा में गंभीरता से विचार कर रहा है। इसीलिए टेलीकॉम क्षेत्र की निजी कंपनियों को भी चीन की कंपनियों द्वारा बनाए गए उत्पादों पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए कहा गया है। निजी टेलीकॉम कंपनियां मोबाइल सेवा से जुड़े उपकरणों में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल कर रही है। बताया तो यह भी जा रहा है कि चीनी उपकरणों की सुरक्षा जांच अब बहुत सख्त हो सकती है। दरअसल चीन के उपकरणों पर कई बार सवाल उठाए गए हैं।

अमेरिका ने लगाए है चीनी कम्पनियों पर जासूसी करने के आरोप

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चीन के उपकरणों से भारत की जासूसी को लेकर भी कई बार सवाल उठे हैं। चीनी कंपनी हुआवे एवं जेटीई कठघरे में है और यह माना जाता रहा है कि इन कंपनियों में परोक्ष रूप से सरकार शामिल है। अमेरिका समेत कई यूरोपीय देश इस बात को मानते हैं कि इन कंपनियों में चीन की सरकार की हिस्सेदारी है इसलिए हुवावे पर अमेरिका में प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं । इन देशों में सख्त कदम भी उठे हैं। भारत भी उसी दिशा में बढ़ा तो चीन के लिए परेशानी बढ़ेगी। भारत की ओर से प्रतिशोध का यह पहला कदम माना जा सकता है। आने वाले दिनों में भारत सरकार चीनी कम्पनियों पर कई और प्रतिबंध लगा सकती है ।

चीनी अखबार ने दी धमकी

चीन के प्रोपेगैंडा टूल ग्लोबल टाइम्स ने चेतावनी देते हुए लिखा कि बॉयकाट चाइना की आवाजें एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती है। इससे भारत का इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (चीन) के साथ विवाद पैदा होगा। उसने कहा कि निवेश और व्यापार के साथ सीमा मुद्दों को जोड़ना अतार्किक है। सीमा पर पैदा हुए नए तनावों का आकलन करते समय भारत को यह समझना चाहिए कि चीन का संयम कमजोर नहीं है। दोनों देशों को अपने बहुमूल्य विकास के अवसरों को संजोना चाहिए और अच्छे द्विपक्षीय संबंधों को बनाए रखना चाहिए। भारत के लिए चीन के विरोधी समूहों को जनता की राय को भड़काने की अनुमति देना बेहद खतरनाक होगा और इससे तनाव बढ़ सकता है। दोनों पक्षों और क्षेत्र के लिए प्राथमिकता अब आर्थिक सुधार में तेजी लाना है।

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