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नहीं माना नेपाल दी विवादित नक्शे को मंजूरी

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नई दिल्ली- नेपाल ने भारत की आपत्ति को दरकिनार करते हुए विवादित नक्शे को कानून का कवच पहना दिया है । गुरुवार सुबह नेपाली संसद के उच्च सदन से संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने हस्ताक्षर कर इसे संविधान का हिस्सा घोषित कर दिया। इसी के साथ ही हिमालयी राज्य के नक्शे में आज से परिवर्तन कानूनी रूप से लागू हो गया है। भारत शुरू से ही नेपाली के इस कृत्य को गैरकानूनी बताता रहा है । नेपाल की संसद के उच्‍च सदन नैशनल असेंबली ने देश के विवादित राजनीतिक नक्शे को मंजूरी देने के दौरान सत्‍ताधारी नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ने भारत पर जमीन को अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप लगाया। संसदीय दल के नेता दीनानाथ शर्मा ने कहा कि भारत ने लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा पर अवैध रूप से कब्‍जा क‍िया है और उसे नेपाली जमीन को लौटा देना चाहिए।

दोनो सदनों में संविधान संशोधन के विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा

नेपाल के नए नक्‍शे के समर्थन में नैशनल असेंबली में 57 वोट पड़े और विरोध में कोई वोट नहीं पड़ा । इस तरह से यह विधेयक सर्वसम्‍मति से नैशनल असेंबली से पारित हो गया। नैशनल असेंबली में वोटिंग के दौरान संसद में विपक्षी नेपाली कांग्रेस और जनता समाजवादी पार्टी- नेपाल ने संविधान की तीसरी अनुसूची में संशोधन से संबंधित सरकार के विधेयक का समर्थन किया। बता दें कि नेपाल की निचली सदन पहले ही इस बिल को पूर्ण बहुमत से मंजूरी दे चुकी है। वहां भी विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा था।

क्यों विवाद पैदा कर रहा है नेपाल

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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली देश में ही कई मामलों में घिरे हुए हैं । नेपाल की जनता का ध्यान वो फिलहाल हटाना चाहते हैं । दूसरी तरफ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के चीन के साथ वैचारिक भाईचारा है । इसलिए वो भारत के साथ विवाद से चीन से फायदा लेना चाहते हैं । हाल फिलहाल में नेपाल की पॉलिसीज में बड़ा बदलाव आया है । केपी शर्मा अपनी भारत विरोधी भावनाओं के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2015 में भारत के नाकेबंदी के बाद भी उन्‍होंने नेपाली संविधान में बदलाव नहीं किया और भारत के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के लिए केपी शर्मा चीन की गोद में चले गए। नेपाल सरकार चीन के साथ एक डील कर ली। इसके तहत चीन ने अपने पोर्ट को इस्तेमाल करने की इजाज़त नेपाल को दे दी।

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नए नक्शे भारतीय इलाके के बताया अपना

इस नए नक्‍शे में नेपाल ने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा के कुल 395 वर्ग किलोमीटर के भारतीय इलाके को अपना बताया है। भारत ने नेपाल के इस कदम पर आपत्ति जताते हुए नक़्शे को मंजूर करने से इनकार किया है और कहा है की यह सिर्फ राजनीतिक हथियार है जिसका कोई आधार नहीं है। वहीं अपने फर्जी नक्शे के पक्ष में सबूत जुटाने के लिए नेपाल ने एक नौ सदस्यों की कमेटी का गठन भी किया है ।

चीन कर रहा नेपाल में बड़ा निवेश

दरअसल, नेपाल एक जमीन से घिरा देश है और उसे लगा कि चीन की गोद में जाकर भारत की नाकेबंदी का तोड़ न‍िकाला जा सकता है। चीन ने थिंयान्जिन, शेंज़ेन, लिआनीयुगैंग और श्यांजियांग पोर्ट के इस्तेमाल की अनुमति दी है। आलम यह है कि अब नेपाल चीन के महत्‍वाकांक्षी बीआरआई प्रोग्राम में भी शाम‍िल हो गया। चीन नेपाल तक रेलवे लाइन बिछा रहा है। चीन बड़े पैमाने पर नेपाल में निवेश कर रहा है। ताजा विवाद के पीछे भी चीन पर आरोप लग रहा है। सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने संकेत दिए थे नेपाल के लिपुलेख मिद्दा उठाने के पीछे कोई विदेशी ताकत हो सकती है।

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