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Today Solar Eclipse 2020-सूर्यग्रहण शुरू, उत्तर भारत में वलयाकार दिखाई देगा सूर्य, पूरी जानकारी

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नई दिल्ली-सू्र्य ग्रहण लग गया है। सुबह 9.16 बजे से सूर्य ग्रहण लग गया है। हालांकि, भारत में ये सुबह 10 के बाद ही दिखाई देना शुरु हुआ है। ये साल का पहला और आखिरी सूर्य ग्रहण है। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में चंद्रमा, सूर्य को 98.6% तक ढक देगा, जिससे ये कंगन जैसी आकृति का दिखाई देगा। ज्योतिषशास्त्रों में इसे कंकणाकृति सूर्य ग्रहण कहा गया है। ये आकृति ज्यादातर स्थानों पर 11.50 से 12.10 के बीच दिखाई देगी।

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सबसे पहले मुंबई और पुणे में 10.01 बजे से दिखना शुरू हुआ। गुजरात के अहमदाबाद और सूरत में 10.03 बजे से दिखना शुरू हुआ। अन्य देशों में ये ग्रहण पूरी तरह 3.04 बजे खत्म होगा। ये देश में कई जगहों पर खंडग्रास (आंशिक) सूर्यग्रहण के रूप में दिखाई देगा। भारत के अलावा ये ग्रहण नेपाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूऐई, एथोपिया तथा कांगो में दिखाई देगा। इसके बाद अगला सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर 2022 को भारत में दिखेगा।

SOLAR eclipse
दुबई में सूर्यग्रहण

जाने किस शहर में कब से दिखेगा सूर्यग्रहण

दिल्ली सूर्यग्रहण समय सुबह 10 बजकर 20 मिनट से

मुंबई सूर्यग्रहण समय सुबह 10 बजकर 43 सेकंड से

चेन्नई सूर्यग्रहण समय सुबह 10 बजकर 22 मिनट से

लखनऊ सूर्यग्रहण समय सुबह 10 बजकर 26 मिनट से

कानपुर सूर्यग्रहण समय सुबह 10 बजकर 24 मिनट से

कुरुक्षेत्र सूर्यग्रहण समय सुबह 10 बजकर 21 मिनट से

कितने प्रकार का होता है सूर्यग्रहण

पूर्ण सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा पृथ्वी के बहुत करीब रहते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी को अपनी छाया में ले लेता है। इससे सूर्य की रोशनी पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाती है। इस खगोलीय घटना को पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

वलयाकार सूर्य ग्रहण: इस स्थिति में चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में तो आता है लेकिन दोनों के बीच काफी दूरी होती है। चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को नहीं ढंक पाता है और सूर्य की बाहरी परत ही चमकती है। जो कि वलय यानी रिंग के रूप में दिखाई देती है। इसे ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं।

खंडग्रास सूर्य ग्रहण: इस खगोलीय घटना में चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में इस तरह आता है कि सूर्य का थोड़ा सा ही हिस्सा अपनी छाया से ढंक पाता है। इस दौरान पृथ्वी से सूर्य का ज्यादातर हिस्सा दिखाई देता है। इसे खंडग्रास सूर्य ग्रहण कहते हैं।

ग्रहण देखते हुए क्या क्या सावधानी बरतें

चंद्रमा की तरह सूर्य ग्रहण खुली आंखों से नहीं देखना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इसका बुरा असर आपकी आंखों पर पड़ सकता है। सूर्य ग्रहण को सुरक्षित तकनीक या तो एल्युमिनेटेड मायलर, ब्लैक पॉलिमर, शेड नंबर 14 के वेल्डिंग ग्लास या टेलिस्कोप द्वारा सफेद बोर्ड पर सूर्य की इमेज को प्रोजेक्‍ट करके करके उचित फिल्टर का उपयोग करके देखा जा सकता है।

यूं तो चांद का ज्यादातर हिस्सा छिप जाएगा लेकिन फिर भी इसे नंगी आंखों से नहीं देखा जाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोलर व्यूइंग ग्लासेज (Solar viewing glasses) या टेलिस्कोप-दूरबीन जैसे स्पेशल फिल्टर्स का इस्तेमाल करना चाहिए। सूरज को सीधे देखने से आंखों का पर्दा खराब हो सकता है और हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जा सकती है।

बच्चों से लेकर बड़ों तक कोई भी इस ग्रहण को नंगी आंख से न देखें। नासा के अनुसार, सूर्य ग्रहण को देखने के लिए सोलर फिल्टर ग्लास वाले चश्में का इस्तेमाल करें।

  • यह भी सलाह है कि घर के बनाए जुगाड़ वाले चश्मे या किसी लेंस से सूर्य ग्रहण न देखें। इससे आपकी आंख पर बुरा असर हो सकता है।
  •  ग्रहण के वक्त आकाश की ओर देखने से पहले सोलर फिल्टर चश्मा लगाएं और नजर नीचे करने के बाद या ग्रहण समाप्त होने के बाद ही इसे हटाएं।
  •  एक अमेरिकी संस्था के अनुसार, ग्रहण के वक्त कार/अन्य वाहन न चलाएं।
  • लेकिन यदि कोई ग्रहण के वक्त रास्ते में ही है तो वह अपने वाहन की हेडलाइट जलाकर और अन्य वाहनों से कुछ दूरी बनाकर ही वाहन चलाए। ड्राइविंग में विशेष सावधानी बरतने की हिदायत है।
  •  बच्चों को यदि ग्रहण दिखाने का प्लान बना रहे हैं तो उनकी आखों को बचाने वाले सोलर फिल्टर चश्मे की व्यवस्था जरूर कर लें।

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