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चीन ने कभी नहीं सोचा था भारत छोटी सी जमीन के लिए उन्हें कठिन चुनौती दे देगा-चीनी विशेषज्ञ युन सुन

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नई दिल्ली- आज पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच विवाद चल रहा है। लेकिन ऐसा नहीं कि चीन भारत को समझ नहीं रहा है। चीन के चेहरे पर डोकलाम विवाद को लेकर भी हवाईयां उड़ने लगी थी। चीन ने जब डोकलाम में सड़क का निर्माण शुरू किया और भारत की प्रतिक्रिया को देखकर चीन हैरान रह गया उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि जमीन के छोटे से टुकड़े के लिए भारत ऐसी तगड़ी प्रतिक्रिया देगा । भारत की इस प्रतिक्रिया ने चीन को हैरान कर दिया था। ऐसा ही कुछ कहना है कि चीन की विशेषज्ञ युन सुन का …. उन्होंने इंडिया टूडे को दिए अपने इंटरव्यू में कहा कि 2017 में डोकलाम गतिरोध के दौरान, चीन बेहद आश्चर्यचकित था। क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि भारत 72-73 दिन तक भूटान के नजदीक एक छोटे से जमीन के टुकड़े के लिए लड़ाई लड़ेगा।

LAC के साथ पूर्वी लद्दाख में चल रही चीनी आक्रामकता के पीछे की प्रेरणा के बारे में पूछे जाने पर, युन सुन ने कहा कि चीनी अधिकारियों का मानना ​​है कि सीमा के पास भारत की गतिविधियों का जवाब देने की आवश्यकता थी।वे कहती हैं, “अगर आप इस बारे में किसी चीनी अधिकारी से पूछते हैं तो उनका जवाब होगा कि चीन तो सिर्फ़ उन चीजों की प्रतिक्रिया दे रहा था। जो lac पर भारत कर रहा था।” उन्होंने कहा कि यह सर्वविदित है कि जहाँ से lac पास होती है। उन सटीक स्थानों पर एक ऐतिहासिक विवाद है। इसलिए जब चीन को ज्ञात हुआ कि भारत वहाँ पर सड़के बना रहा है। नया इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। तो उनकी चिंता बढ़ गई कि उन्हें कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

वे कहती हैं, “चीन को ऐसे हालात देखकर लगा जैसे भारत उनकी पीठ पर छूरा घोंप रहा है। इसी के बाद वो ऐसी स्थिति में आए कि जहाँ उन्हें सिर्फ़ दो विकल्प दिखा। एक तो आक्रमकता के साथ प्रतिक्रिया देना और दूसरा चुप रहकर अपने क्षेत्र को हाथ से जाते देखना।”

युन के मुताबिक चीन की मनोस्थिति को समझना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है। क्योंकि चीन की वर्तमान हालत बयान करने के लिए अंग्रेजी मीडिया में बहुत सामग्री है। लेकिन दूसरी ओर चीन की रणनीति और प्रेरणा आदि को समझने के लिए जानकारी केवल चीनी भाषा में ही उपलब्ध है। वे समझाती हैं कि चीन के ऊपर इस समय कोरोना महामारी के कारण आतंरिक दबाव बहुत है और बाहर से भी उसपर हमले हो रहे हैं। युन का मानना है कि एशिया में भारत और चीन के बीच शक्ति प्रतिस्पर्धा संघर्ष को जन्म देती है और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करती है।

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युन के मुताबिक यूएस चीन के लिए बढ़ा खतरा

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युन के मुताबिक, भारत के लिए भले ही इस समय सबसे बड़ा खतरा चीन है। लेकिन कोरोना महामारी के बाद अब चीन के लिए सबसे बड़ा खतरा यूएस दिखाई दे रहा है। वे कहती हैं, चीन भारत से मैत्रीपूर्ण संबंध रखना चाहता है। खासतौर पर अमेरिका के संदर्भ में। लेकिन वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता को त्यागने को भी किसी कीमत पर मंजूर नहीं करेगा।

 आपको बता दे कि मंगलवार को एलएसी के निकट चुशूल में भारतीय जमीन पर हुई बैठक में भारत की तरफ से 14वीं कोर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और चीन की तरफ से तिब्बत सैन्य जिले के कमांडर मेजर जनरल लिऊ लिन शामिल हुए। जून महीने में इन सैन्य अधिकारियों के बीच यह तीसरे दौर की बैठक हुई है। इस बैठक में सेनाओं के पीछे हटने के तौर तरीकों पर चर्चा हुई है। इस बैठक में भी भारत ने साफ कर दिया है कि चीन की सेना को फिंगर 4 और फिंगर 8 से पीछे हटना ही होगा और अपमे सेना को मई वाली स्थिति में ले जाना ही होगा। लेकिन एक तरफ चीन बात कर  रहा है तो दूसरी तरफ चीन एलएसी पर अपनी सेना की तैनाती को बढ़ाता जा रहा है।

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