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पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत बद से बदतर ,,408 मंदिर को तोड़कर बना दिए दफ्तर या दुकान,, प्रत्येक वर्ष हजार से अधिक लड़कियां इस्लाम कबूलने को मजबूर।

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नई दिल्ली – मनुष्य की अंतरआत्मा भावनाओं से जुड़ी होती है और उस भावनाओं से विचार का जन्म होता है और वह विचार ही अपने तरिके से धर्म की कल्पना कर लेता है। अर्थात जितने मनुष्य उतने धर्म । लेकिन आपसे कहा जाए कि निर्धारित किए हुए धर्म को ही मान तो तत्कालिन टकराव की स्थिति पैदा होती है और ऐसा ही दुनिया भर में होता आया है।

अगर हम परोसी देश पाकिस्तान की बात करें तो धर्म के नाम पर अमानवीय कृत्य दुनिया भर में सबसे ज्यादा वहीं होता है। अपने निर्धारित किए हुए ढांचे में पाकिस्तान हर नागरिक को फीट देखना चाहता है। और जो उस ऑर्डर से ना चले तो नतीजतन उसे वह बूरे दौर से गुजरने पर मजबूर करता है।

“मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि मजहब किसी व्यक्ति का निजी मामला है और न ही इस बात से सहमत हूं कि एक इस्लामिक स्टेट में किसी व्यक्ति को समान अधिकार मिलें, चाहे उसका धर्म, जाति या यकीन कुछ भी हो।’
यह कथन पाकिस्तान के दूसरे प्रधानमंत्री ख्वाजा नजीमुद्दीन ने कही थी। एक इस्लामिक स्टेट की मांग को लेकर अड़ने वाले मोहम्मद अली जिन्ना के साथियों में से एक थे नजीमुद्दीन। उनको बस इसी बात से समझा जा सकता है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत उस समय क्या रही होगी और अब क्या होगी?

इस बात का जिक्र इसलिए क्योंकि हाल ही में इमरान सरकार ने राजधानी इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर बनाने की मंजूरी दी थी। ये इस्लामाबाद का पहला मंदिर होता। इसके लिए सरकार ने 10 करोड़ रुपए भी दिए थे।

लेकिन, 20 हजार वर्ग फुट में बनने जा रहे इस मंदिर की दीवार बन ही रही थी कि कट्टरपंथियों ने इसे तोड़ डाला। इतना ही नहीं, दीवार ढहाने से दो दिन पहले ही सरकार ने कट्टरपंथियों के दबाव में आकर मंदिर निर्माण पर रोक लगा दी थी।

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बाद में सरकार के इस फैसले के ख़िलाफ़ फतवे जारी किए, हिंदुओं को धमकियाँ दी और बात जब इतने से नहीं बनी, तो जिस जगह पर मंदिर बनना था, वहाँ जाकर खुलेआम अजान देने लगे हैं।

जी हाँ। सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो वायरल हो रही है। वीडियो में हम देख सकते हैं कि एक मुस्लिम युवक खुली जमीन पर खड़े होकर अजान दे रहा है। वहीं, उसके आस पास खड़े लोग उसकी वीडियो बना रहे हैं और उसे सुन रहे हैं। ये इस्लामिक कट्टरपंथी उसी जगह पर अजान दे रहे हैं जहां मंदिर निर्माण होना था।

लड़कियों का होता है जबरन धर्म परिवर्तन

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यूनाइटेड स्टेट्स कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम के डेटा की मानें तो पाकिस्तान में हर साल 1 हजार से ज्यादा लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराया जाता है। उनसे इस्लाम कबूलवाया जाता है। उनको किडनैप किया जाता है। बलात्कार किया जाता है और फिर जबरन उनकी शादी की जाती है। इनमें ज्यादातर हिंदू और क्रिश्चियन लड़कियां ही होती हैं।

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धर्म परिवर्तन
428 में से 408 मंदिरों को तोड़कर रेस्टोरेंट, होटल्स, दफ्तर, सरकारी स्कूल या मदरसे खुल गए।

ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट के एक सर्वे में सामने आया था कि 1947 में बंटवारे के समय पाकिस्तान में 428 मंदिर थे। लेकिन, 1990 के दशके के बाद इनमें से 408 मंदिरों में खिलौने की दुकानें, रेस्टोरेंट, होटल्स, दफ्तर, सरकारी स्कूल या मदरसे खुल गए।

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पाकिस्तान मेंं गिराए गए मंदिर के दृष्य

इस सर्वे के मुताबिक, अल्पसंख्यकों की पूजा वाले स्थलों की 1.35 लाख एकड़ जमीन पाकिस्तान सरकार ने इवैक्यूई प्रॉपर्टी ट्रस्ट बोर्ड को लीज पर दे दी। इस ट्रस्ट का काम ही है विस्थापितों की जमीन पर कब्जा करना। यानी ऐसे लोग जो पहले तो यहीं रहते थे लेकिन बाद में दूसरी जगह चले गए।

दैनिक भाष्कर की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में काली बाड़ी मंदिर था, उसे दारा इस्माइल खान ने खरीदकर ताज महल होटल में तब्दील कर दिया। खैबर पख्तूनख्वाह के बन्नू जिले में एक हिंदू मंदिर था, वहां अब मिठाई की दुकान है। कोहाट में शिव मंदिर था, जो अब सरकारी स्कूल बन चुका है।

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 गिराए गए मंदिर के दृष्य

रावलपिंडी में भी एक हिंदू मंदिर था, जिसे पहले तो ढहाया गया, बाद में वहां कम्युनिटी सेंटर बना दिया गया। चकवाल में भी 10 मंदिरों को तोड़कर कमर्शियल कॉम्प्लैक्स बना दिया गया।

सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि सिखों के भी धार्मिक स्थल को तोड़कर वहां दुकानें खोल दी गईं। जैसे- एब्टाबाद में सिखों के गुरुद्वारा को तोड़कर वहां कपड़े की दुकान खोल दी गई>

पाकिस्तान सरकार के एक ताजा सर्वे के मुताबिक, साल 2019 में सिंध में 11, पंजाब में 4, बलूचिस्तान में 3 और खैबर पख्तूनख्वाह में 2 मंदिर चालू स्थिति में हैं।

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