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पुत्रमोह में फंसी मां राहुल गांधी के लिए कितने युवा नेताओं के किनारे लगाएगी?

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नई दिल्ली- सचिन पायलेट जैसे युवा और तेजतर्रार नेता को कांग्रेस द्वारा किनारे लगाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसमें अगर इस बात का विश्लेषण किया जाए कि किसने क्या खोया तो निश्तित तौर पर नुकसान कांग्रेस को हुआ है। कांग्रेस ने असीम संभावनाओं वाला एक नेता खो दिया। जो मेहनती था, जनता प्रिय भी था। क्या कांग्रेस ने एक बूढ़े हो चले नेता के लिए यह दांव लगाया है?  अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो बड़े भोले हैं। आपकी राजनैतिक समझ पर भी प्रश्नचिन्ह लग सकते हैं। दरअसल यह पुत्रमोह में योग्य को किनारे करने की एक प्रक्रिया है। आप को महाभारत के वो सारे प्रसंग याद होने चाहिए कि कैसे धतृराष्ट्र पुत्रमोह में गलत निर्णय लेते रहे और अंत में अपने अयोग्य पुत्र को भी महाभारत के रण में खो दिया।

कांग्रेस में युवा और संभावनाओं वाले नेताओं को बेइज्जत करके निकालने का दौर चल रहा है और कांग्रेस के ये बूढ़े हो चले नेता अपने क्षणिक लालच के लिए अपने कंधे का इस्तेमाल होने दे रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान लगातार युवाओं पर गोली पर गोली दागे जा रहा है इन बूढ़े हो चले नेताओं के कंधे का इस्तेमाल करके । आपको सोचना चाहिए एक युवराज राहुल गांधी जो लगातार असफल होते जा रहे हैं लेकिन कोई भी कांग्रेस का नेता उसके सिर पर असफलता की टोकरी नहीं रख रहा है। जैसे ही कांग्रेस सफलता का स्वाद चखती है तो कांग्रेस के ये बूढ़े हो चले नेता सफलता का सेहरा राहुल गांधी के सिर पर सजा देते हैं ।

दरअसल ज्योतिरादित्य या फिर सचिन पायलेट जैसे नेता जिन्होंने मध्यप्रदेश और राजस्थान में दिन-रात मेहनत करके कांग्रेस को खड़ा किया आखिर कांग्रेस ने उन्हें क्यों नाराज हो जाने दिया सोचा है कभी आपने ? सोचिए ज्योतिरादित्य और सचिन पायलेट , राहुल गांधी के समकक्ष हैं अपनी बनाई जमीन पर खड़े हैं अगर इन दोनों में से किसी को भी मुख्यमंत्री बना दिया जाता और इनकी लोकप्रियता बढ़ जाती तो क्या कल को इन दोनों में से कोई राहुल गांधी के साम्राज्य के लिए खतरा नहीं हो सकते थे बिल्कुल खतरा हो सकता था। इसलिए इनके आगे बढ़ने के रास्ते कांग्रेस आलाकमान ने जानबूझ का बंद किए हैं। आगे जो भी राहुल गांधी के साम्राज्य के लिए खतरा पैदा करेगा , उनका भी यही हश्र होगा।

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एक पुत्रमोह में फंसी मां के लिए विकट स्थिति है पार्टी बचाए या फिर पुत्र के साम्राज्य को जो चुनौती दे सकें उनसे निपटे… पुत्रमोह में फंसी मां ने तय किया कि पुत्र के साम्राज्य के लिए उभरती चुनौतियों से निपटा जाए। कांग्रेस के नेता भी यह समझ रहे हैं कि पार्टी तो एक दिन कभी भी खड़ी हो जाएगी। इसलिए सरकारों की कुर्बानी देने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं । लेकिन एक बार किसी ने राहुल गांधी के नेतृत्व को चुनौती दे दी तो फिर शायद ही कभी कांग्रेस में गांधी परिवार कि दोबारा से वापसी संभव हो पाए।

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने बहुत कुछ खोया है। पूरा हस्तिनापुर जानता था कि युवराज दुर्योधन महाराज बनने लायक नहीं था। लेकिन बूढ़े सभापति कभी भी विरोध नहीं कर पाए और एक दिन दुर्योधन ने सब कुछ खो दिया। बिल्कुल यहीं स्थिति कांग्रेस की हो चली है सारे बूढ़े हो चले दिग्गज कांग्रेसी जानते हैं कि राहुल गांधी कांग्रेस की नैया पार नहीं लगा सकते हैं पूरा देश भी यह जानता है लेकिन पुत्रमोह में फंसी मां अपने पुत्र को स्थापित करने के लिए लगातार उन लोगों को किनारे करेगी जो भविष्य में राहुल गांधी  के लिए चुनौती हो सकते हैं।

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इतिश्री

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