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रतन लाल की हत्या पूर्व नियोजित/ कल सब आएं, पत्थर ,डंडे ,रॉड लाएं/सफूरा जरगर और उसके साथियों की मिटिंग का खुलासा

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नई दिल्ली -“कल सब आंए , और साथ में पत्थर डंडे रॉड लाए” यह बकायदा एक ऐलान था , हर किसी को सचेत किया गया , हर एक को तैयार रहने को कहा गया , पैट्रोल बंब भी साथ रखने को कहा गया। काफिरों को मजा चखाना है और न जाने क्या-क्या , यह बातें उस बैठक से निकल कर आई जिस बैठक में सफूरा जरगर और उसके गुर्गे भी शामिल था । बैठक की तमाम बातें दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में दर्ज है।

पुलिस के चार्जशीट के मुताबिक यह बैठक 23-02-2020 को आरोपित समेत दंगों के आयोजक, साज़िशकर्ता और दंगे भड़काने वालों ने चाँद बाग़ इलाके में एक बैठक रखी थी ।बैठक में उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील किया कि अगले दिन डंडा, लोहे की रॉड और पेट्रोल बम लेकर हथियारबंद रहें । अगले दिन यानी 24-02-2020 को दिन के लगभग 1 बजे तय योजना के मुताबिक़ दंगाई आक्रामक हुए और उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। इस्लामी भीड़ के इस सुनियोजित हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे और हेड कोंस्टेबल रतन लाल मार दिए गए थे।

चार्जशीट में मौजूद जानकारी के अनुसार क्षेत्र में दंगा भड़काने के लिए डीएस बिंद्रा, सफूरा ज़रगर और तमाम स्थानीय साथियों ने मिल कर गहरी साज़िश रची थी। 23 और 24 तारीख़ को दंगा भड़काने वालों और दंगे की साज़िश रचने वालों के बीच एक खुफ़िया बैठक हुई थी। इस बैठक में बनाई गई योजना के बाद दंगाई भीड़ ने शांत माहौल को भड़काया और उसकी वजह से ही पुलिसकर्मी रतन लाल की हत्या हुई।

चार्जशीट के मुताबिक भीम आर्मी के आह्वान पर चाँद बाग़ से राजघाट तक के लिए गैर क़ानूनी मार्च की शुरुआत हो चुकी थी, जिसकी योजना भी पहले ही तैयार कर ली गई थी। इस मार्च का लक्ष्य महज़ भीड़ को भड़काना था, जबकि इस मार्च के लिए इजाज़त नहीं दी गई थी।

रतन-लाल-चार्जशीट

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बिना इजाजत के इस मार्च में सफूरा ज़रगर, जेसीसी (जामिया कोओर्डिनेशन कमेटी) के सदस्य समेत तमाम स्थानीय षड्यंत्रकर्ता शामिल थे। इनके नाम अतहर, सुलेमान, शादाब, रवीश, सलीम खान और सलीम मुन्ना हैं। इसके अलावा भी दंगों में तमाम लोग शामिल थे। लेकिन मार्च को रोक कर उसके मूल स्थान चाँद बाग़ मज़ार तक ही सीमित कर दिया गया था।

पूरे चार्जशीट में सफूरा का नाम कई बार सामने आया है, उस पर सबसे पहला आरोप यह है कि वह 23 फरवरी को चाँद बाग़ से राजघाट के बीच हुई गैर क़ानूनी मार्च की आयोजकों में से एक थी। साथ ही 24 फरवरी के दिन हुई बैठक में तैयार किए गए षड्यंत्रों में भी सफूरा की भूमिका अहम थी।

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                                                                                      “दंगे के दौरान की एक छवि

आरोपित शादाब कवलप्रीत कौर (आइसा), देवांगना कलिता (पिंजरा तोड़), सफूरा, योगेन्द्र यादव सहित अन्य को अच्छे से जानता था। शादाब के बारे में चार्जशीट में लिखा है, 23 फरवरी की बैठक में इसकी योजना तैयार हुई थी कि 24 फरवरी के दिन क्या-क्या होगा। इस हरकत को अंजाम देने के लिए शादाब अपने साथियों के साथ उस दिन चाँद बाग़ में ही रुका। उसने विरोध-प्रदर्शन करने वालों को हिंसा के लिए प्रेरित किया। साथ ही ऐसी योजना तैयार कि उसके पास आन्दोलन को हिंसक बनाने के लिए हर हथियार मौजूद हो।

आरोपित शादाब कवलप्रीत कौर (आइसा), देवांगना कलिता (पिंजरा तोड़), सफूरा, योगेन्द्र यादव सहित अन्य को अच्छे से जानता था। शादाब के बारे में चार्जशीट में लिखा है, 23 फरवरी की बैठक में इसकी योजना तैयार हुई थी कि 24 फरवरी के दिन क्या-क्या होगा। इस हरकत को अंजाम देने के लिए शादाब अपने साथियों के साथ उस दिन चाँद बाग़ में ही रुका। उसने विरोध-प्रदर्शन करने वालों को हिंसा के लिए प्रेरित किया। साथ ही ऐसी योजना तैयार कि उसके पास आन्दोलन को हिंसक बनाने के लिए हर हथियार मौजूद हो।

पुलिस पर हमला करने के लिए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए सही मात्रा में हथियार और अन्य चीज़ें अचानक ही इकट्ठा नहीं की जा सकती हैं। 24 फरवरी 2020 के दिन चाँद बाग़ के आस-पास दंगे भड़काने की योजना पहले ही तैयार कर ली गई थी जिसके जिसके परिणाम स्वरुप भारी मात्रा में जान- माल की हानि हुई। जिस तरह से डीएस बिंद्रा (एआईएमआईएम), कवलप्रीत कौर (आइसा), देवांगना कलिता (पिंजरा तोड़) के एक-दूसरे से संपर्क मिले हैं, इससे तो यही निकल कर आता है कि इनका वास्तविक एजेंडा क्या था। जानकारी आने बाद यह भी पता चला था कि इस दौरान यह सभी लोग लगातार संपर्क में थे। इतना ही नहीं इन सभी ने अपने-अपने मोबाइल फोन में 23 से 24 फरवरी के बीच का लगभग हर डाटा साफ कर दिया था।

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                                                                                 कई लोगों ने दंगों में अपने परिजनों को खो दिया

ऑप इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सलमान सिद्दीकी नाम का युवक भी दंगा भड़काने वाले कुछ मुख्य लोगों में से एक था जिसकी वजह से रतन लाल की हत्या हुई थी। चार्जशीट में मौजूद कॉल रिकोर्ड्स के अनुसार सलमान इस दंगे की योजना तैयार करने वाले लोगों डीएस बिंद्रा, अतहर, रवीश, सलीम मुन्ना, सलीम खान, अयूब, इब्राहिम, सफूरा और अन्य से लगातार संपर्क में था। सफूरा का नाम चार्जशीट के कई अन्य हिस्सों में भी मौजूद है। जाँच के दौरान यह बात भी सामने आई कि दिसंबर के दौरान हुए दंगों में और फरवरी के दौरान चाँद बाग़ सहित दिल्ली के अन्य इलाकों में हुए दंगों में बराबर संबंध था। कहना गलत नहीं होगा कि जेसीसी ने शुरुआत में जिस तरह की योजना तैयार की वह उस पर ही चले और काफी हद तक कामयाब भी हुए।

जाँच में यह बात भी सामने आई कि जेसीसी की प्रतिनिधि, सफूरा शुरू से चाँद बाग़ मज़ार के पास मौजूद थी और दंगे भडकाने में उसका अहम किरदार था। इसके बाद सफूरा को स्पेशल सेल के जाँच अधिकारी ने एफआईआर 59/20 के तहत गिरफ्तार किया था। इन तथ्यों के आधार पर यह बात साफ़ है कि जो भीड़ रतन लाल की हत्या के लिए ज़िम्मेदार थी उसे भड़काने में सफूरा जैसे लोगों की भूमिका सबसे ज्यादा रही है। इसके अलावा 24 फरवरी के दिन चाँद बाग़ में हुए दंगों की योजना तैयार करने में सफूरा का नाम शुरूआती तौर पर ही आता है। फिलहाल जाँच भले जारी है, लेकिन इतने तथ्य घटना की तस्वीर काफी हद तक साफ़ कर देते हैं।

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