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सचिन पायलेट एक असीम संभावनाएं वाला युवा नेता , जानिए अब क्या रास्ते बचे हैं

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नई दिल्ली-  बेशक सचिन पायलेट की पहली बॉल पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छक्का मार दिया हो , लेकिन यह मैच अभी खत्म नहीं बल्कि शुरू हुआ है। सचिन पायलेट के साथ कांग्रेस द्वारा किया गया व्यवहार राजस्थान में कांग्रेस को गर्त में पंहुचा देगा। कांग्रेस में यही परिपाटी रही है जब कोई नेता चुनौती बनने लगता है तो उसकी सफाई कर दी जाती है। जिसकी वजह से उस राज्य से भी कांग्रेस की सफाई हो जाती है। सचिन पायलेट बेशक अभी कह रहे हैं कि वो अभी भी कांग्रेस में हैं। लेकिन किसी भी स्वाभिमानी नेता के लिए यह बड़ी विकट परिस्थिति होती है कि वो अपने स्वाभिमान  को किराने रख कर एक ऐसी पार्टी में बना रहे जहां उसको बेइज्जत किया गया हो।

कांग्रेस सचिन पायलेट पर लगातार दवाब बना रही है कि वो जल्दी से पार्टी से अलग होने का निर्णय लोगों को बताएं। इसलिए उन्हें नोटिस जारी करके दो दिन के अंदर जवाब देने की बाध्यता रख दी गई है। तो क्या सचिन पायलेट दो दिन के अंदर अपना निर्णय ले चुके होंगे । न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए गए अपने इंटरव्यू में उन्होंने साफ कर दिया है कि वो भाजपा में नहीं जाएंगे। तो क्या फिर अलग पार्टी बनाएंगे।

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सचिन की अलग पार्टी की संभावना

सचिन पायलेट के पास दो संभावित विकल्प हैं एक वो भाजपा में शामिल हो जाए जैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया। दूसरा अपनी अलग पार्टी बना लें और खुद की मेहनत से वो सब हासिल करें जो वो पाना चाहते हैं। सचिन पायलेट के लिए दूसरा विकल्प ज्यादा मजबूत नजर आ रहा है। जिस कांग्रेस को अशोक गहलोत 21 सीटों पर छोड़ कर गए थे सचिन पायलेट ने उसे अपनी मेहनत से 100 पर पंहुचाया था। आखिर क्या करिश्मा किया था सचिन पायलेट ने । गुर्जर समुदाय से तालुक्क रखने वाले सचिन पायलेट मीणा समुदाय में भी उतने लोकप्रिय है जितने गुर्जर समुदाय में । गुर्जर समुदाय और मीणा समुदाय की आपसी अदावत भी किसी से छिपी हुई नहीं है।लेकिन सचिन पायलेट ने अपने करिश्माई नेतृत्व से दोनों समुदाय में भाईचारा स्थापित किया है । गुर्जर और मीणा समुदाय दोनों का राजस्थान की 49 विधानसभा सीटों पर प्रभाव हैं दोनों की कुल वोट में 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। अगर सचिन पायलेट इन दोनों समुदाय के दम पर भी बहुत अच्छी बार्गेनिंग पावर में आ सकते हैं । ऐसा नहीं है कि सचिन पायलेट को संगठन खड़ा करने में दिक्कत होगी। उन्होंने बेजान कांग्रेस में अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में जान फूंक दी थी । वो युवा हैं ,लोकप्रिय हैं, किसान जाति से तालुक्क रखते हैं, जो पूरे देश में फिलहाल नेतृत्वविहीन नजर आ रहे हैं इसलिए अलग पार्टी के दम पर वो किसान राजनीति में पैदा हुए शून्य को भर सकते हैं।

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