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भारत-चीन तनावः अमेरिका का विमानवाहक पोत USS निमित्ज पंहुचा अंडमान निकोबार

चीन से तनाव के बीच USS निमित्ज 90 फायटर प्लेन और 30 हजार नौसैनिकों के साथ अंडमान निकोबार पंहुचा है। दक्षिण चीन सागर में गश्त कर रहे निमित्ज समेत दो और विमानवाहक पोत

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नई दिल्ली- चीन के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका ने साउथ चाइना सी से लेकर हिंद महासागर तक अपनी गश्त बढ़ा दी है। चीन के नजदीक साउथ चाइना सी में युद्धाभ्यास खत्म करने के बाद अमेरिकी नेवी के सातवें बेड़े में शामिल एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस निमित्ज अब अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के पास पहुंच गया है। अमेरिका और चीन के रिश्ते भी बिगड़ते जा रहे हैं। यूएस नेवी के विमानवाहक दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर अपनी गश्त बढ़ा दी है।  चीन के नजदीक साउथ चाइना सी में युद्धाभ्यास खत्म करने के बाद अमेरिकी नेवी के सातवें बेड़े में शामिल एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस निमित्ज अब अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के पास पहुंच गया है। इस क्षेत्र में  भारतीय नौसेना पहले से ही युद्धाभ्यास कर रही है।

एशिया में अमेरिका के तीन एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात है

हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका ने अपने तीन एयरक्राफ्ट कैरियर्स को इस इलाके में तैनात किया है। वर्तमान में इनमें से एक यूएसएस रोनाल्ड रीगन साउथ चाइना सी में जबकि यूएएसएस थियोडोर रुजवेल्ट फिलीपीन सागर के आस पास गश्त लगा रहा है। वहीं अमेरिका के आक्रामक गतिविधियों से बौखलाया चीन बार-बार युद्ध की धमकी दे रहा है।

कितना ताकतवर है यूएसएस निमित्ज

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अमेरिका के सुपरकैरियर्स में यूएसएस निमित्ज को बहुत ताकतवर माना जाता है। परमाणु शक्ति से चलने वाले इस एयरक्राफ्ट कैरियर को अमेरिकी नौसेना में 3 मई 1975 को कमीशन किया गया था। यह कैरियर स्टाइक ग्रुप 11 का अंग जो अकेले अपने दम पर कई देशों को बर्बाद करने की ताकत रखता है। 332 मीटर लंबे इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर 90 लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर्स के अलावा 3000 के आसपास नौसैनिक तैनात होते हैं। निमित्ज के साथ एक पूरा फ्लीट चलता है जिसमें डिस्ट्रॉयर ,टैंकर सब रहते हैं।

अंडमान में भारतीय नौसेना भी कर रही है ड्रिल

चीन का व्यापार का अधिकांश हिस्सा मलक्का स्ट्रेट के जरिए होता है और भारत की अंडमान कमांड वहां जब चाहे चीन इसको बंद कर सकती है तथा चीन में चीजों की किल्लत हो सकती है। इसलिए चीन से जारी तनाव के बीच भारत भी अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के पास युद्धाभ्यास कर रहा है। इसमें विध्वंसक युद्धपोट, पेट्रोल एयरक्राफ्ट और पनडुब्बी शामिल हैं। इनके अलावा सबमरीन ढूंढनेवाला एयरक्राफ्ट Poseidon-8I, जिसमें घातक हारपून ब्लॉक मिसाइल लगी हैं, MK-54 लाइटवेट टोरपीडोज आदि भी इस ड्रिल का हिस्सा हैं। इससे पहले मल्लका में ही भारत और जापान ने भी पिछले ही महीने ड्रिल की थी। लेकिन वह सीमित स्तर की थी।

हिंद महासागर में भारत ,जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया चीन को घेर सकते हैं

भारत के साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया हिंद महासागर में चीन को घेरने के लिए तैयार बैठे हैं। अगर अब ड्रैगन ने कोई भी हिमाकत की तो उसका अंजाम उसे भुगतना पड़ेगा। चीन के व्यापार का बड़ा हिस्सा हिंद महासागर के जरिए ही खाड़ी और अफ्रीकी देशों में जाता है। जबकि, चीन अपने ऊर्जा जरुरतों का बड़ा आयात इसी रास्ते करता है। अगर भारतीय नौसेना ने इस रूट को ब्लाक कर दिया तो चीन को तेल समेत कई चीजों के लिए किल्लत झेलनी होगी। अभी चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर भी पूरा नहीं हुआ है ऐसे में चीन इस रास्ते भी कोई आयात-निर्यात नहीं कर सकता।

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