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आईआरएस प्रीता हरित ने समाज के उत्थान के लिए छोड़ी बड़ी सरकारी नौकरी , लगातार जुटी हैं समाज सेवा के मिशन में

प्रीता हरित आईआरएस रही है,सर्विस के दौरान चर्चित ऑफिसर रही हैं। उन्होंने समाजसेवा के लिए अपने रिटायमेंट से छह साल पहले सेवानिवृत्ति ले थी एवं 2019 में कांग्रेस से आगरा लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। बाबा साहेव अम्बेडकर के विचारों से प्रभावित हैं और अपने बहुजन सम्यक संगठन से द्वारा उनके विचारों को जन-जन तक पंहुचाने का कार्य कर रही हैं। महिला सशक्तिकरण और दलित और किसानों की समस्याओं पर मुखर रूप से अपने विचार रखती रही हैं। दजन्तरमन्तर डॉट कॉम ने उनसे मिल कर उसने विचार जानने की कोशिश की है।

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नई दिल्ली-  प्रीता हरित चर्चित अधिकारी तो रही ही हैं। समाज सेवा के लिए उन्होंने इन्कम टैक्स विभाग से प्रिंसीपल सेक्रेटरी के पद से इस्तीफा दे दिया था , तब अभी तक लगातार समाज सेवा और सामाजिक उत्थान के लिए काम कर रही है। वो सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। उनके फेसबुक पेज पर लाखो फालोवर्स जुड़े हुए हैं और उनकी पोस्ट पर लाखो लाइक भी आते हैं।

आप आईआरएस अधिकारी रही हैं , दलित समाज के उत्थान के लिए लड़ाई भी लड़ रही है कैसी रही यहां की आपकी जर्नी ?

मैं 1987 बैच की आईआरएस ऑफिसर हुं, मेरा जन्म एक अम्बेडकरवादी परिवार में हुआ है। मेरे पिता जी समेत पूरा परिवार डॉक्टर बाबा साहेब अम्बेडकर के विचारों को मानता रहा है और  उन विचारों पर चलता रहा है। इसी वजह से हमारे परिवार में लड़कियों की शिक्षा पर बहुत ध्यान दिया जाता रहा है। मैंने दिल्ली युनिवर्सिटी से अपनी शिक्षा पूरी की है। मेरे पिताजी चाहते थे, कि मैं सिविल सर्विस में जांउ। इसलिए मेरा पढ़ाई के दौरान ही संकल्प बन गया था कि मुझे आईएएस बनना है। मेरा पहले ही प्रयास में सिविल सर्विस में सेलेक्शन हो गया। मैने आईएफएस और आईपीएस पर तरजीह देते हुए आईआरएस ज्वॉइन किया। इसके बाद सर्विस में रहते हुए मैंने दो बार और परीक्षा दी, जिसमें मेरा दोनों बार सेलेक्शन आईपीएस के लिए हुआ।

मेरे जीवन में संघर्ष भी बहुत रहा है, क्योंकि  मैं एक ऐसी जाति में जन्मी हुं जिसको समाज में सम्मान नहीं मिलता था उस समय पर, एक महिला होने के नाते, एक दलित समाज की बेटी होने के नाते मैंने हर तरह का संघर्ष देखा है।

आपने अचानक से अपनी जॉब को रिजाइन करके पॉलिटिक्स में आने का निर्णय लिया , उसके क्या कारण रहे ?

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जब मैंने आईआरएस ज्वॉइन कर लिया तो अपना परिवार बसाया, अपने परिवारिक धर्म के अनुसार अच्छी बेटी, अच्छी पत्नी और अच्छी मां बनकर रही, लेकिन मन में हमेशा एक दर्द रहता था कि अभी तक समाज की अच्छी बेटी नहीं बन सकी हूं, समाज के लोग आज भी पीड़ित है , वंचित हैं, उनके ऊपर आज भी जातिगत प्रहार होते हैं, उनका अपमान होता है। मैंने उनके लिए कुछ नहीं किया है। जब 2012 में दिल्ली में मेरी दोबारा पोस्टिंग हुई तो मैं समाज उत्थान के लिए काम करना शुरू कर दिया। महिलाओं के शोषण के खिलाफ आवाज उठाने लगी। समाज के लिए काम करते करते लोगों ने कहा कि मुझे एक सामाजिक संगठन बनाकर काम करना चाहिए इसके बाद हमने बहुजन सम्यक संगठन की स्थापना की और आज हमारे संगठन से पूरे देश में बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं। जब कोई व्यक्ति सामाजिक क्षेत्र में अच्छा करता है तो लोगों की उम्मीद बढ़ जाती है कि वो राजनैतिक क्षेत्र में आकार उनको सफन नेतृत्व प्रदान करें।

इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में आपका अनुभव कैसा रहा ?

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भारत जैसे लोकतांत्रिक देश आम चुनाव सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसमें जनता सबसे बड़ी राजा होती है। आप खुद को कितना भी बड़ा लीडर मान लें , लेकिन जब तक जनता आपको स्वीकार नहीं करती हैं सही मायने आप नेता नहीं हैं। जब हम जनप्रतिनिधि के रूप में विधायिका या संसद में बैठते तब हम सही तरीके के लोकतंत्र के मायनों को पूरा करते हैं। 2019 में मैंने भी आगरा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा है यह अपने आप में अनुठा अनुभव था। यह पहला मौका था, आगे और भी मौके आएंगे। ये मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि देश की जनता मुझे जरूर चुनेगी और मैं समाज के हित की आवाज विधायिका में जरूर उठाउंगी ।

 जो देश में राजनैतिक माहौल चल रहा है उसे आप कैसे देखती हैं ?

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, देश का हरेक व्यक्ति राजनैतिक रूप से सतर्क है। लेकिन दुर्भाग्यवश राजनीति में इस वक्त शिखर पर वो लोग बैठे हैं जो वंचित और शोषित लोगों का भला नहीं कर रहे हैं। आज भारत में राजनैतिक माहौल जाति और धर्म के आस-पास घूम रहा है। देश में इस वक्त धर्म और जाति के नाम पर बंटा हुआ है । हमें भारत के प्रति समर्पण भाव से पहले जाति के प्रति समर्पण सिखाया जा रहा है। महिलाओं और दलित और किसानों का शोषण लगातार जारी है। कांसगज में रेप पीड़िता को ट्रैक्टर से कुचल कर मार दिया जाता है। आतंक और गुंडागर्दी का माहौल चल रहा है। बिकरूपुर जघन्य कांड में 8 पुलिस वाले शहीद हो जाते हैं। फिर पुलिस विकास दुबे के राजनैतिक आकाओं को बचाने के लिए उसका फर्जी एनकाउंटर कर देती है। अगर वो जिंदा रहता तो कई लोगों की पोल खुल सकती थी लेकिन उसका एनकाउंटर करके उस रास्ते को ही बंद कर दिया गया। मेरा कहना है कि राजनीति इस समय अधोमुखी है निम्न स्तर तक गिरती जा रही है। देश में आदर्श किस्म की राजनीति की जरूरत है साथ आदर्श माहौल बनाने की जरूरत है।

आपके फ्यूचर प्लान क्या हैं ?

मैं समय पूर्व सेवानिवृत्ति लेकर सामाजिक क्षेत्र और राजनैतिक क्षेत्र में आ चुकी हूं। समाज के लिए मेरे मन में एक पीड़ा है। राजनीति के क्षेत्र में दिन ब दिन नई बातें सीख रही हूं। मेरे मन में अपने समाज की सेवा का जो संकल्प है उसे में जरूर पूरा करूंगी राजनीति के माध्यम से, ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है। समाज सेवा करने के लिए हमारे पर संवैधानिक आधिकार होना जरूरी है और राजनीति के माध्यम से हमें वो संवैधानिक अधिकार हासिल होते हैं जिससे हम अपने समाज की सेवा कर सकें।

अगर आगामी समय में आपको जनप्रतिनिधि चुन लिया जाता है तो आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी?

मैं आपके सवाल को संशोधित करना चाहूंगी। मैं आज भी एक जनप्रतिनिधि हूं और किसी भी चुने हुए जनप्रतिनिधि से ज्यादा समाज के लिए काम कर रही हूं। मैं लोगों से लगातार मिलती रहती हूं और अपने स्तर पर उनकी समस्याएं सुलझाने के लिए प्रयासरत रहती हूं एवं मुझे पूरा भरोसा है कि जनता मुझे जन प्रतिनिधि अवश्य चुनेगी। मैं पूरी तन्मयता से आज भी समाज उत्थान के लिए काम कर रही हूं और आगे भी करती रहूंगी।

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