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चीन की चाल को अभी भी नहीं समझ रही है भारतीय डिप्लोमेसी

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नई दिल्ली- पूर्वी लद्दाख सीमा पर चीन एक बार फिर चालबाजी पर उतर आया है। पिछले दस दिनों के भीतर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के अधिकांश विवादग्रस्त इलाकों से चीनी सैनिकों की वापसी नहीं हुई है। कुछ जगहों से हुई है तो वह भी बेहद कम। बीते 15 जून, 2020 को दोनो सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद एक अलग वार्ता एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई थी। लेकिन चीन के मौजूदा रुख से दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों (भारतीय एनएसए और चीन के विदेश मंत्री) के बीच तनाव खत्म करने के लिए सैनिकों की वापसी को लेकर जो सहमति बनी थी उसके अमल पर भी सवालिया निशाना लग गया है।

दरअसल चीन की मंशा भारत के साथ उलझने की लग रही है। चीन भारत के साथ सीमा संघर्ष में उलझना चाहता है। ताकि विश्व को अपनी ताकत का अहसास करवा सके। वहीं अमेरिका भी मान चुका है कि उसके फॉरेन पॉलिसी एक्सपर्ट चीन को समझने में गलती कर चुके हैं। इसलिए चीन की मंशा को समझते हुए अमेरिका ने भी चीन के खिलाफ फ्रंट खोल दिया है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खुलकर चीन के खिलाफ आक्रामक बयान दे रहे हैं। दोनों देश कोल्डवॉर की तरफ बढ़ रहे हैं। टेक्सास के ह्यूस्टन स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास को बंद करने के आदेश के बाद चीन ने चेंग्दू स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को बंद करने के आदेश दे दिए हैं। जिससे दोनों देशों के संबंध और भी तनावपूर्ण हो गए हैं।

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चीन वैश्विक महाशक्ति बनने की मंशा पाले बैठा है और उसकी इस मंशा के आड़े में भारत स्वाभाविक रूप से आ जाता है। अगर चीन वैश्विक महाशक्ति बनना चाहता है तो पहले उसे एशिया का सिरमौर बनना होगा और एशिया के सिरमौर बनने की राह में भारत एक मजबूत प्रतिरोध बनके खड़ा है। इसलिए चीन भारत के साथ उलझना चाहता है। वो भारत के साथ सीमा विवाद को खत्म करना नहीं चाहता। ताकि भारत की राह में रोड़ा अटका सके। वो भारत के साथ एलएसी के विवाद को वार्गेनिंग पवार की तरह से प्रयोग करना चाहता है ।

क्या हैं भारत के पास जवाब

फिलहाल भारत सरकार को चाइना पॉलिसीज तो रिव्यू करने का टाइम है। क्या कारण रहे कि भारत की चाइना पॉलिसी सफल साबित नहीं हो पाई है। भारत को चाइना पॉलिसी में सम्पूर्ण बदलाव की जरुरत है। भारत को एक आधुनिक और मजबूत सेना की जरूरत है। ताकि चीन के साथ सम्बंधों में आर्मी की ताकत को वार्गेनिंग पावर की तरह से यूज किया जा सके। भारत को वन चाइना पॉलिसी को भी रिव्यू करने की जरूरत है । भारत को तिब्बत के मुद्दे को भी उठाने की जरूरत है। भारत को अक्साई चीन अपना मजबूत दावा दिखाने की जरूरत है।

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