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कोरोना वैक्सीन अपडेट : रूस और चीन ने बिना WHO के ही अप्रूव कर दी अपनी वैक्सीन , जानिए भारतीय वैक्सीन को समय क्यों लग रहा है?

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नई दिल्ली – चीन और रूस दोनों को ही अपने अपने व्यवस्थाओं पर इतना भरोसा है कि WHO की परवाह किए बगैर उसने कोविड वैक्सीन को लगने के लिए अनुमति दे दी है। चीन ने कैनसिनो बायोलॉजिक्स के वैक्सीन को लिमिटेड इस्तेमाल के लिए अप्रूव किया है और और यह उपलब्धता केवल चीनी मिलिट्री के लिए है। वहीं, रूस ने एक कदम आगे बढ़ते हुए गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैक्सीन को सबके लिए अप्रूव कर दिया। दोनों वैक्सीन अभी फेज-3 की टेस्टिंग के दौर से गुजर रहे हैं। अब तक पूरी तरह इफेक्टिव और सेफ भी साबित नहीं हुए हैं।

कोविड वैक्सीन

रूस ने इतनी जल्दी कैसे तैयार किया वैक्सीन?

दैनिक भाष्कर की खबर के मुताबिक गामालेया इंस्टिट्यूट ने जून में यह वैक्सीन तैयार कर ली थी। फेज-1 ट्रायल भी शुरू कर दिए थे। रूसी वैक्सीन में ह्यूमन एडेनोवायरस Ad5 और Ad26 का इस्तेमाल किया है। दोनों को कोरोनावायरस जीन से इंजीनियर किया है।

कोरोनावायरस का प्रकोप बढ़ने लगा था तब व्लादिमीर पुतिन प्रशासन ने ड्रग रेगुलेटर से कहकर ट्रायल्स की अवधि घटाई थी। ब्रिटेन और अमेरिका में भी ड्रग रेगुलेटर ने ट्रायल्स के कड़े नियमों में नरमी बरती है।

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रूसी वैज्ञानिकों ने मर्स और सार्स का वैक्सीन बनाया था। उसमें ही आंशिक फेरबदल किया गया है। वैक्सीन को जल्दी बनाने में लाभ हुआ। दुनियाभर में बन रहे वैक्सीन एक वेक्टर पर निर्भर है जबकि यह दो वेक्टर से बना है।

रूस की इस जल्दबाजी के पीछे क्रेमलिन भी है। वह चाहता था कि दुनियाभर में रूस की छवि ग्लोबल पॉवर की बने। सरकारी टीवी स्टेशनों और मीडिया ने भी अन्य देशों को वैज्ञानिकों की तारीफ की और विरोध को बेवजह बताया।

रुस की वैक्सीन को लेकर WHO की प्रतिक्रिया

आपको बता दें कि विश्व स्वास्थ संगठन एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि जिन लोगों में एंटी बॉडीज बन रहे हैं, उनके लिए ये वैक्सीन खतरनाक हो सकती है। रूस के संक्रामक रोग एक्सपर्ट एलेक्जेंडर शेपरनोव ने वैक्सीन के ट्रायल के डेटा और डिटेल्स न देने के लिए सवाल खड़ा किए है।

कोविड वैक्सीन

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वहीं , WHO को रूसी वैक्सीन के तीसरे चरण की ट्रायल पर भी शक है। WHO के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमियर ने कहा कि अगर तीसरे स्टेज का ट्रायल किए बगैर ही वैक्सीन का लाइसेंस जारी कर दिया जाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

अब सवाल ये उठता है कि…

ऐसी प्रक्रियाओं से भारत भी वैक्सीन जल्दी ला सकता है

आईसीएमआर के साथ मिलकर देश निर्मित वैक्सीन कोवैक्सीन बना रहे भारत बायोटेक इंटरनेशनल के चेयरमैन कृष्णा ऐल्ला ने कहा कि कंपनी टेस्ट को लेकर किसी भी तरिके की जल्दबाजी में नहीं है।

ऐल्ला का कहना है कि उन पर वैक्सीन जल्दी बनाकर देने के लिए बहुत दबाव है। लेकिन सेफ्टी और क्वालिटी सबसे ऊपर है। कंपनी गलत वैक्सीन जारी कर लोगों की मौत की वजह नहीं बनना चाहती।

कंपनी बेस्ट क्वालिटी की वैक्सीन बनाना चाहती है। उसे पूरा भरोसा है कि कोवैक्सीन एक इनएक्टिवेटेड वैक्सीन है और ऐसे वैक्सीन का रिकॉर्ड अच्छा है और यह SARS-CoV-2 (कोरोनावायरस) के खिलाफ इफेक्टिव होगा।

ऐल्ला का कहना है कि हम पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और कम्युनिटी की नजर है। हम रिसर्च में कोई कमियां नहीं छोड़ना चाहते और हम बेस्ट क्वालिटी की वैक्सीन बनाने पर फोकस है।

ऐल्ला ने कहा- भारतीय इंडस्ट्री यूरोप या अमेरिकी कंपनियों से कम नहीं है। टेक्नोलॉजी और क्लिनिकल रिसर्च के मामले में तो चीन से बहुत आगे है। भारत बायोटेक ने कुछ साल पहले 1 डॉलर में रोटावायरस वैक्सीन निकाला था जबकि जीएसके ने कीमत रखी थी 85 डॉलर।

वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ने भी ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन कैंडीडेट के बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी शुरू कर दी है। इसका बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन सितंबर से शुरू होने की उम्मीद है।

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