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पश्चिम बंगाल में शांति निकेतन की विश्वभारती यूनिवर्सिटी हंगामा

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नई दिल्ली – पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित शांति निकेतन की विश्वभारती यूनिवर्सिटी में जमकर हंगामा मच रहा है। एक मेला मैदान के नजदीक हो रहे दीवार निर्माण का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई ऐतिहासिक दीवारें तोड़ दी जबकि निर्माण स्थल पर ईंट और सीमेंट को उठाकर फेंक दिया गया।

असल में विश्वभारती यूनिवर्सिटी के व्यवस्थापक ने बीते सप्ताह एक दीवार निर्माण का कार्य शुरू कराया था। जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। इस दीवार का निर्माण एक मेला ग्राउंड के नजदीक कराया जा रहा है, जिससे लोगों में खासा नाराजगी है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों ने यूनिवर्सिटी कैम्पस में जमकर प्रदर्शन किया। यहां तक कि प्रदर्शनकारियों ने कई ऐतिहासिक दीवारों को भी तोड़ दिया।

    विश्वभारती-यूनवर्सिटी

आपको बता दें कि इस प्रदर्शन के लिए अचानक यूनिवर्सिटी परिसर में 3000 से अधिक स्थानीय लोग इकट्ठे हो गए, जिन्होंने कई ऐतिहासिक ढांचों को तोड़ दिया। दीवार के निर्माण कार्य के लिए रखे ईंट और सीमेंट को उठाकर फेंक दिया। इस दीवार का निर्माण यूनिवर्सिटी परिसर में बाहर से आने वाले लोगों को रोकने के लिए किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने जताई चिंता

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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने कहा कि विश्व भारती में कानून व्यवस्था की हालत चिंताजनक है। उन्होंने ट्वीट किया कि मामले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन कानून-व्यवस्था को बहाल करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।

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युनिवर्सिटी का पंहुचाया नुकसान

इसके अलावा हंगामा कर रहे लोगों ने पास में खड़ी जेसीबी मशीन को भी क्षतिग्रस्त किया। बता दें कि अब तक जितनी दीवार बनकर तैयार हुई थी, उसे स्थानीय लोगों ने तोड़ दिया है। साथ ही उस इलाके में जितने ढांचे थे, सबको प्रदर्शनकारियों ने तोड़ फोड़ दिया है।

शांति निकेतन में करीब 100 बीघा जमीन कई ओर खुली हुई थी, जहां किसी प्रकार की पाबंदी नहीं थी। इस फील्ड पर पौष मेला लगता था। जिस फील्ड पर पौष मेला लगता है उसके आसपास परिसर के निर्माण के लिए 61 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। यहां हर साल पौष मेला लगता है। स्थानीय लोग मैदान का उपयोग सुबह की सैर के लिए करते हैं। यहां तक कि रोक के बावजूद हर रोज शाम 5 बजे के बाद लोग चहलकदमी करते रहते हैं। जिस दिन दीवार निर्माण का कार्य शुरू किया गया उस दिन यूनिवर्सिटी के कुलपति बिद्युत चक्रवर्ती भी मौजूद थे।

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