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मां की कमाई खा रहे मुन्नवर राणा ने पूर्व सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई की तुलना रं’डी से की

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नई दिल्ली-  मां के नाम पर शायरी कर कमाई खा रहे मुन्नवर राना ने राम मंदिर पर दिए गए निर्णय को लेकर पूर्व सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई पर बहुत ही आपत्तिजनक टिप्पणी की है। मुन्नवर राना ने कहा है कि “भारत के पूर्व CJI रंजन गोगोई जितने कम दाम में बिके, उतने में हिंदुस्तान की एक रं’डी भी नहीं बिकती है।“ उन्होंने यह टिप्पणी सितम्बर 2019 में राम मंदिर निर्माण पर दिए गए फैसले के संदर्भ में की है।

साथ ही उन्होंने रंगन गोगोई को राज्यसभा सदस्य बनाए जाने पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि राम मंदिर पर उनका फैसला अच्छा था या बुरा, उन्हें राज्यसभा की सदस्यता नहीं दी जानी चाहिए थी। इसके बाद उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि राम मंदिर मामले में न्याय नहीं हुआ बल्कि धोखाधड़ी हुई। उन्होंने कहा कि वो ये सब कुछ आरोप नहीं लगा रहे हैं बल्कि फैक्ट कह रहे हैं, ये सच्चाई है।

न्यूज नेशन से बातचीत में उन्होंने इस्लाम की अच्छाईयां भी गिनवाई हैं। और कहा कि अगर आप किसी मौलवी से ताबीज लिखवाते हैं तो वो रुपए नहीं लेता है, एक कप चाय तक नहीं पीता है। इसकी तुलना उन्होंने रंजन गोगोई द्वारा राज्यसभा की सदस्यता लेने से करते हुए पूछा कि इसका क्या मतलब हुआ साहब? साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में 2 लोगों ने मिल कर फैसला कर दिया, सब गलत हुआ और सब कुछ अपनी मर्जी से कर दिया गया।

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राम मंदिर पर एतिहासिक फैसला पांच जजों की पीठ ने दिया था। जिसमें एक मुस्लिम जज एस अब्दुल नजीर भी शामिल थे। मुन्नवर राना ने इसे भारत का आंतरिक फैसला भी  मानने से इंकार कर दिया । उन्होंने कहा कि  “दो आदमियों ने मिलकर ये फैसला कर दिया हर तरफ से गलत गलत गलत, और मालूम हुआ आपने अपनी मर्जी से कर दिया, पूरी दुनिया ये जानती है , ना बोले कि आप कहिए कि मेरा आंतरिक मामला है। दूसरे मुल्क कह दें कि आंतरिक मामला है। लेकिन नफरतें जो दिलों में होती हैं। हिंदुस्तान के लिए जो सम्मान था। कि हिंदुस्तान दुनिया में एक ऐसा मुल्क है। जहां हर सदी में हर शताब्दी में कोई महात्मा पैदा हुआ है , कोई संत पैदा हुआ है, कोई साधु पैदा हुआ है , कोई फकीर पैदा हुआ है कोई सूफी पैदा हुआ है। उस हिंदुस्तान के बारे में ये आ गया कि साब एक राज्यसभा की सीट जो एक करोड़ और दो करोड़ और पचास लाख में बिकती थी उसके लिए एक जस्टिस ऑफ इंडिया जो बादशाहत होती तो अकबर और बहादुर शाह जफर को हरफ दिलवाता “

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मुनव्वर राना ने इस पूरी बहस में रामायण को भी घुसाते हुए कहा कि जहाँ भगवान राम ने वचन के पालन के लिए अपनी गद्दी तक छोड़ दी थी, वहीं रंजन गोगोई ने अपने पद की भी प्रतिष्ठा नहीं रखी। मुनव्वर राना ने अपने बयानों पर माफी माँगने से इंकार करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ गलत कहा ही नहीं है। उन्होंने कहा कि माफी माँगने का अर्थ है कि हम भी बिक गए और थक-हार कर बैठ गए।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने मुनव्वर राना के इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि ताउम्र ‘माँ’ के नाम पर संवेदनाओं की भरपूर कमाई खाने वाले एक शायर की खाल में छुपा रंगा सियार देखिए, एक नारी और देश की सर्वोच्च अदालत के लिए इनकी ज़ुबान देखिए, फिर ग़द्दार कहो तो कुंठित आत्माएँ तड़प उठेंगी। बता दें कि मुनव्वर राना ‘माँ’ पर अक्सर शायरी करते रहे हैं।

इतना ही नहीं कुछ दिन पहले मुन्नवर राना पर ये आरोप भी लग चुका है कि ‘मां’ वाली शायरी उन्होंने दूसरे शायर आलोक श्रीवास्तव  की एक नज्म की कॉपी है। इसको लेकर ट्वीटर पर कई दिन तक लगातार विवाद चला था।

इससे पहले मुनव्वर राना ने मांग की थी कि अयोध्या के धन्नीपुर गाँव में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद के लिए जो 5 एकड़ ज़मीन मिली है, वहाँ भगवान राम के पिता राजा दशरथ के नाम पर अस्पताल बनवाया जाए। उन्होंने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था । उन्होंने कहा था कि सरकार द्वारा दी गई या जबरदस्ती हासिल की गई जमीन पर मस्जिद नहीं बनता। साथ ही मस्जिद के लिए रायबरेली में अपनी 5 एकड़ की जमीन ऑफर की।

 

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