Thejantarmantar
Latest Hindi news , discuss, debate ,dissent

- Advertisement -

क्या पी चिदम्बरम अनुच्छेद 370 की फिर से बहाली चाहते हैं जम्मू कश्मीर में

0 79,435

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

- Advertisement -

नई दिल्ली- जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म हुए एक साल से ज्यादा हो गया। जिस आतंकवाद की कमर दशकों में नहीं टूटी थी । अनुच्छेद 370 के खत्म होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद की कमर तोड़ कर रख दी है। स्थिति यह पैदा हो गई है कि आतंकी संगठन जम्मू कश्मीर में नए कमांडर नहीं खोज पा रहे हैं। लगभग रोज आतंकियों का सफाया हो रहा है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से हमारी सुरक्षा एजेंसिया लगातार कामयाब हो रही है। 370 के खत्म होने से राज्य की स्थिति में सुधार आया है । पाकिस्तान रोना आज भी रो रहा है। नुकसान हुआ है तो राज्य की पॉलिटकल पार्टियों को जो अलग किस्म की तानाशाही चला रही थीं। उनकी स्थिति धोबी के कुत्ते जैसी हो गई है। राज्य में धीरे धीरे राजनैतिक गतिविधियां शुरू हुई हैं।

 ऐसे में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का मामला फिर से उठाने की साजिश रची जा रही हैं। यहां की सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए साथ आने का ऐलान किया है। जम्मू-कश्मीर के सियासी दलों ने शनिवार को इसका घोषणा पत्र जारी किया। अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए दलों ने जो घोषणा पत्र बनाया है उसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, जेकेपीसीसी के जीए मीर, माकपा के एमवाई तारीगामी, जेकेपीसी के सज्जाद गनी लोन, जेकेएएनसी के मुजफ्फर शाह के नाम शामिल हैं।

दलों की ओर से जारी संयुक्त बयान में अनुच्छेद 370 और राज्य की पूर्व स्थिति बहाल करने मांग की गई है। दलों की इस घोषणा का कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने स्वागत किया है. उन्होंने उन 6 दलों को सलाम किया है जो केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुट हुए हैं।

चिदंबरम ने रविवार को एक बाद एक तीन  ट्वीट में लिखा, अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए एकजुट हुईं मुख्यधारा की पार्टियों की एकता और जज्बे को सलाम। मेरी उनसे अपील है कि वे अपनी मांग के लिए डटकर खड़े हों। स्वयंभू राष्ट्रवादियों की आलोचनाओं को नजरंदाज करें जो इतिहास पढ़ते नहीं हैं बल्कि इतिहास को दोबारा लिखने की कोशिश करते हैं। देश के संविधान में राज्यों के विशेष प्रावधानों के कई उदाहरण हैं। सरकार अगर विशेष प्रावधानों का विरोध करेगी तो नगा मुद्दे को कैसे निपटाया जा सकता है?

- Advertisement -

जम्मू कश्मीर के दलों ने सयुक्त बयान जारी किया था

- Advertisement -

इससे पहले शनिवार को कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों ने  सर्वसम्मति से संकल्प लिया कि वे जम्मू-कश्मीर में पांच अगस्त 2019 से पहले की तरह विशेष दर्जे की बहाली के लिए संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उठाया गया कदम ”द्वेष से पूर्ण अदूरदर्शी” और ”पूरी तरह असंवैधानक” था। विभिन्न दलों ने कहा कि वे ‘गुपकर घोषणा’ से बंधे हुए हैं, जो चार अगस्त 2019 को नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के गुपकर आवास पर सर्वदलीय बैठक के बाद घोषित की गई थी।

चार अगस्त 2019 की बैठक के बाद प्रस्ताव में कहा गया था कि दल सर्वसम्मति से घोषणा करते हैं कि जम्मू-कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और विशेष दर्जे की रक्षा के लिए वे एकजुट रहेंगे। इसके एक दिन बाद पांच अगस्त को केंद्र ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने और इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने की घोषणा की थी।

‘गुपकर घोषणा’ में कहा गया था, ”अनुच्छेद 35ए और अनुच्छेद 370 में संशोधन या इन्हें खत्म करना, असंवैधानिक सीमांकन या राज्य का बंटवारा जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के लोगों के खिलाफ आक्रामकता होगा।”

इससे क्या समझे आप

तो क्या इसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की राय माना जाना चाहिए जो चाहते हैं कि जम्मू कश्मीर में दोबारा से अनुच्छेद 370 बहाल हो जाए। और फिर आतंकवाद की कमजोर हो चुकी नींव को मजबूत किया जा सके। हमारी सुरक्षा एजेंसियों को दोबारा स्थानीय पॉलिटकल पार्टी के हाथ का खिलौना बना दिया जाए। दोबारा से अलगाववादियों को साथ कांग्रेस के नेता झप्पी पा सकें। तो क्या कांग्रेस दोबारा से अगर कभी सत्ता में आती है तो वो फिर से जम्मू और कश्मीर को उसी आग में झोंक देगी। जिसमें वो 370 होने के कारण जलता रहा था । क्या फिर से भेदभाव होगा उन सफाई कर्मचारियों के साथ जो दशकों के समानता की बाट जोह रहे थे।

चिदम्बरम कोई छोटे मोटे नेता नहीं है इस देश के गृहमंत्री और वित्तमंत्री रह चुके हैं। कांग्रेस के थिंकटैंक हैं। दरअसल कांग्रेस को इस मामले पर साफ करना चाहिए कि उसका धारा 370 को लेकर क्या स्टैंड हैं। क्या वो पोटा जैसा हाल तो नहीं करेगी।

इस आर्टिकल के लेखक राहुल तालान है और लेख में उनके निजी विचार हैं

 

यह भी पढ़ें-

देश में पहली बार बिकने जा रहा गधी का दूध, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

- Advertisement -

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More