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अजमल कसाब के खिलाफ गवाही देने वाली सबसे कम उम्र की देविका रोटावन, बॉम्बे हाइकोर्ट से मुवाअजा देने के आदेश की मांग की।

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नई दिल्ली –  26/11 के मुम्बई आंतकी हमलों में सबसे कम उम्र के बचे और महत्वपूर्ण चश्मदीदों में से एक देविका रोटावन, महाराष्ट्र सरकार से मुआवजे की मांग के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट चली गई थी, जिसने उसे ईडब्ल्यूएस योजना के तहत एक घर देने का वादा किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोटावन ने 21 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर महाराष्ट्र सरकार से उसके परिवार के लिए आवासीय परिसर आवंटित करने और उसे शिक्षा जारी रखने के लिए मुवाअजा के लिए आदेश देने की मांग की है।

देविका रोटावन, जो अब 21 साल की है, वह 26/11 के मुम्बई आंतकी हमलों में बची एवं महत्वपूर्ण चश्मदीद लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही देने वाली सबसे कम उम्र की गवाह थी। रोटावन, जो आतंकी हमलों के समय लगभग दस साल की थी और पुणे जाने के लिए अपने पिता और भाई के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पहुंचाीं थी।

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महज 10 साल की लड़की को उसके पैर में 26/11 की रात को सीएसटी में गोली लग गई थी। गोली लगने के बाद वह बेहोश हो गई और उसे सेंट जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी दो महीने के भीतर छह सर्जरी हुई और लगभग छह महीने तक बिस्तर पर रही। महीनों बाद, उसने आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही दी, जिससे वह मुंबई आतंकवादी हमले के मामले में सबसे कम उम्र की गवाह बन गई।

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आर्थिक तंगी से गुजर रही रोटावन

रोटावन ने अपनी याचिका में यह आशंका व्यक्त की है कि उसके परिवार को अपना वर्तमान घर खाली करना होगा क्योंकि वे बढ़ती आर्थिक तंगी की वजह से मुंबई के बांद्रा में अपने कमरे का मासिक किराया नहीं दे पाए हैं।

आगे उसने कहा कि उसके पिता और भाई को कोई नौकरी नहीं मिली, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें मासिक किराये का भुगतान करने में विफलता हुई। रोटावन, जो बांद्रा के चेतना कॉलेज में मानविकी में स्नातक पाठ्यक्रम में डिग्री प्राप्त है, अब उन्हें सिविल सेवाओं में अपना करियर बनाने की योजना है।

रोटावन ने कहा कि मैं विशेष रूप से लॉकडाउन अवधि के बाद समस्याओं का सामना कर रही हूं। मैं महाराष्ट्र सरकार से समर्थन चाहती हूं। मुझे सरकार द्वारा बताया गया था कि मुझे एक घर और सभी सहायता दी जाएगी लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। मुझे पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से 10 लाख रुपये की मदद मिली थी, इसका उपयोग तपेदिक (टीबी) के लिए मेरे इलाज के लिए किया गया था। मैं इसके लिए शुक्रगुजार हूं लेकिन इससे पहले मुझसे किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं, ”

पिछले महीने, रोटावन ने कहा कि उसने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर ईडब्ल्यूएस कोटा के तहत आवास की मांग की। उन्होंने आगे कहा कि उनके द्वारा प्राप्त सभी सरकारी सहायता उनके इलाज और पश्चात देखभाल पर खर्च की गई थी और यह उनकी शिक्षा के लिए अपर्याप्त थी।

 

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