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1962 जैसे युद्ध के हालात फिर बना रहा चीन, पूर्वी लद्दाख के उत्तर-पूर्व में बना रहा नई सड़क

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नई दिल्ली – लद्दाख के गलवान घाटी में 15 जून की रात हुए हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए, इस झड़प में चीन के भी 42 जवानों के मारे जाने की खबर आई थी। इसके बाद से भारत चीन के रिस्ते बेहद ही खराब होते चले गए । चीन लगातार भारत के खिलाफ एक के बाद एक साजिश रचता रहा । भारत में भी हिंसक झड़प के बाद चीन के खिलाफ व्यापक गुस्सा देखने को मिला, लोग सड़कों पर चीनी राष्ट्रपति के पूतले जलाए और चीनी समानों की होलियां भी जलाई। बाद में लगातार दोनों सेनाओं के हाईकमान ने उच्चस्तरीय बैठक की, लेकिन उसके बावजूद भी चीन अपनी गलतियों से बाज नही आ रहा है। अब खबर है कि चीन ने लद्दाख की सीमा वाले क्षेत्रों में मौजूदा सड़कों के वैकल्पिक मार्ग के लिए तेजी से निर्माण कार्य कर रहा है। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के लिए त्वरित टुकड़ी को जुटाने में लगने वाले समय इससे कम हो जाएगा।

इसकी जानकारी सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत में मिला है कि पीएलए पूर्वी लद्दाख के उत्तर-पूर्व में नई सड़क की निर्माण कर रहा है। इसमें ल्हासा से काशगर तक राष्ट्रीय राजमार्ग 219 (G219) का पिछला हिस्सा भी शामिल है। पूर्वी लद्दाख के क्षेत्रों से गुजरने वाली इन सड़क को निर्माण 1950 के दशक के मध्य में शुरू किया गया था जो 1957 तक पूरा हुआ। सड़क का निर्माण भारत और चीन के बीच तनाव की शुरुआत थी जो अंततः 1962 के युद्ध का कारण बना।

आजतक डिजिटल की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के बाद चीन ने नई सड़क G219 के जरिए पश्चिम के क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। G219 पर चीनी युद्ध स्मारक इस बात की याद दिलाता है कि कैसे भारतीय सेना इस क्षेत्र में बहुत ही बहादुरी से अपनी शौर्य दिखाई। उसके बाद से ही, भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे को शक के साथ एक-दूसरे की नजर में देखा जाता है। भारत का सड़क निर्माण भी लद्दाख में मौजूदा तनाव का एक कारण माना जाता है।

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हालांकि पूरा लद्दाख काफी दुर्गम इलाका है और पूर्वी लद्दाख में जाने के लिए चीन के पास एकमात्र सड़क G219 है। ऐसे में किसी संघर्ष की स्थिति में चीन के लिए अपने सैनिकों को वहां पहुंचाना और पीएलए के लिए अपनी टुकड़ी और साजोसमान को वहां तक ले जाना बेदह मुश्किल होता है। अगर इस क्षेत्र में भारत की बात करें तो सेना के ज्यादातर मूवमेंट के लिए वायुसेना का उपयोग किया जाता है।

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