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प्रत्येक दिन 118 किसान कर रहे हैं आत्महत्या, वहीं 40 बेरोजगार हर दिन करते है खुदकुशी, NCRB की झकझोर देने वाले आकड़े

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नई दिल्ली – किसान,गरीब, खेतीहर, औऱ दिहारी मजदूरों की राजनीति करने वाले न जाने कितनें ही राजनेताओं के जिंदगी संवर गए, मगर किसानों की हालत आज भी जस के तस है। चुनाव आते ही किसानों को लुभाने के लिए आनन-फानन में नेता अनेकों वायदे कर जाते है, मगर इसके बाद की हालत किसान के खुद के ऊपर होती है। यह सच लोकतंत्र में किसी से छिपी नही है।

आज NCRB के चौंका देने वाले आकड़े सामने आए है, इस आकड़े के मुताबिक किसान और दिहाड़ी मजदूर इतने हताश है कि हर दिन की सुबह 118 किसानों की आत्महत्या की खबर आती है। साल 2019 में कुल 43000 हजार किसानों और दिहाड़ी मजदूरों ने अपना गला खुद ही घोंट लिया। वहीं देशभर में कुल 1,39,123 लोगों ने आत्महत्या की।

किसान आत्महत्या

इन आकड़ों में अन्न उपजाने वाले किसानों की संख्या 10,281 हैं। जिसमें 5,957 किसान और 4,324 खेतिहर मजदूर शामिल हैं। वहीं साल 2018 में खेती किसानी करने वाले कुल 10,349 लोगों ने आत्महत्या की थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत कार्य करने वाले, एनसीआरबी ने कहा कि वर्ष 2019 में आत्महत्या करने वाले 5,957 किसानों में से 5,563 पुरुष और 394 महिलाएं थीं। वहीं वर्ष के दौरान आत्महत्या करने वाले कुल 4,324 खेतिहर मजदूरों में से, 3,749 पुरुष और 575 महिलाएं थीं।

किसान आत्महत्या

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आकड़े बता रहे है कि सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में (38.2 प्रतिशत) किसानों ने आत्महत्या की, तो वहीं कर्नाटक (19.4 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (10 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (5.3 प्रतिशत) और छत्तीसगढ़ और तेलंगाना (4.9 प्रतिशत प्रत्येक) से हैं।

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NCRB की डेटा के मुताबिक हमने पहले बताया कि साल 2019 में कुल 1,39,123 आत्महत्याएं हुई है। अगर इन आकड़ों का वर्गीकरण करें तो सर्वाधिक खुदकुशी करने वालों में दिहाड़ी मजदूर (23.4 प्रतिशत) हैं जिनके बाद गृहिणियां (15.4 प्रतिशत) रही हैं। इसके बाद स्वरोजगार करने वाले (11.6 प्रतिशत), बेरोजगार (10.1 प्रतिशत), पेशेवर या वेतनभोगी (9.1 प्रतिशत), छात्र और कृषि क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति (दोनों 7.4 प्रतिशत), और सेवानिवृत्त व्यक्ति (0.9 प्रतिशत) ने आत्महत्या की है। एनसीआरबी ने कहा कि 14.7 प्रतिशत आत्महत्या करने वाले पीड़ित अन्य की श्रेणी में आते हैं।

किसान आत्महत्या

 

साल 2109 के दौरान खुदकुशी करने वालों में 66.7 प्रतिशत शादीशुदा थे जबकि 23.6 प्रतिशत कुंवारे थे। आंकड़ों के अनुसार, आत्महत्या करने वाले पीड़ितों की शैक्षिक पृष्ठभूमि से पता चला है कि कुल आत्महत्या करने वाले पीड़ितों में से 12.6 प्रतिशत (17,588) अनपढ़ थे, जबकि केवल 3.7 प्रतिशत (5,185) स्नातक और इससे ऊपर के थे। वर्ष 2019 में आत्महत्या करने वालों में सबसे बड़ी संख्या 23.3 प्रतिशत (32,427) मैट्रिक तक पढ़े लोगों की रही। वहीं 19.6 प्रतिशत (27,323) माध्यमिक स्तर तक पढ़ने वालों और 16.3 प्रतिशत (22,649) प्राथमिक स्कूल तक पढ़े लोगों की रही। इसके बाद 14 प्रतिशत (19,508) आत्महत्या करने वाले उच्चतम माध्यमिक अथवा इंटरमीडिएट तक पढ़े लोगों की रही।

किसान आत्महत्या

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