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चिराग पासवान का स्लोगन ‘धर्म न जात, करें सबकी बात’, बिहार की बदलती राजनीति की कहानी कह रहा है

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पटना- बिहार में राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा अभी कहा नहीं जा सकता है। दल बदल का खेल चल रहा है। ऐसे में एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान एनडीए के लिए मुसीबतें खड़ी करते जा रहे हैं। चिराग पासवान की नीतिश कुमार से नाराजगी किसी से छिपी हुई नहीं है। नीतिश कुमार ने जीतन राम मांझी को एनडीए में शामिल करा कर उस नाराजगी को और बढ़ावा दे दिया है।

एलजेपी ने अखबारों में छपवाया विज्ञापन

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 से पहले लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी)  लगातार संस्पेंस पैदा कर रही है। एलजेपी की ओर से अखबारों में छपवाए गए एक विज्ञापन में लिखे गए नारे ने कई तरह की चर्चाएं शुरू कर दी है। बिहारी 1st संकल्प के तहत एक विज्ञापन बिहार के सभी हिंदी- इंग्लिश अख़बारों में दिया गया है। साथ में दिल्ली और मुंबई के महत्वपूर्ण अखबारों में भी एलजेपी की ओर से विज्ञापन दिया गया है।

इस विज्ञापन में एलजेपी ने यह बताया है कि नया बिहार और युवा बिहार बनाने के लिए सभी बिहारी भाइयों-बहनों को युवा बिहारी चिराग पासवान के साथ चलना होगा। यही समय है जब बिहार के अस्मिता की लड़ाई सभी बिहारी को लड़नी होगी ताकि हम सब बिहार पर नाज कर सकें। लोक जनशक्ति पार्टी सभी जाति धर्म में आस्था रखती है और सभी को हमेशा से साथ लेकर चली है। विज्ञापन में धर्म ना जात, करें सबकी बात पार्टी के पुराने टैग लाइन को दोहराया है।

विज्ञापन में माता सीता से लेकर कर्पूरी ठाकुर के फोटो

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विज्ञापन में माता सीता, भगवान महावीर, भगवान बुद्ध, गुरु गोबिंद सिंह साहेब, चाणक्य , चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, आर्यभट, शेरशाह सूरी, वीर कुंवर सिंह, महात्मा गांधी राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहब, रामधारी सिंह दिनकर, श्री कृष्णा सिंह, जय प्रकाश नारायण कर्पूरी ठाकुर जैसी विभूतियों के नाम लिए गए हैं। साथ ही कहा गया है कि इनकी प्रेरणा से व इनके आशीर्वाद के साथ युवा बिहारी का कारवां निकलेगा जो बिहार पर नाज करने संकल्पित है।

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क्या विज्ञापन के मायने समझिए

एलजेपी के बारे में कहा जाता है कि पार्टी को रामविलास पासवान के चेहरे के दम पर राज्य के करीब 5 फीसदी वोटर सपोर्ट करते हैं। इनमें से ज्यादातर वोटर पासवान बिरादरी के हैं। इस पार्टी को कुछ भूमिहार वोटर भी सपोर्ट करते रहे हैं। 2005 के विधानसभा चुनाव के बाद रामविलास पासवान के मुस्लिम सीएम बनाने की मांग को लेकर सरकार बनने नहीं दिया था, जिसके बाद राज्य में मध्यावधि चुनाव हुए थे। रामविलास पासवान दो  बार मुस्लिम सीएम की मांग सामने रख चुके हैं लेकिन हर बार उनका एजेंडा फेल ही रहा है।

इसे में अपने पुराने नारे को उठा कर चिराग पासवान ने एनडीए को दुविधा में डाल दिया है। चिराग पासवान एनडीए में सीएम नीतीश कुमार और जेडीयू का लगातार विरोध कर रहे हैं। अब सीएम नीतीश ने जीतन राम मांझी को एनडीए में ले आए हैं। इस बात से भी चिराग नाराज हैं। ऐसे वक्त में चिराग का समाज के सभी वर्गों की बात करना कई सवाल पैदा करता है। क्या अगर एनडीए में चिराग पासवान को मनमुताबिक सींटे नहीं मिली तो वो कोई दूसरा कदम भी उठा सकते हैं।

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