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जीतनराम मांझी के शामिल होने वजह से एनडीए में पड़ सकती है दरार!

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पटना- पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने एनडीए में चल रही खींचतान को और बढ़ा दिया है। जीतनराम मांझी को लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान की काट के तौर पर देखा जा रहा है। चिराग पासवान को संतुलित करने के लिए जानकार इसे नीतिश कुमार का एक मूव बता रहे हैं। चिराग पासवान जब तब नीतिश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं। और जेडीयू को असहज करते रहे हैं। पप्पू यादव ने भी चिराग पासवान को मुख्यमंत्री के लिए परफेक्ट मैटेरियल बता कर एनडीए में चल रही जद्दोजहद को और हवा देने की कोशिश की है।

गठबंधन में होते हुए भी जेडीयू और एलजेपी की खींचतान सामने आते रहती है

जीतनराम मांझी ने एनडीए में एंट्री कर सूबे के सियासी समीकऱण को अचानक बदल दिया है। रामविलास पासवान और चिराग पासवान के चेहरे को साथ रखकर एनडीए दलित समुदाय को साधने की कोशिश करता रहा है। लेकिन, मांझी के आने से अब समीकरण बदलने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार की यह कवायद चिराग पासवान को नागवार गुजरी है। सूत्रों के मुताबिक, एलजेपी सीटों के बंटवारे में हो रही देरी से परेशान है। पार्टी चाहती है जल्द से जल्द सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप दिया जाए। यह अलग बात है कि पहले से ही एलजेपी 119 सीटों पर अपनी तैयारी कर रही है। एनडीए का हिस्सा होते हुए भी एलजेपी और जेडीयू की खींचतान किसी से छिपी नहीं हुई है।

सीट बंटवारे में देरी के चलते चिराग पासवान है असहज

सीट बंटवारे की कवायद में देरी और मांझी की एंट्री के बाद बदले हालात में चिराग पासवान ने बिहार प्रदेश की संसदीय बोर्ड की दिल्ली में बैठक बुलाई है। 7 सितंबर को दिल्ली में होने वाली बैठक में एलजेपी विधानसभा चुनाव की तैयारी और गठबंधन के स्वरूप पर चर्चा करेगी। इस बैठक में संसदीय बोर्ड की तरफ से पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान को कोई भी फैसला लेने के लिए अधिकृत किया जा सकता है।चिराग पासवान ने कई बार अलग-अलग मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। अब नीतीश कुमार की मांझी को मनाकर अपने साथ लाने की कवायद चिराग की काट के तौर देखा जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान अब क्या करेंगे? क्योंकि पहले से ही सीटों को लेकर एनडीए के भीतर खींचतान जारी है।

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40 सीट पर बात बनते नहीं दिख रही है एलजेपी की

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साल 2015 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू एनडीए का हिस्सा नहीं थी, लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं। जेडीयू के बीजेपी के साथ आने के बाद सीटों को लेकर पेंच फंस गया है। वर्ष 2015 के विधानसभा और 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव को आधार बनाकर एलजेपी ने 40 सीटों की मांग की है. लेकिन, फिलहाल इतनी सीटों पर बात बनती नहीं दिख रही है। पहले से ही चल रही इस खींचतान में अब जीतनराम मांझी की एंट्री ने सीटों की लड़ाई को और बढ़ा दिया है।

 

बीजेपी की क्या है रणनीति

पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा साफ कर चुके हैं कि एनडीए मजबूती के साथ बिहार इलेक्शन लड़ने जा रहा है, और संगठन में सीट बंटवारे को लेकर कोई उहांपोह की स्थिति नहीं है। एनडीए में बीजेपी का झुकाव चिराग पासवान की तरफ है, क्योंकि चिराग एक युवा नेता है। और युवाओं में लोकप्रिय भी है। वहीं एनडीए के दूसरे घटक जेडीयू के नेता नीतिश कुमार का झुकाव जीतनराम मांझी की तरफ है। जीतनराम नीतिश के पुराने साथी रहे हैं। आने वाले समय में सीटों का कैसे बंटवारा होगा यह तो समय ही बताएगा।

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