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कौन है रामा सिंह , जिनके आरजेडी ज्वॉइन करने की खबरों से नाराज है रघुवंश प्रसाद सिंह,

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पटना- बिहार के राजनीति में घमासान मचा हुआ है ,आरजेडी की वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। वो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले रामा सिंह को पार्टी में लिए जाने की खबरों से आहत हैं। लेकिन आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने रघुवंश प्रसाद के इस्तीफे वाली चिट्ठी के तत्काल बाद ही चिट्ठी लिख कर जता दिया कि रघुवंश प्रसाद आरजेडी के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। रघुवंश प्रसाद के तेवरों से साफ है कि अगर रामा सिंह आरजेडी में आते तो वो लालू प्रसाद यादव का साथ छोड़ देंगे। वो फिर जो डैमेज आरजेडी को होगा उसको लालू भी कंट्रोल नहीं कर पाएंगे।

 

कौन है रामा सिंह

90 के दशक में बिहार-यूपी में बाहुबल का बोलबाला हो चुका था। अपहरण, धमकी, रंगदारी, मर्डर जैसे संगीन अपराध का ग्राफ चढ़ता जा रहा था। इसी दौरान बिहार में एक नाम तेजी से उभरा था, रामा किशोर सिंह ऊर्फ रामा सिंह। उस दौर में बाहुबल का परिचय रेलवे के टेंडरों में दिया जाता था। बिहार के बाकी बाहुबलियों की तरह ही रामा सिंह ने भी मालदा से गोरखपुर तक बिहार को मिलने वाले टेंडरों में हाथ लगाया। बाहुबल के दम पर रामा सिंह को कई टेंडर मिले। रामा सिंह की दोस्ती अपने समय के डॉन अशोक सम्राट से हुआ करती थी। अशोक सम्राट हाजीपुर में पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया। उस वक्त ये चर्चा आम हो गई थी कि अशोक सम्राट के लिए पुलिस का जाल रामा सिंह ने ही बिछाया था।

रामा सिंह का राजनैतिक करियर

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रेलवे के टेंडर ऑनलाइन होने के बाद सभी बाहुबलियों ने राजनीति की तरफ रूख किया। जिन बाहुबलियों ने राजनीति में आने का सोचा उनमें से एक रामा सिह भी थे।रामा सिंह बिहार विधानसभा के 5 बार सदस्य बने। 2014 के लोकसभा चुनाव में जब NDA मोदी नाम के विजय रथ पर सवार थी तो उसी लहर में रामा सिंह ने LJP के टिकट पर रघुवंश प्रसाद सिंह को हराया और 16वीं लोकसभा में पहुंचे। तब से ही रघुवंश को रामा फूटी आंख नहीं सुहाते। एक वजह से भी है कि दोनों सजातीय यानि राजपूत बिरादरी से आते हैं और बिल्कुल नहीं चाहते कि उनका वोट बैंक दूसरे की तरफ फिसले।

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कौन है आरजेडी के लिए महत्वपूर्ण रघुवंश प्रसाद या रामा सिंह

पार्टी सूत्रों के मुताबिक रामा सिंह तेजस्वी की पसंद हैं, उन्हीं के दम पर वो पार्टी में आने का ख्वाब भी देख रहे हैं। लेकिन उनके रास्ते का रोड़ा हैं प्रोफेसर साहब यानि रघुवंश बाबू… चाल, चरित्र और चेहरे में रामा सिंह उनके मुकाबले कहीं नहीं ठहरते। जाहिर है कि लालू रघुवंश को किसी भी कीमत पर खुद से अलग नहीं जाने देना चाहते। ऐसे में अगर लालू रघुवंश को मनाने में कामयाब हो जाते हैं तो तेजस्वी को अपनी इच्छा की बलि चढ़ानी ही पड़ेगी। क्योंकि तब आदेश एक पिता का नहीं बल्कि पार्टी सुप्रीमो का होगा। रामा सिंह की आपराधिक पृष्ठभूमि आरजेडी को असहज करेगी। तो वहीं अगर रामा सिंह के आरजेडी के ज्वॉइन करने की वजह से रघुवंश प्रसाद आरजेडी छोड़ते हैं तो पार्टी को चुनावों में विपक्ष अपराधियों को संरक्षित करने वाली पार्टी के तौर पर पेंट करने से नहीं चुकेगा।

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