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जिसके लिए जेल में नाचती थी बार डांसर, जो मंत्री की हत्या करके भी रहा बेदाग, जिसने डीएम की दिन-दहाड़े करवा दी हत्या, वो है खास नीतीश के बाहुबली मुन्ना शुक्ला – जानिए पूरी कहानी

जिसके लिए जेल में नाचती है बार डांसर, जो मंत्री की हत्या करके भी रहा बेदाग, जिसने डीएम की दिन-दहाड़े करवा दी हत्या, वो है खास नीतीश के बाहुबली मुन्ना शुक्ला - जानिए पूरी कहानी

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नई दिल्ली – जब अंधेरा घनघोर हो तो मन सहम जाता है, लेकिन जो दिन के उजाले में काली-अंधेरी रात को महसूस करा दें वो है बाहुबली और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खास मुन्ना शुक्ला ।

बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच नीतीश सरकार का एक नारा खूब चर्चित है काहे का करें विचार , ठीके तो है नीतीश कुमार, इस नारे का अर्थ यह कहता है कि “बिहार में सब कुछ सदाबहार है, यहां बिहारवासियों को किसी भी तरह का विचार करने की जरूरत नही है, जो मौजूदा सरकार चल रही है, वह बारहों मास फलने-फूलने का गुण बरसाती है। इसलिए जनता इस सरकार को बरकरार रखे।” जाहिर सी बात है यह संदेश युवा वोटरों के लिए ही हो सकता है, जो अतीत की कहानी से वंचित है, जब बात राज्य में सुशासन की हो तो इस कहानी की चर्चा अहम हो जाती है।

नेताओ के बैड करेक्टर में सबसे अहम वर्चस्व और बाहुबल जैसे शब्दों का आना होता है। बिहार की राजनीति में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। वर्चस्व, बाहुबल जैसे शब्द बिहार में समय-समय पर हर पार्टी और उसके नेता के साथ जुड़ते रहे हैं। इसी क्रम में आज हम विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला के बारे में चर्चा कर रहें है। मुन्ना शुक्ला कुख्यातों की सूची का वो नाम जिसके बारे में कहा जाता है कि उसे राजनीतिक दल डर के मारे टिकट देती रही हैं। कहा जाता है कि मुन्ना शुक्ला बाहुबल और नेतागिरी का पूर्ण कॉकटेल हैं।

बड़े भाई से सिखा वर्चस्व की जंग का हुनर

कुख्यात मुन्ना शुक्ला

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कुख्यात मुन्ना शुक्ला की कहानी को जानने के लिए हमें थोड़ा इतिहास में जाना होगा। नवभारत टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक मुजफ्फरपुर का लंगट सिंह कॉलेज न जाने कितने ही आईएएस और आईपीएस बनाए, लेकिन साथ में इसी कॉलेज से अनेकों दहशतगर्त मानसिकता और जंग का ककहरा सीखकर समाज को असंतुलित बनाने के लिए भी आए । मुजफ्फरपुर कोर्ट के वकील रामदास शुक्ला के चारों बेटे मैट्रिक पास करने के बाद इसी कॉलेज में दाखिल हुए। उस वक्त कॉलेज के प्रांगण में एकता और सद्भाव के बजाय जाति और क्षेत्र की वर्चस्व की लड़ाई चलती थी। रामदास शुक्ला के बेटे भी इसी लड़ाई के हिस्सा रहें, उस वक्त के राजनेता इसे काबू करने के बजाए अपने हित में इसे हवा देना ही मुनासिब समझते थे। छात्रों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में रामदास के बेटे कौशलेन्द्र शुक्ला उर्फ छोटन शुक्ला अव्वल आए ,छोटन शुक्ला लंगट सिंह कॉलेज में पढ़ाई की डिग्रियां हासिल करने के साथ क्राइम और पॉलिटिक्स का ज्ञान भी ले रहे थे। कॉलेज से निकलते ही छोटन शुक्ला ठेकेदारी में गए और बाहुबल के बूते तिरहुत प्रखंड के जाने माने ठेकेदार बन गए। राजनीति में पूर्णतः पैठ बनी नही थी कि साल 1994 में छोटन शुक्ला की हत्या हो गई। भाई की हत्या से तिलमिलाया मुन्ना शुक्ला ने मर्डर को ही सहारा बनाकर अपराध की दुनिया में आधिकारिक एंट्री दर्ज करवाई।

भीड़ के हाथों डीएम की करवा दी हत्या

इसके बाद मुन्ना शुक्ला बाहुबलियों के श्रेणी में प्रवेश कर चुके थे औऱ कोई बड़ा कांड करने की फिराक में थे, इसके लिए उसने भाई छोटन शुक्ला की शव यात्रा निकाली और विरोध प्रदर्शन कराए। प्रदर्शन को शांत कराने पहुंचे गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया, उसी दौरान मुन्ना शुक्ला ने भीड़ को उकसा दिया, जिसके बाद भीड़ ने डीएम को पीट-पीटकर हत्या कर दी। अधिकारिक एंट्री के बाद पहली बार मुन्ना शुक्ला का नाम हत्या केस में आया। इस वारदात के बाद मुन्ना ने बड़े भाई के अपराध की कुर्सी का वारिस बन बैठा।

मंत्री की हत्या करवा खुद को कुख्यात साबित किया

कुख्यात मुन्ना शुक्ला

वर्ष 1994-1998 तक कुख्यात मुन्ना शुक्ला की ठेकेदारी खूब जमी और जमकर पैसा बनाया। इसके साथ ही बिहार के दूसरे बाहुबलियों से अदावत लेता रहा। इसी दौरान मुजफ्फरपुर इलाके में बृजबिहारी ऐसे नेता थे जो मुन्ना के बड़े भाई छोटन के दौर से ही बाहुबलियों के सामने चुनौती पेश कर रहे थे। साल 1998 में राबड़ी देवी की सरकार में बृजबिहारी प्रसाद मंत्री बने और अपना कद और भी ऊंचा कर लिया था। यह बात मुन्ना को चुभ रही थी। 3 जून 1998 को मंत्री बृज बिहारी प्रसाद इलाज के लिए पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान अस्पताल में थे। रात को पार्क में टहल रहे थे, तभी अपराधियों ने उन्हें गोलियों से भून डाला। इस केस में राजन तिवारी और विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला, सूरजभान सिंह सहित 8 कुख्यातों को आरोपी बनाया गया। इस वारदात में निचली अदालत से सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, लेकिन 25 जुलाई 2014 को मुन्ना शुक्ला, सूरजभान सिंह समेत सभी आरोपियों को पटना हाईकोर्ट ने बरी कर दिया।

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दाग छुपाने के लिए सत्ताधारी दल का पहना पट्टा

कुख्यात मुन्ना शुक्ला

बृज बिहारी प्रसाद की हत्या के बाद कुख्यात मुन्ना शुक्ला के लिए कुछ दिनों तक बुरा दौर शुरू हो गया। मुन्ना के पीछे पुलिस और प्रशासन हाथ धोकर पीछे पड़ गए। इसी तंगी देखते हुए मुन्ना ने चालाकी से राजनीति में कदम रख दिया। साल 1999 में मुन्ना शुक्ला हाजीपुर के जेल से ही निर्दलीय विधानसभा का चुनाव लड़े लेकिन पराजित हो गए। साल 2002 में फिर से जेल से ही निर्दलीय चुनाव लड़े और इस बार जीत गए। 2005 में पहले चुनाव में लोजपा के टिकट पर और बाद में मध्यावधि चुनाव में जेडीयू के टिकट पर विधायक बने। इसके बाद से वह लगातार जेडीयू में ही बने हैं। 2009 में जेडीयू ने मुन्ना शुक्ला को वैशाली लोकसभा सीट से रघुवंश प्रसाद के खिलाफ उतारा लेकिन, वे हार गए। इसके बाद मंत्री बृज बिहारी हत्याकांड में जेल जाने के बाद मुन्ना शुक्ला ने पत्नी अन्नु शुक्ला को लालगंज से जेडीयू के टिकट पर विधायक बनवाया।

जेल से चलता रहा फिरौती का धंधा

वर्ष 2012 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकार रैली की थी। आरोप है कि इस रैली के नाम पर लालगंज से जेडीयू विधायक अन्नु शुक्ला के पति मुन्ना शुक्ला ने जेल से ही दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी। इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्टर से रंगदारी मांगी गई थी। भगवानपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और जेल में छापेमारी कर मुन्ना शुक्ला का मोबाइल फोन बरामद कर लिया गया। तब आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने आरोप लगाया कि जेडीयू के लोग उगाही के काम में लगे हुए हैं।

सजा काटने के दौरान जेल में कराया बार बाला का डांस

कुख्यात मुन्ना शुक्ला

अपनी दागदार छवि को छुपाए रखने के लिए मुन्ना शुक्ला साल 2005 से जेडीयू में बने रहे। 2005 से अब तक लगातार जेडीयू की सरकार होने से मुन्ना शुक्ला को खूब फायदा मिला। कहा जाता है कि वह ज्यादातर बड़े मुकदमों में बेदाग साबित हो चुके हैं। अब एक बार फिर से लालगंज विधानसभा क्षेत्र में प्रचार कर रहे हैं और जेडीयू से टिकट की उम्मीद लगाए हुए हैं। बाहुबल की दुनिया में मुन्ना शुक्ला जब शिखर पर थे तो राजनीतिक दल डर से उन्हें टिकट देती थीं। जेल में रहते हुए मुन्ना शुक्ला पर बार बालाओं के डांस कराने के भी आरोप लगे। इसकी तस्वीरें अखबारों में प्रकाशित हुई। लेकिन ये सब मामले ज्यादा दिनों तक सुर्खियों में नही रही। मुन्ना शुक्ला अब युवाओं के बीच लोकप्रियता पाने के लिए अपनी पीएचडी की डिग्री मीडिया के सामने लेकर आए, हालांकि यह भी विवादों में ही रहा। मजेदार बात तो ये है कि एक कुशल राजनेता की भांति कभी अपने घर की छत पर सब्जी उगाने की तस्वीरें जारी करते हैं तो कभी किसी गरीब बेसहारा औरत को गले लगाते हुए देखे जाते हैं। वे हर भाषण और इंटरव्यू में नीतीश कुमार के सुशासन का बखान करते नहीं थकते हैं।

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