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तेजस्वी होंगे महागठबंधन से सीएम फेस? , क्या दे पाएंगे नीतीश कुमार को टक्कर

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पटना-  बिहार चुनाव की सरगर्मियां पूरे शिखर पर हैं। इस बार का मुकाबला तेजस्वी और नीतीश कुमार की बीच होने जा रहा है। तेजस्वी जहां युवा चेहरा हैं तो नीतीश कुमार के पास राजनीति का लम्बा अनुभव है। बिहार में दोनों की अपनी अपील है। इस मुकाबले के क्या परिणाम होंगे ये आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन राजद ने तेजस्वी यादव को अपना सीएम फेस बनाकर चुनाव लड़ना चाहती है, ऐसा सूत्रों के माध्यम से पता चल रहा है। क्या महागठबंधन के और साथी इस पर सहमत होंगे या नहीं? लेकिन आरजेडी की मंशा साफ है कि तेजस्वी यादव उसके सीएम फेस हैं। अब सवाल उठता है तो क्या तेजस्वी यादव एनडीए की सीएम नीतीश कुमार को टक्कर दे पाएंगे या नहीं। इस सवाल का जवाब भी भविष्य में छुपा है।

सीट बंटबारे के बाद होगी महागठबंधन के सीएम फेस की घोषणा

महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार के रूप में तेजस्वी यादव की घोषणा राजद और कांग्रेस के बीच सीट का बंटवारा होने के बाद ही हो सकती है। राजद ने पहले ही कहा है कि तेजस्वी ही महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार होंगे। राजद ने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी होने की वजह से और 150 से अधिक सीट पर चुनाव लड़ने की वजह से मुख्यमंत्री पद के कैंडिडेट पर उसका दावा बनता है। पार्टी को भरोसा है  कि वह इस बार पूरे बहुमत से राज्य विधानसभा चुनाव जीतने वाली है।

 

राजद बदल सकती है अपनी रणनीति

 राजद इस बार के विधानसभा चुनावों में अपने परंपरागत चुनावी समीकरण से हटकर राजद उच्च जाति का कार्ड खेलने का मन बना रही है। तेजस्वी यादव जहां पहले ही लालू प्रसाद के 15 साल के कार्यकाल के लिए माफ़ी मांग चुके हैं, वहीं इस बार पार्टी अन्य कई बदलाव के मोड में भी है। राजद ने जगदानंद सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर उच्च जाति के लोगों के बीच एक संदेश दिया है कि वह सभी जातियों को साथ लेकर चुनाव लड़ना चाहती है। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद ने 110 में केवल 2 सीट पर राजपूत को टिकट दिया था। राजद के पास अभी कोई दमदार भूमिहार या ब्राह्मण कैंडिडेट नहीं है। साल 2015 के चुनाव में यादव जाति से कुल 48 उम्मीदवार थे, जबकि 16 मुस्लिम थे। चुनाव जीतने वाले कैंडिडेट की बात करें तो 42 यादव एवं 12 मुस्लिम कैंडिडेट ने जीत दर्ज की थी। बिहार में उच्च जातियां अभी तक एनडीए के प्रत्याशियों को अपना वोट देती रही हैं। ऐसे में अगर राजद अपनी रणनीति में बदलाव करके उच्च जातियों के लोगों को टिकट देती हैं तो एनडीए के लिए परेशानी का सबब बन सकती हैं।

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नीतीश की लोकप्रियता में गिरावट

भाजपा के द्वारा कराए गए आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हो चुका है कि इस बार नीतीश कुमार की लोकप्रियता में खासी गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में अगर आरजेडी तेजस्वी यादव को फेस बनाकर चुनाव लड़ती है। तो नीतीश कुमार के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट के बाद भाजपा ने भी तय किया है कि वो मोदी सरकार के नाम पर वोट मांगेगी।

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