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11 साल पहले भी चुनाव लड़ने के लिए वीआरएस ले चुके हैं बिहार के ‘रॉबिन हुड’ पाण्डेय , भाजपा नेता की वजह से अरमानों पर फिरा था पानी

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पटना-  पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय सुशांत सिंह राजपूत केस को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं। जिस अग्रेसिव तरीके से बिहार पुलिस ने इस केस को लिया वो काबिल ए तारीफ था। अब जब गुप्तेश्वर पाण्डेय स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं तो उनके बिहार विधानसभा चुनावों में हिस्सेदारी की चर्चा हो रही है। वो बक्सर से चुनाव लड़ सकते हैं। वो बक्सर के ही रहने वाले भी हैं। वो कई बार सार्वजनिक मंच से स्वीकार कर चुके हैं कि वो रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आ सकते हैं। नीतीश कुमार से भी उनकी करीबी है। इसलिए जदयू के टिकट पर बक्सर से उनके चुनाव लड़ने की संभावनाओं को खारिज नहीं किया जा सकता है।

2009 में भी ले चुके हैं वीआरएस

गुप्तेश्वर पांडे ने 2009 में भी वीआरएस लिया था और उस समय वह लोकसभा चुनाव में उतरना चाहते थे। माना जाता है कि गुप्तेश्वर पांडे बिहार की बक्सर लोकसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। गुप्तेश्वर पांडे को उम्मीद थी कि बक्सर से बीजेपी के तत्कालीन सांसद लालमुनि चौबे को पार्टी दोबारा से प्रत्याशी नहीं बनाएगी। लेकिन लालमुनि चौबे की वजह से उनका मंसूबा पूरा नहीं हो पाया था। सियासी अरमानों पर पानी फिरने के बाद गुप्तेश्वर पांडे ने दोबारा से नौकरी में वापसी कर ली।

बेहद गरीब परिवार में हुआ था जन्म

उनका जन्म 1961 में बक्सर के ही गेरुआ गाँव में हुआ था, जो सड़क, अस्पताल, बिजली और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से कटा हुआ था। गुप्तेश्वर पांडेय खुद कहते हैं कि उन्होंने बनियान पहन कर स्कूल जाते थे और उन्हें इंटर तक हिंदी बोलना भी नहीं आता था, वो भोजपुरी बोलते थे।

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गुप्तेश्वर पांडेय के एक भाई किसान हैं और एक भाई मीडिया में हैं। उन्होंने उन्होंने संस्कृत में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। एमए का सेशन लेट होने के कारण वो यूपीएससी की तैयारी में लग गए। गुप्तेश्वर पांडेय खुद स्वीकारते रहे हैं कि उनके खानदान में कभी कोई उनसे पहले स्कूल ही नहीं गया। ज्यादा से ज्यादा लोगों को हस्ताक्षर करने आता था। उनके पिता को पता तक नहीं था कि बेटा कहाँ पढ़ रहा है , वो साधु थे।

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