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हसनपुर विधानसभा सीट – तेजप्रताप को पड़ सकता है महंगा, जानिए हसनपुर का इतिहास

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हसनपुर – बिहार के समस्तीपुर जिले में स्थित हसनपुर विधानसभा क्षेत्र बीते कुछ दिनों से सुर्खियों में है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता एवं लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यहां से चुनाव लड़ने जा रहे है। यह विधानसभा क्षेत्र समाजवादियों का गढ़ माना जाता है। यहां कांग्रेस को केवल एक बार साल 1985 जीत मिली थी। उस वक्त कांग्रेस के विधायक राजेन्द्र प्रसाद यादव थे।

साल 1985 से पूर्व गजेन्द्र प्रसाद हिमांशु लगातार यहां से विधायक रहें , उन्होंने साल 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से पहली बार जीत दर्ज MLA बनें थे। आपको बता दें कि साल 1990 में गजेन्द्र प्रसाद हिमांशु एक बार फिर चुनाव जीत गए, इस बार उन्होंने जनता दल के टिकट चुनाव पर लड़े थे। इसके बाद 1995 के चुनावों में जनता दल ने सुनील कुमार पुष्पम को अपना उम्मीदवार बनाया जिन्होंने जीत हासिल की।

वर्ष 2000 के विधानसभा चुनावों में एक बार फिर गजेंद्र प्रसाद हिमांशु मैदान में थे जिसमें उन्होंने जदयू के टिकट पर जीत हासिल की। इसके बाद सुनील कुमार पुष्पम अक्टूबर 2005 और फरवरी 2005 के चुनाव में राजद के टिकट पर ने जीत हासिल की। बाद के दिनों में हसनपुर सीट जदयू और आरजेडी के बीच चुनावी जंग का मैदान बन गई।

बहरहाल, 2015 विधानसभा चुनावों की गणित की बात करें तो चुनाव में जदयू महागठबंधन का हिस्सा थी और यह सीट जदयू के पाले में गई। पिछले चुनाव में जदयू के राजकुमार राय को 63,094 (43.0%) मतों से जीत मिली जबकि राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के विनोद चौधरी को 33,494 (22.8%) मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहना पड़ा। वहीं जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के सुनील कुमार पुष्पम तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 19,756 (13.5%) वोट मिले।

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इस सीट की जातिगत समीकरण पर चर्चा करें तो यहां आबादी जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार 432865 है। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति का अनुपात क्रमशः 17.55 और 0.01 फीसदी है। इस सीट पर 2015 के चुनावों में 56.07% मतदान हुआ था। यह क्षेत्र यादव बहूल है।

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