Thejantarmantar
Latest Hindi news , discuss, debate ,dissent

- Advertisement -

बीजेपी -जेडीयू में हुआ सीटों पर फॉर्म्यूला तय , नाराज चिराग पर क्या छोड़ देंगे एनडीए?

3,244

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

- Advertisement -

पटना- सीटों के बंटवारे को लेकर एनडीए में अभी भी पेंच फंसा हुआ है। बीजेपी और जेडीयू 2010 के फॉर्म्यूले पर चुनाव लड़ने को तैयार है। लेकिन सहयोगी एलजेपी अभी भी नाराज है। चिराग पासवान से सीटों के बंटवारे के बंटवारे को लेकर कोई बात नहीं हुई है। बीजेपी चिराग को 25 विधानसभा सीट ऑफर कर रही है। लेकिन चिराग पासवान 25 सीटों से संतुष्ट नहीं हैं। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या चिराग पासवान एनडीए को अलविदा कह देंगे। अभी किसान बिल को लेकर अकाली दल में भी एनडीए का साथ छोड़ दिया है। ऐसे में बीजेपी चिराग पासवान को नहीं जाना देना चाहती है इसलिए चिराग पासवान की मान मनौव्वल लगातार जारी है।

2010 के फॉर्म्यूले पर चुनाव लड़ना चाहती है बीजेपी

2010 विधानसभा चुनावों में बीजेपी और जेडीयू के गठबंधन ने आरजेडी को 22 सीटों पर समेट दिया था। 2010 में जेडीयू 141 और बीजेपी ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में जेडीयू ने 115 तो बीजेपी ने 91 सीटों पर जीत हासिल कर लालू यादव की पार्टी आरजेडी को 22 सीट पर ही समेट दिया था।सूत्र की माने तो विधानसभा चुनाव 2020 में जेडीयू 103 और बीजेपी 101 सीट पर चुनाव लड़ने जा रही है। 2010 में बीजेपी और जेडीयू से साथ एलजेपी और हम नहीं थे । लेकिन इस बार एनडीए में एलजेपी और जीतनराम मांझी की पार्टी ‘हम’ भी एनडीए में शामिल है। इसलिए इस बार 39 सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी गई है।

2015 ने बीजेपी और जेडीयू के बीच फंसा दिया है पेंच

2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में 243 सीटों में से 178 पर महागठबंधन की जीत हुई लेकिन इस जीत में जेडीयू से अधिक विधायक आरजेडी के जीते थे। बीजेपी से अलग हुए नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने 2010 के चुनाव में 142 सीटों पर लड़ा था लेकिन 2015 में महागठबंधन में शामिल हुए जेडीयू 101 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस लिहाज से देखा जाए तो 2015 में जेडीयू 2010 के मुकाबले 41 कम सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इसके अलावा 101 सीटों पर लड़कर जेडीयू ने 71 सीटें जीती थी, जो 2010 के मुकाबले 44 सीट कम थी। वहीं 167 सीट पर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी भी 2015 में महज 53 सीट जीत हासिल कर सकी थी। अब दोनों पार्टी के नेताओं के सामने दिक्कत यह है कि वो 2010 के चुनावों में सहयोगी थे लेकिन 2015 के विधानसभा चुनावों में विरोधी थे। जानकारी के अनुसार 56 सीटें ऐसी है जहां बीजेपी-जेडीयू ने 2015 में एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। अब उस सीट पर किसका दावा होगा इसपर मंथन जारी है। सूत्र की माने तो 2010 का फॉर्मूला तय हो चुका है इसलिए फसें सीटों पर ज्यादा माथापच्ची नही करना होगा। यानी 2010 में जिन सीटों पर बीजेपी ने चुनाव जीता था वहां से  बीजेपी  चुनाव लड़ेगी । जेडीयू ने जहां जीत हासिल की थी वह सीट जेडीयू चुनाव लड़ेगी।

- Advertisement -

नाराज चिराग पासवान बिगाड़ सकते हैं सारा खेल

- Advertisement -

एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान बीजेपी द्वारा ऑफर की गई 25 सीटों पर मानने को तैयार नहीं हैं। बीजेपी चिराग पासवान की मान मनौव्वल में लगी हुई है। नीतीश कुमार चिराग पासवान को ज्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं है इसलिए उन्होंने महादलित समुदाय से आने वाले अशोक चौधरी को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। सूत्र यह भी बताते है कि नीतीश कुमार एलजेपी का एनडीए से बाहर जाने का इंतजार कर रहे है। लेकिन बीजेपी चाहती है कि एलजेपी फिलहाल एनडीए में रहें। इसके पिछे कारण यह है कि, कृषि बिल को लेकर शिरोमणि अकाली दल एनडीए से अलग हो गया है। और ऐसे में बीजेपी नहीं चाहती कि उसके अन्य सहयोगी भी एनडीए से अलग हो जाएं।

चिराग पासवान के पास भी नहीं है ज्यादा ऑप्शन

एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के पास ज्यादा ऑप्शन नहीं हैं वो या तो अकेले अपने दम पर चुनाव लड़े या फिर बीजेपी द्वारा ऑफर की गई पच्चीस सीटों पर ही अपने मन को समझा लें। नहीं तो उनके पास आज ही वजूद में आए तीसरे मोर्चे का विकल्प है। जहां वो जाप और चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी के  साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन अगर वो एनडीए से गए तो उपेंद्र कुशवाहा उस मौके के भुना लेंगे और वो एनडीए में शामिल हो जाएंगे। बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा तो 5 सीटें ऑफर की हैं।

बिहार चुनाव से जुड़े हर बड़ी खबर के लिए Thejantarmantar.com को सब्सक्राइब करें

इसे भी पढ़े –

आरजेडी में शामिल हुईं बाहुबली आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद

- Advertisement -

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More