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मुकेश सहनी का आरजेडी नेतृत्व पर हमला , कहा – जो बड़े भाई तेजप्रताप का नही हुआ वो मेरा क्या होगा

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पटना – बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर शनिवार शाम महागठबंधन में सीटों का बटवारा हो गया है। आरजेडी सबसे ज्यादा 144 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी इस बात पर महागठबंधन में सहमति बनी, लेकिन इस बटवारें के बाद से ही सबसे ज्यादा नाराज विकासशील इंसान पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने तेजस्वी यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को महागठबंधन में तेजस्वी पर पीठ में छूरा मारने का आरोप लगाने वाले मुकेश सहनी ने आरजेडी नेतृत्व पर तीखे हमले किए हैं। रविवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर मुकेश सहनी ने तेजस्वी पर अपनी पूरी भड़ास निकाली है।

जो बड़े भाई तेजप्रताप का नही हुआ वो मेरा क्या होगा

वीआईपी अध्यक्ष मुकेश सहनी ने अपनी प्रेस वार्ता में दावा किया है कि ‘तेजस्वी ने अपने बड़े भाई तेजप्रताप को महज दो सीट के लिए अपमान कर दिया। जो अपने भाई का नही हुआ वो किसी और का क्या होगा। अगर कभी तेजप्रताप यादव के हाथ में आरजेडी की बागडोर होगी तभी हम आरजेडी के साथ जाएंगे लेकिन तेजस्वी के साथ कभी राजनीति नहीं करुंगा। आरजेडी अगर नेतृत्व बदलती है तो विचार फिर से किया जा सकता है।’

महागठबंधन से दूरी बनाने के बाद वीआईपी के अध्यक्ष मुकेश साहनी ने कहा कि ‘मेरी उम्र 39 साल है, लेकिन मैं 21 की आयु से ही संघर्ष कर रहा हूं। एक गरीब मछुआरा परिवार में जन्म लिया, 18 साल की उम्र से ही मुंबई जैसे शहर में दिन रात मेहनत करके कामयाबी हासिल की। इसके बाद पिछले छह साल से बिहार में पिछड़े, अति पिछड़े और मल्लाह समाज के लिए निरंतर संघर्ष कर रहा हूं। उस संघर्ष में हर किसी ने धोखा दिया, लेकिन फिर भी आगे बढ़ता रहा हूं।

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मुकेश सहनी आगे कहते है कि साल 2018 में एक राजनीतिक दल बनाया और लालू प्रसाद यादव के विचारों को अपनाते हुए उनके मार्ग पर चलने का फैसला लिया, इसलिए महागठबंधन में शामिल हुआ। उस दौरान वह मीठी-मीठी बातें करते थे। जहां मैं बुलाता वे आते और बात करते, क्योंकि उन्हें मुझे गठबंधन में शामिल करना था। गठबंधन होने के बाद लोकसभा चुनाव के दौरान भी हमसे चीटिंग किया गया। जो सीट हमें नहीं चाहिए था वही सीटें दी। यहां तक तय हो चुका था कि मुझे दरभंगा लोकसभा सीट से लड़ना है, मैंने सारी तैयारी भी कर ली थी, लेकिन ऐन वक्त पर मुझे खगड़िया भेज दिया। हम चुप रह गए। हमें मधुबनी की सीट नहीं चाहिए थी, लेकिन जबरदस्ती दी गई। साथ ही अपना हमारे कैंडिडेट की जगह अपना कैंडिडेट दिया। हम इसपर भी सहमत हो गए। हम मुजफ्फरपुर नहीं लड़ना चाहते थे, लेकिन वहां भी जबरदस्ती की। इसके बाद भी हम महागठबंधन में बने रहे।’

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