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रामविलास पासवान के निधन से वोटों की गणित में बड़ा उलटफेर, इस प्रकार बदल सकता है सियासत का रूख

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पटना – बिहार के कद्दावर नेता , केंद्रीय मंत्री, एलजेपी नेता रामविलास पासवान का गुरूवार शाम निधन हो गया। राम विलास पासवान का निधन, बिहार चुनाव से ठीक पहले होना वोटों की गहरा असर डाल सकता है। इस बार चुनाव में बीजेपी – जेडीयू के साथ एलजेपी चुनाव नही लड़ रही है। साथ ही चिराग पासवान सीएम नीतीश पर जमकर हमला बोल रहें है। ऐसे में रामविलास पासवान के निधन से लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) सहानुभूति बटोर सकती है। पासवान के जाने से दुसाध वोट फिर से चिराग के साथ खड़े हो सकते हैं। रामविलास पासवान दशकों तक दुसाधों के सबसे बड़े नेता रहे। चुनाव में दुसाधों की सक्रिय भागीदारी के चलते ही पासवान की राजनीतिक ताकत कभी कमजोर नहीं हुई। चिराग उसी ताकत को नीतीश के खिलाफ इस्‍तेमाल करना चाहते हैं।

रामविलास पासवान एक दलित नेता होने के नाते उनका कद केवल बिहार की राजनीति में नही था, बल्कि वह राष्ट्रीय स्तर के नेता भी थे। वह अपने बिमारी के चलते चुनाव न लड़ने की घोषणा के साथ ही सियासत की पूरी कमान बेटे चिराग पासवान को सौंप दिए थे। चिराग पासवान की सक्रिय भूमिका भी बिहार चुनाव में खूब दिख रही है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि जिन दुसाध वोट को राम विलास पासवान लंबे अर्शे से अपने पक्ष में करते आए है वो क्या चिराग के भी साथ आएंगे? बाद का तो पता नही मगर इस बार के विधानसभा चुनाव में रामविलास पासवान के निधन सहानुभूति के जरिए वोट बटोर सकती है। दुसाध एकजुट होकर एलजेपी के लिए वोट करें। चिराग लगातार नीतीश कुमार पर हमला बोल रहें है। पार्टी ने गुरुवार को नीतीश और जेडीयू को झटका लेने वाले प्‍लान पर कदम आगे बढ़ा दिए हैं।

आपको बता दें कि बीजेपी के लगभग हर बड़े नेता ने राम विलास पासवान के निधन पर दुख जताया है। हालांकि चुनाव में बीजेपी और जेडीयू को एलजेपी से दो-दो हाथ करने पड़ेंगें। सियासी गलियारों में खूब चर्चा है कि बीजेपी ने एलजेपी को भी साधा हुआ है लेकिन वह ऐसी परिस्थिति नहीं चाहती जहां जेडीयू के साथ उसका गठबंधन बहुमत से दूर रह जाए क्‍योंकि तब चिराग को ऐडवांटेज होगा। चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है, ऐसे में बीजेपी पासवान को श्रद्धांजलि तो देगी लेकिन एलजेपी का विरोध करेगी। बीजेपी के शीर्ष नेता नीतीश कुमार के लिए अपना समर्थन बार-बार दोहरा चुके हैं।

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पासवान के निधन से चंद घंटे पहले ही एलजेपी ने एक पत्र सार्वजनिक किया था। 24 सितंबर को बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को लिखी चिट्ठी में चिराग ने कहा था कि जब उनके पिता राज्‍यसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल करने से पहले मुलाकात कर समझाने गए थे तो नीतीश का व्‍यवहार ‘ठीक नहीं था। जब यह चिट्ठी सार्वजनिक हो गई है तो इसे फैलाकर एलजेपी की पोजिशन को और मजबूत करने की कोशिशें होंगी।

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