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तेजस्वी के लिए आसान नहीं होगा इस बार राघोपुर का रण

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वैशाली- राघोपुर बिहार विधानसभा की सबसे हॉट सीट में से एक है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव यहां से दोबारा से किस्मत आजमाएंगे।लेकिन ऐसा नहीं है कि इस बार राघोपुर का रण तेजस्वी यादव के लिए बहुत आसान होने वाला है। राघोपुर वैसे तो लालू परिवार का गढ़ रहा है। लेकिन इस सीट से बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को हार का भी मुंह देखना पड़ा है।  लालू प्रसाद यादव भी राघोपुर से विधायक रहे हैं। ऐसे में राघोपुर तेजस्वी यादव के लिए परम्परागत विधानसभा सीट है। बावजूद इसके यह सीट इतनी भी आसान नहीं है।

क्या मुश्किले आ सकती है तेजस्वी यादव को

दरअसल तेजस्वी के जो विरोध है वो पिछले तीन बार से चुनाव लड़ रहे हैं। 2010 के विधानसभा चुनावों सतीश कुमार भाजपा के टिकट पर राबडी देवी को अच्छे खासे अंतर से विधानसभा चुनावों में मात दे चुके हैं। 2015 में सतीश कुमार यादव तेजस्वी के हाथों हार भी देख चुके हैं। दरअसल सतीश कुमार को विधानसभा में जनाधार वाला नेता माना जाता है। 2005 अक्टूबर में हुए चुनावों में  30601 वोट लेकर आए थे। वहीं राबड़ी देवी 35891 वोट मिले थे उन्होंने करीब पांच हजार मतों से सतीश यादव को मात दी थी। वहीं 2010 के विधानसभा चुनावों में सतीश यादव को 64222 मत मिले थे और राबड़ी देवी को 51216 मत प्राप्त हुए थे। करीब 13 हजार मतों के अंतर से राबड़ी देवी को 2010 के विधानसभा चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा था। अगर 2015 की बात करें तो तेजस्वी यादव को 91236 तथा उनके विरोधी रही बीजेपी के प्रत्याशी सतीश कुमार यादव को 68503 मत मिले थे। तेजस्वी यादव में बड़े मार्जिन से जीत दर्ज की थी। लेकिन इन चुनावों की खास बात यह थी कि जेडीयू में 2015 में आरजेडी के साथ थी। जिसकी वजह से तेजस्वी को आसाना जीत मिली थी।

अब बदल गया है गणित

2010 में एनडीए की आंधी में राबड़ी देवी को तब जेडीयू के सिम्बल पर चुनाव लड़ रहे सतीश कुमार यादव के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। 2015 में सतीश कुमार यादव ने बीजेपी के सिम्बल पर चुनाव लड़ा था और उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। लेकिन अब गणित बदल चुका है। सतीश कुमार जेडीयू और बीजेपी दोनों के प्रत्याशी है। वो 2005 से ही चुनाव लड़ते रहे हैं । बेशक उन्हें दो बार हार का सामना करना पड़ा हो लेकिन वो अच्छी खासी तादाद में वोट लाते रहे हैं। ऐसे में 2020 में वो निश्चित तौर पर तेजस्वी यादव के लिए परेशानी खड़ी करेंगे। अगर बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन 2010 वाले प्रदर्शन को दोहरा देता है तो तेजस्वी यादव की सीट खतरे में पड़ सकती है।

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यादव बहुल इस विधानसभा क्षेत्र में गैरयादवों भूमिका महत्वपूर्ण होती है। माना जाता है कि उनका झुकाव जिधर होता है, जीत उसी की होती है। वहीं तेजस्वी ने यहां विजेता तय करने वाले राजपूत वोटरों को प्रभावित करने के लिए पूर्व सांसद रामा सिंह की पत्नी को बगल की महनार सीट से उम्मीदवार बनाया है।  लेकिन जिस तरह से बाबू रघुवंश प्रसाद का मुद्दा उछला था और उनकी चिट्ठियां वायरल हुई थी वो भी कहीं न कही आरजेडी उम्मीदवार तेजस्वी यादव के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।

 

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