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विश्लेषण- हार कर भी बिहार को एक नई दिशा दे गए तेजस्वी यादव

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नई दिल्ली – बिहार विधानसभा चुनावों का परिणाम आ गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को पूर्ण बहुमत से 3 सीटें अधिक मिली है। नीतीश कुमार के एक फिर बिहार का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। यह चुनाव कई मायनों में खास रहा है। नीतीश बिहार में बड़े भाई की भूमिका से छोटे भाई की भूमिका में आ गए हैं। बीजेपी सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट वाली पार्टी के तौर पर उभरी है। जबकि आरजेडी एक बार फिर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई। वहीं कांग्रेस आरजेडी पर बोझ साबित हुई है। लेकिन इन सबसे इतर जिस व्यक्ति की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वह हैं आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव…

तेजस्वी ने अपने दम पर बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए को नाकों के चने चबवा दिए हैं। देर रात तक भी स्थिति साफ नहीं हो पाई थी कि बिहार में किसी सरकार बनेगी। अंत में बाजी जरूर एनडीए के हाथ लगी,मगर चुनाव परिणामों को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे यह चुनाव आरजेडी और बीजेपी की मध्य था। बाकी सभी राजनैतिक दलों की भूमिका कहीं लुप्त सी हो गई थी।

तेजस्वी ने तय किया किन मुद्दों पर होगा चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव किन मुद्दों पर लड़ा जाएगा इसका निर्णायक तेजस्वी यादव रहें और फिर बिहार चुनावों की दिशा बदलने में सफल भी हुए। बिहार चुनाव विकास, नौकरी, रोजगार , स्वरोजगार आदि पर लड़ा गया। जैसे ही तेजस्वी यादव ने नौकरी संवाद शुरू किया अचानक से तेजस्वी की लोकप्रियता में बढ़ावा देखने को मिला। बीजेपी नीतीश कुमार के खिलाफ एंटीइन्कम्बैंसी के फैक्टर को पहले ही समझ गई थी इसलिए उनसे नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार द्वारा देशहित में लिए गए निर्णयों पर चुनाव लड़ने की कोशिश की । बीजेपी की समझदारी के चलते बिहार में एनडीए पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रहा है। वहीं अंतिम फेज में नीतीश कुमार द्वारा खेला गया इमोशनल कार्ड भी काम करता नजर आया ।

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तेजस्वी सेट कर गए हैं बिहार के मुद्दे

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बिहार चुनाव में प्रमुख मुद्दे बिहार का विकास ही रहा है। आगामी पांच सालों में बिहार की जनता को एनडीए सरकार के तरफ से विकास के मुद्दों पर जवाब देना है। नई नौकरी पैदा करनी होंगी । बिहार के लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की व्यापक योजना बनानी होगी। बिहार में इडस्ट्री क्लस्टरों का निर्माण करना होगा। कृषि आधारित विकास की व्यापक योजना बनानी होगी। सिंचाई व्यवस्था को सुदर्ढ करना होगा। औद्योगिक विकास पर ध्यान देना होगा। पलायन पर भी ध्यान देना होगा। सबसे बदहाल स्थिति शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के सुधार पर भी ध्यान देना होगा। ये ऐसे मुद्दे है जो तेजस्वी अपनी सभाओं में उठाते रहे हैं। इसलिए अब नीतीश कुमार को इन सभी मुद्दों से दो चार होना होगा।

 

नीतीश कुमार के सामने तेजस्वी के रूप में एक मजबूत विपक्ष नेता होगा। हालांकि तेजस्वी इन चुनावों से ही अपने पिता के जंगलराज वाली यादों से पीछा छुड़ा चुके है। अब नीतीश कुमार को आत्मविश्वास से लबरेज तेजस्वी यादव से भिड़ना होगा। इस चुनावों में बिहार की जनता ने भी साफ कर दिया है कि अगर आप विकास करेंगे तो जनता आपका साथ देगी। यह चुनाव विकास और जनता के मुद्दों पर लड़ा गया। बिहार ही नही देश के इतिहास में इस चुनाव के खास मायने रहेंगे।

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