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सिर्फ 12,768 वोट नहीं मिलने की वजह से मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए तेजस्वी

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पटना- बिहार के विधानसभा चुनाव बहुत दिलचस्प रहे। देर रात तक लोगों को पता नहीं लगा कि कौन सा दल बहुमत प्राप्त करेगा। अंत में बाजी एनडीए के हाथ जरुर लगी। लेकिन जिस तरह से तेजस्वी यादव ने यह चुनाव लड़ा उसके लिए लोग उनको याद करेंगे। दरअसल एनडीए को महागठबंधन से केवल 12,768 वोट अधिक मिलें हैं। इन्हीं वोटों ने दोनों दलों में 15 विधानसभा सीटों का फासला कर दिया। केवल 12,468 वोट अधिक मिलने की वजह से एनडीए 125 सीट जीत गया। वहीं महागठबंधन इतनी वोट कम मिलने की वजह 110 सीटों पर अटक गया और तेजस्वी यादव के हाथों से सत्ता फिसल गई।  2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में 1,57,01,226 मतदाताओं ने एनडीए को पसंद किया जबकि महागठबंधन के खाते में 1,56,88,458 वोट आए। हालांकि, दोनों गठबंधनों के बीच 15 सीटों का अंतर आ गया। एनडीए 125 सीटें लेकर सत्ता के लिए जरूरी 122 सीटों का जादुई आंकड़ा पार कर लिया जबकि 110 सीटें हासिल कर महागठबंधन सिर्फ 12 सीटों से पिछड़ गया। इस तरह बिहार के सिर्फ 12,768 मतदाताओं ने तेजस्वी यादव को अगला मुख्यमंत्री बनने से रोक दिया।

कांग्रेस की हालत ने तेजस्वी को कर दिया सत्ता से दूर

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अगर 2015 के मुकाबले 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी-दर-पार्टी स्ट्राइक रेट में आए अंतर की बात करें तो इस मोर्चे पर वामदल टॉप पर है। वामदलों ने इस बार के विधानसभा चुनाव में अपना स्ट्राइक रेट 50.9% बढ़ाया। वहीं, कांग्रेस स्ट्राइक रेट में गिरावट के मामलें अव्वल रही। उसका स्ट्राइक रेट पिछले चुनाव के मुकाबले 38.8% कम रहा। उसके बाद जेडीयू का स्ट्राइक रेट 32.8% और आरजेडी का 26.4% गिरा। बीजेपी ने पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार अपना स्ट्राइक रेट 32.6% बढ़ा लिया।

 

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