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अमित शाह की तमिलनाडु यात्रा कई मायनों में हैं खास , दक्षिण भारत में चाहते हैं भाजपा की पहुंच

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नई दिल्ली-  भाजपा के चाणक्य अमित शाह दो दिवसीय तमिलनाडु के दौरे पर हैं। वैसे  तो इस दौरे का मकसद तमिलनाडु में कई विकास के प्रोजेक्टों का उद्घाटन करना है। लेकिन अमित शाह साथ ही राज्य सियासत की नब्ज टटोलने गए हैं। वहां उनकी मुलाकात डीएमके के नेता अलागिरी के साथ हो सकती है। अलागिरी करूणानिधि के बेटे हैं। साथ ही उनकी मुलाकात रजनीकांत से भी हो सकती है। क्योंकि रजनीकांत की भी राजनैतिक इच्छाएं हैं। इसके अलावा अमित शाह भाजपा के स्थानीय नेताओं से मुलाकात करके पता करेंगे कि तमिलनाडु भी भूमि भाजपा की राजनीति के लिए कितनी उर्वरा हो सकती है।

अमित शाह, चेन्नई, AIADMK

पहले भाजपा की यात्रा का विरोध करी थी AIADMK अब नेता पहुंचे अमित शाह के स्वागत में

तमिलनाडु में जिस AIADMK के नेता भाजपा की ‘वेल यात्रा’ का विरोध कर रहे थे और सरकार इसकी अनुमति नहीं दे रही थी, उसी पार्टी के नेताओं ने चेन्नई एयरपोर्ट पर पहुँचकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का स्वागत किया। शनिवार (नवंबर 21, 2020) की दोपहर के बाद से ही मीनामबक्कम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाहर सरगर्मी तेज़ हो गई थी और इसके साथ ही पूरे तमिलनाडु में भी अमित शाह के आगमन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

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अमित शाह का ये दौरा यूँ तो कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए है, लेकिन इस दौरान वो राज्य की राजनीतिक हालात का भी जायजा लेंगे। भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ कई दौर की बैठकों के अलावा वो NDA की अपनी सहयोगी पार्टी AIADMK के बड़े नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। मई 2021 में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा चाहती है कि वो इस बार बड़ी ताकत बनकर उभरे।

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एम के अलागिरी-फाइल फोटो
एम के अलागिरी-फाइल फोटो

एम के अलागिरी के साथ मुलाकात कर सकते हैं अमित शाह, डीएमके को सत्ता से बाहर रखने के लिए अलागिरी का साथ जरुरी

अलागिरी जब डीएमके में थे तो दक्षिण जोन की कमान उनके हाथ में थी लेकिन वह पिछले छह साल से राजनीतिक पटल से दूर हैं। हालांकि बीजेपी ने 2021 के विधानसभा चुनावों में डीएमके को हराने का जो टारगेट रखा है, उसमें अलागिरी उसके काम आ सकते हैं। अलागिरी की मदुरै वाले इलाके में पकड़ है। स्‍टालिन के सामने अलागिरी सबसे तगड़ी चुनौती दक्षिणी तमिलनाडु में ही पेश कर सकते हैं। वहां पर बीजेपी का साथ मिलने से अलागिरी की ताकत और बढ़ सकती है। अब यह देखने वाली बात होगी कि अलागिरी अपने दम पर कितने वोट जुटा पाते हैं या डीएमके के कितने वोट काट पाते हैं। बीजेपी शायद उन्‍हें दक्षिणी तमिलनाडु में फायदेमंद मानकर चल रही है तभी गठबंधन को लेकर बातचीत इतनी आगे बढ़ी है। तमिलनाडु में हर पांच साल में सत्‍ता डीएमके या AIADMK के बीच बदलती रहती है, यानी राजनीतिक उठापटक कभी थमती नहीं। ऐसे में बीजेपी अलागिरी को साथ लेकर एक तीसरा मोर्चा खड़ा करना चाहती है।

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