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भारत में इस जगह आते हैं एलियंस, सरकार छुपाती रही है जानकारी

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नई दिल्ली- जब से अमेरिका के यूटा प्रांत में एक चांदी के रंग का खम्भा (मोनोलिथ) नजर आया है तब से दुनिया में एलियंस की उपस्थिति पर लगातार चर्चा हो रही है। अब तब ऐसा मोनोलिथ दुनिया में चार जगह नजर आ चुका है। अब अमेरिका का कोलम्बिया  के ग्रामीण क्षेत्र में सोने का बना मोनोलिथ नजर आया है। अब लोगों को डर सता रहा है कि इन मोनोलिथ को एलियन लगा रहे हैं। अमेरिका का लोगों का मानना है कि सोने का मोनोलिथ बाकी चार अन्य खम्भों को नियंत्रित करता है। ऐसे में जब पूरी दुनिया एलियंस लाइफ की चर्चा हो रही है तो आज हम आपको भारत में एक ऐसी एलियन साइट के बारे में बता रहे हैं जहां एलियंस के देखे जाने की खबरें लगातार आती है। इतना ही नहीं गूगल भी यहां यूएफओ आने की बात मान चुका है। गूगल की अर्थ इमेजरी ने यहां से यूएफओ कैप्चर किए हैं।

कोंग्का ला यूएफओ एलियन 2
कोंग्का ला

कोंग्का ला भारत में एलियन साइट

कोंग्का ला, एक ऐसी जगह जहां पर कई बार एलियंस के दिखाई देने की बात कही जा चुकी है। कोंग्का ला में ला शब्द का मतलब होता है तिब्बती भाषा में दर्रा होता है। यह एक पहाड़ी दर्रा है जो लद्दाख क्षेत्र में स्थित है। बता दें कि इस दर्रा पर काफी विवाद छिड़ा हुआ है। दरअसल, भारत का दावा है कि ये उसकी सीमा में आता है, जबकि चीन का कहना है कि ये उसकी सीमा में आता है। इसे लेकर ही साल 1959 में भारत के सैन्य दस्ते पर दर्रे के पास मौजूद चीनी सैनिकों ने हमला बोल दिया था। ये हमला भारत-चीन युद्ध की शुरुआत से पहले ही बोला गया था। इसमें 10 भारतीयों ने अपनी जान गंवाई थी। जबकि 7 भारतीय सैनिकों को चीन ने गिरफ्तार कर लिया था। इस हमले के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम हो गया। बता दें कि चीन द्वारा किए गए इस हमले ने भी दोनों देशों के बीच हुए युद्ध में एक अहम भूमिका निभाई।

कोंग्का ला यूएफओ एलियन

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लगातार एलियन यान दिखते हैं यहां

कोंग्का ला एक नो मेंस लैंड हैं इस जगह पर हर साल कई बार उड़न तश्तरी जैसी चीजें दिखाई देती हैं। लेकिन इस क्षेत्र के पूरी तरह से नो-मेन्स लैंड से बने होने के कारण और इसके चारों तरफ से दुर्गम पहाड़ों से घिरे होने के चलते साइंटिस्ट्स भी अब तक इस बात की पुष्टि नहीं कर पाए हैं कि इन बातों में कितनी सच्चाई है और कितनी नहीं। यहां पर UFO (Unidentified flying object) जुड़ी कई घटनाएं दर्ज की गई हैं। जैसे साल 2004 में यहां पर कुछ भारतीय भूविज्ञानी खोज कर रहे थे। इसी दौरान वहां पर रोबोट जैसे स्ट्रक्चर का कुछ दिखा था, जो कि पहाड़ों पर चल रहा था। जब वैज्ञानिक उसे देख वहां पहुंचे तो वो गायब हो गया। जून 2006 में गूगल सेटेलाइट ने यूअफओ की तस्वीर जारी की। इस तस्वीर में यूअफओ को साफ़ देखा जा सकता है

सेना ने भी देखी हैं यूएफओ

वहीं साल 2012 में इंडियन आर्मी ने पैंगोंग त्सो के ऊपर एक रिबननुमा ऑब्जेक्ट को उड़ते हुए देखा था। इसे अच्छे से समझने के लिए सेना ने जब रडार का इस्तेमाल किया तो वह वहां से दिखना बंद हो गया। जबकि पहले खुली आंखों से भी वह दिखाई दे रहा था। साथ ही गूगल अर्थ की इमेजरी में भी कोंग्का दर्रा के आसमान में कई बार अजीब चीज दिखाई दी है। अभी तक यहां यूएफओ आते हैं इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन एलियन एग्जिस्टेंस पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यहां एलियन आते हैं और भारत सरकार को इसकी जानकारी भी है। लेकिन भारत सरकार इस जानकारी को छिपाती रही है। जहां जहां एलियन आते हैं उन सभी देशों की सरकार को जानकारी है लेकिन वह भी कभी इसे खुल कर स्वीकार नहीं करते हैं।

स्थानीय लोग स्वीकारते हैं कि यहां हर महीने एलियन आते हैं

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ सिद्ध पुरुष कोंगका ला दर्रा पर जाते हैं। जहां उन्हें उड़न तश्तरी देखने को मिलता है। अगर कोई व्यक्ति उड़न तश्तरी देखना चाहता है तो कोंगका ला दर्रा में इसे देख सकता है क्योंकि इस जगह पर हर महीने एलियंस आते हैं। लोगों की आवाजाही कम होने की वजह से एलियंस अपनी उड़न तस्तरी लेकर कोंगका ला दर्रा आते-जाते रहते हैं। विज्ञान अब तक उड़न तश्तरी की पहेली को सुलझा नहीं पाया है।

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