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अमेरिका – सत्ता हस्तांतरण के बीच वाशिंगटन डीसी में हिंसक बवाल,कर्फ्यू के बाद 15 दिनों की इमर्जेंसी लगी, अब तक क्या क्या हुआ, जानिए

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वाशिंगटन – अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने कैपिटल बिल्डिंग में घुसकर हंगामा कर दिया। दरअसल14 दिसंबर को जिस सील बैलेट बॉक्स में सर्टिफिकेट भेजे गए थे वो छह जनवरी को कांग्रेस में लाया गया था। कांग्रेस में इलेक्टोरल वोटों की गिनती उस दौरान रोक दी गई जब डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक दंगा करने की नियत से कैपिटल बिल्डिंग में दाखिल हुए।

कैपिटल पुलिस ने ट्रंप समर्थक प्रदर्शनकारियों को अंदर घुसने से रोकने की तमाम कोशिशें की लेकिन हमलावर नहीं माने और और पुलिस- हमलावरों की अफरातफरी हिंसा में बदल गई।

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बाद में एक सीनेटर ने ट्वीट करके बताया कि स्टाफ के कुछ लोगों ने इस अफरातफरी के बीच बैलेट बॉक्स को किसी तरह वहां से बाहर निकाल लिया। भारतीय समयानुसार यह घटना करीब 3:26 AM , 7 जनवरी की हैं।

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हिंसक घटना के कुछ देर बाद खबर आई कि पुलिस के जवाबी कार्रवाई में एक महिला की मौत हो गई हैं। शुरूआत में महिला की पहचान नही हो पाई, लेकिन बाद में पता चला कि वह ट्रंप समर्थक गुट की महिला थी। गोली लगने के बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन वह बूरी तरह घायल थी औऱ रास्ते में ही मौत हो गई।

घटना के दो घंटे बाद भी हिंसा नही रूकी। वॉशिंगटन डीसी मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने बताया कि हमलावरों के पास से पांच बंदूकें छिनी गई की गई हैं, जिनमें हैंडगन और लॉन्ग गन भी शामिल हैं। पुलिस चीफ़ रॉबर्ट कॉन्टी ने मीडिया को बताया कि गिरफ़्तार किए गए लोग डीसी एरिया से बाहर के रहने वाले थे, साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि घटना में जख़्मी अधिकारियों का इलाज किया जा रहा है। शहर में स्थानीय समयानुसार शाम छह बजे से कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।

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इस घटना 4 घंटे बाद अमेरिकी कांग्रेस में हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने ऐलान किया कि बुधवार रात को सदन चलेगा। स्पीकर ने बताया कि ”डेमोक्रेट नेताओं के साथ विचार करने और पेंटागन, न्याय विभाग और उपराष्ट्रपति से बातचीत के बाद हमने तय किया है कि कैपिटल के पूरी तरह साफ़ होने और इस्तेमाल के लिए तैयार होने पर हम आज रात प्रक्रिया पूरी करेंगे।

घटना के करीब साढ़े चार घंटे बाद नेशनल गार्ड्स के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि डीसी सेना और एयर नेशनल गार्ड्स के क़रीब 2,700 सैनिक वाशिंगटन में तैनात किये गए हैं। इनके अलावा वर्जीनिया से भी 650 सैनिकों को बुलाया गया है।

हिंसा के ख़िलाफ़ खुलकर बोले उप-राष्ट्रपति माइक पेंस

इस बीच अमेरिकी उप-राष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा है कि ‘यह अमेरिकी इतिहास में एक काला दिन है।’उन्होंने कैपिटल हिंसा की निंदा की है और इसमें हुई मौत पर अफ़सोस ज़ाहिर किया है। ट्विटर पर माइक पेंस ने लिखा है कि “हम उन लोगों के आभारी रहेंगे जिन्होंने इस ऐतिहासिक जगह को बचाने के लिए अपनी जगह नहीं छोड़ी।

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बता दें कि अमेरिकी कांग्रेस में बोलते हुए उप राष्ट्रपति पेंस ने कहा, “जिन लोगों ने भी कैपिटल में कहर बरपाने की कोशिश की, वो जीत नहीं सकते। हिंसा कभी नहीं जीत सकती। जीत स्वतंत्रता की ही होती है। यह सदन जनता और उनके प्रतिनिधियों का है। आज जब हम इस सदन से बोल रहे हैं, तो दुनिया फिर से अभूतपूर्व हिंसा और बर्बरता के बीच, हमारे लोकतंत्र के लचीलेपन और उसकी ताक़त की गवाह बनेगी।”

हिंसा के दौरान एक ट्वीट में पेंस ने लिखा था, “शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करना हर अमेरिकी नागरिक का अधिकार है, लेकिन यूएस कैपिटल पर हमले को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. जो भी इसमें शामिल हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी।”

माइक पेंस के ये बयान ऐसे समय में आये हैं, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन पर जो बाइडन को जीत का सर्टिफ़िकेट ना देने का दबाव बना रहे हैं।

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भारतीय समयानुसार 10:50AM वॉशिंगटन की मेयर म्यूरियल बाउसर ने कैपिटल हिल के प्रदर्शनों को लेकर प्रेस कॉन्फ़्रेंस की है।उन्होंने बताया कि जिस महिला को गोली लगी है, वह उस ग्रुप का हिस्सा थी जो हाउस रूम में ज़बरदस्ती घुसने की कोशिश कर रहे थे और उस वक़्त सत्र भी चल रहा था।सादी वर्दी पहने अफ़सरों ने उन्हें रोकने की कोशिश की और एक अफ़सर ने हथियार निकाल कर फायर कर दिया।महिला को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

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उनके पहचान पत्र अथॉरिटी के पास हैं जब तक कि उनके किसी रिश्तेदार को बताया नहीं जाता। बाउसर ने बताया कि कैपिटल ग्राउंड में हुई तीन अन्य मौतों में से एक वयस्क महिला थी और दो पुरूष। मेयर ने बताया कि मेट्रो पुलिस विभाग के 14 लोग घायल हुए हैं. दो लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उनमें से एक को भीड़ में खींचे जाने की वजह से गंभीर चोटें आई हैं और दूसरे व्यक्ति के चेहरे पर ज़ोर से कुछ मारा गया है।

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वॉशिंगटन में 15 दिन के लिए इमर्जेंसी लगी

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में मेयर ने 15 दिन के लिए पब्लिक इमर्जेंसी लगा दी है।

मेयर म्यूरियल बॉउसर ने कहा, “कई लोग शहर में हथियारों के साथ हिंसा और तोड़फोड़ के मक़सद से आए और उन्होंने हिंसा व तोड़फोड़ की. उन्होंने केमिकल छोड़े, ईंटें, बोतलें मारी, बंदूकें भी चलाईं।”उन्होंने कहा, “उनकी हरकतें अब भी जारी है।”

इस फ़ैसले के बाद शहर में लोगों की सुरक्षा के लिए ज़्यादा संसाधन इस्तेमाल किए जा सकेंगे जैसे कर्फ़्यू, इमर्जेंसी सर्विस बढ़ाना और ज़रूरत की चीज़ें बाँटना। ये आदेश 21 जनवरी दोपहर तीन बजे तक लागू रहेगा यानी जो बाइडन के शपथ ग्रहण के एक दिन बाद तक.

शहर में पहले ही कर्फ़्यू लगा हुआ है जिसे मेयर ने बुधवार शाम छह बजे से लागू किया था।दर्जनों लोगों को आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ़्तार किया जा चुका है।

मोदी समेत दुनिया के कई नेता ने की निंदा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हिंसा पर कड़ी निंदा करते हुए ट्वीट किया कि “वॉशिंगटन डीसी में दंगों और हिंसा की ख़बर देखकर परेशान हूँ। सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण ढंग से होना चाहिए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को किसी ग़ैर-क़ानूनी विरोध के ज़रिये बिगड़ने नहीं दिया जा सकता।

बता दें कि इस हिंसा के कारण अमेरिकी कांग्रेस में होने वाले संयुक्त सत्र को टालना पड़ा है। इस सत्र में जो बाइडन को उनकी चुनावी जीत का सर्टिफ़िकेट दिया जाना था।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस हिंसा की निंदा की है. उन्होंने कहा, “अमेरिका पूरी दुनिया में लोकतंत्र की एक मिसाल रहा है।इसलिए यह ज़रूरी है कि सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण ढंग से हो।

स्पेन के पीएम पेड्रो सेंचेज़ ने कहा है, “मुझे अमेरिका के लोकतंत्र की ताक़त पर विश्वास है। नए राष्ट्रपति जो बाइडन देश को इस तनावपूर्ण माहौल से बाहर लेकर जाएंगे और अमेरिकी नागरिकों को एकजुट करेंगे।

इस खबर को अपडेट किया जा रहा हैं…..

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