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बिहार – भाजपा ने कपट कर खेल बिगाड़ा! अब होगी जदयू की बारी, पढ़े पूरा विश्लेषण

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बिहार – बिहार में जनता दल यूनाईटेड ऐतिहासिक बूरे दौर से गुजर रही हैं। विधानसभा चुनाव 2020 में खराब प्रदर्शन के कारण पार्टी नेताओं का आत्मविश्वास डगमगा सा गया हैं। इन सब के बीच जनता दल यूनाईटेड ने शनिवार को प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक की। इस बैठक हारे और जीते सभी उम्मीदवार पहुंचे थे। बैठक के बीच नीतीश कुमार ने एनडीए के तरफ से चुनाव में चले गए रणनीति को लेकर बड़ा खुलासा किया हैं।

नीतीश कुमार ने 2 दिनों तक चलने वाले प्रदेश कार्यकारिणी के पहले दिन बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव के वक्त उन्हें पता ही नहीं चला कि उनका दोस्त कौन है और दुश्मन कौन?

राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि नीतीश कुमार का यह बयान सहयोगी दल बीजेपी को लेकर दिया गया है, क्योंकि बैठक में चुनाव हारने वाले कई जेडीयू प्रत्याशियों ने इस बात का जिक्र किया कि उनकी हार लोक जनशक्ति पार्टी की वजह से नहीं बल्कि बीजेपी की वजह से हुई है।

जानकारी के मुताबिक, बैठक में जिन जेडीयू नेताओं ने उन्हें चुनाव में मिली हार के लिए बीजेपी के चाल पर सवाल उठाया उनमें चंद्रिका राय, बोगो सिंह, जय कुमार सिंह, ललन पासवान, अरुण मांझी और आसमां परवीन शामिल हैं। इन नेताओं ने साफ कहा कि चुनाव में उनकी हार लोक जनशक्ति पार्टी की वजह से नहीं बल्कि बीजेपी की वजह से हुई है।

बोगो सिंह ने खुलकर सब कुछ कहा

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मटिहानी विधानसभा से जदयू प्रत्यासी रहे बोगो सिंह ने यहां तक कह दिया कि पूरे चुनाव में एक ही नारा चारों तरफ गुंज रहा था कि एलजेपी – बीजेपी भाई भाई। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इसका भारी नुकसान जनता दल यूनाईटेड को भुगतना पड़ा। जो बात सच है उसे उठाना बेहद जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि जेडीयू को हराने में एलजेपी से ज्यादा जिम्मेदार बीजेपी है।एलजेपी का कोई वजूद ही नहीं है। वह तो पूरी प्लानिंग के तहत काम हुआ। बीजेपी के वोटर ने मुझे वोट नहीं दिया।

आपको बात दें कि नीतीश कुमार और पार्टी अध्यक्ष आरसीपी सिंह इस दौरान बेहद शांत होकर सबकी बातों को सुन रहे थे।

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 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार चुनाव से 5 महीने पहले ही राजग में सभी विषयों पर बात हो जानी चाहिए थी, मगर ऐसा नहीं हुआ। नीतीश कुमार ने कहा कि जनता दल यूनाइटेड के बिहार में 45 लाख सदस्य हैं, मगर इसके बावजूद भी चुनाव के वक्त जमीनी स्तर तक पार्टी की बातें नहीं पहुंच पाई जिसकी वजह से पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. नीतीश ने इस बात को लेकर भी निराशा जताई कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में बिहार के लिए जो काम किया है उसे वह जनता तक नहीं पहुंचा सके।

अब सवाल ये है कि जनता दल यूनाईटेड कब तक ऐसे कपटी मित्र के साथ सरकार चलाएगी या फिर उसका जवाब देने के लिए कोई रास्ता अख्तियार करने की रणनीति बन रही हैं।

जनता दल यूनाईटेड की अगामी प्लान की सुगबुगाहट कई हफ्ते पहले से शुरू हो चुकी हैं। बस मौके की तलाश है चौका मारने के लिए । बता दें कि हाल ही जदयू ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की, और इस बैठक का कारण भी बीजेपी ही रहा।

मालूम हो कि अरूणाचल प्रदेश में बीजेपी ने सरेआम जदयू के विधायक को तोड़कर अरूणाचल में वजूद खत्म किया जिसके बाद से जदयू को सब कुछ समझ में आने लग गया था कि बीजेपी उनकी सियासी जमीं पर डाका डालने में लगा हुआ हैं। और यही कारण रहा कि पार्टी ने आनन फानन में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई और इस बैठक में सर्वसम्मति से फैसला किया गया कि अब नई सोच और नई रणनीति को हवा देने के लिए नेतृत्व में बदलाव किया जाना चाहिए, और नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह के नाम को राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए आगे किया और सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

जनता दल यूनाईटेड कर सकता है बड़ा फैसला

आऱसीपी सिंह के नए अध्यक्ष के तौर पर चुना जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले कुछ हफ्तों में पार्टी कोई बड़ा फैसला कर सकती हैं। जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि फैसले तो अब भी नीतीश ही लेंगे लेकिन सिर्फ मुहर RCP सिंह के नाम की होगी। माना जा रहा है कि बिहार विधानसभा में सीटों के मामले में BJP के बड़े भाई की भूमिका में आने से नीतीश असहज थे। लेकिन वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में अगर वो कोई कड़ा फैसला लेते तो उनपर बतौर मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के चलते गठबंधन धर्म की मर्यादा का सवाल उठ सकता था। इसीलिए नीतीश ने आरसीपी सिंह के नाम ये मास्टर स्ट्रोक खेल दिया।

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