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किसान नेता बोले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी में कृषि कानून के समर्थक, आंदोलन जारी रहेगा

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नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि बिलों पर लगाई गई रोक के बावजूद किसान अभी भी अपने आंदोलन को स्थगित करने के लिए तैयार नहीं हैं।लेकिन इस बीच किसान संगठनों ने कमेटी को लेकर असहमति जताई है। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि देश के किसान कोर्ट के फैसले से निराश हैं। अशोक गुलाटी की अध्यक्षता में कमेटी ने सिफारिश की थी। गुलाटी ने ही कृषि कानूनों की सिफारिश की थी।

आंदोलन जारी रहेगा -राजेवाल

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किसान नेता राजेवाल ने सिंघु बॉर्डर पर प्रेस कांफ्रेस कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी का हमने कल ही विरोध कर दिया और हमारा आंदोलन सरकार के साथ चलता रहेगा। सभी कमेटी सदस्य सरकार के पक्ष में हैं। लेख लिख-लिखकर कमेटी सदस्यों ने कानूनों को जस्टिफाई किया है। आज हमने पंजाब किसान संगठनों के साथ बैठक की कल हम पूरे संयुक्त किसान मोर्चे की बैठक करेंगे। सोमवार को हमने प्रेस नोट में बताया था कि अगर सुप्रीम कोर्ट कोई कमेटी बनाएगा तो हमें मंजूर नहीं है। हमें लगता है कि जो सरकार नहीं कर पाई वो सुप्रीम कोर्ट के जरिए करा रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के सारे सदस्य सरकार को सही ठहराते रहे हैं। ये लोग प्रेस में लेख लिखकर कानूनों को सही ठहराते रहे हैं तो ऐसी कमेटी के सामने क्या बोलें। हमारा ये आंदोलन चलता रहेगा।

26 जनवरी को एतिहासिक होगा किसानों का कार्यक्रम

26 जनवरी को लेकर नोटिस जारी किया गया है…लेकिन हमारा प्रोग्राम ऐतिहासिक होगा। कल को ये कमिटी के लोग बदल भी दें तो भी हम कमेटी के सामने नहीं जाएंगे । हमारा ये संघर्ष अनिश्चितकालीन है। हम शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन चलाते रहेंगे। हमारा 26 जनवरी का मार्च ऐतिहासिक होगा।

कमेटी के लोग कृषि बिलों के समर्थक-टिकैट

किसान नेता और बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि कमेटी में शामिल सभी लोग बाजारवाद और पूंजीवाद के समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि इन्होंने ही तो कृषि सुधार के लिए इस तरह के कानून लाने की सिफराशि सरकार से की थी तो इनसे किसानों के हित में सोचने की क्या उम्मीद की जा सकती है। बीकेयू प्रवक्ता ने कहा, “अशोक गुलाटी कौन हैं? बिलों (कृषि विधेयकों) की सिफारिश इन्होंने ही कही थी। भूपेंदर सिंह मान पंजाब से हैं। अमेरिकन मल्टिनैशनल जो है, शरद जोशी तो उन्हीं के साथ काम करते थे। महाराष्ट्र शेतकारी संगठन के लोग हैं, एक ही तो विचारधार है जो बाजार के, पूंजीवाद के पक्षधर हैं।”

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