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बड़ी खबर- सरकार दो साल के लिए कृषि कानून को टालने के लिए राजी

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नई दिल्ली- सरकार और किसानों के बीच 10वें दौर की बातचीत में कुछ हल निकलने की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार ने किसानों के सामने दो प्रस्ताव रखे हैं। केंद्र सरकार ने किसानों से कहा है कि दो साल तक कृषि कानूनों को निलंबित किया जाएगा और MSP पर बातचीत के लिए नई कमेटी का गठन किया जाएगा। किसान कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए है।

 किसान नेता दर्शन पाल सिंह बैठक में 3 कानूनों और MSP पर बात हुई। सरकार ने कहा हम 3 कानूनों का एफिडेविट बनाकर सुप्रीम कोर्ट को देंगे और हम 1-1.5 साल के लिए रोक लगा देंगे। एक कमेटी बनेगी जो 3 क़ानूनों और MSP का भविष्य तय करेगी। हमने कहा हम इस पर विचार करेंगे।

विज्ञान भवन में जब कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 40 किसान संगठनों के नेताओं से बातचीत शुरू हुई  तो किसानों ने केवल कानून वापसी की ही मांग उठाई। लंच के दौरान किसानों ने कहा कि सरकार हमारी प्रमुख मांगों पर कोई बातचीत नहीं कर रही है। MSP को लेकर हमने चर्चा की बात कही तो केंद्र ने कानूनों का मुद्दा छेड़ दिया।

NIA के नोटिस भेजने का विरोध किसान संगठनों ने किया

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किसान नेताओं ने आंदोलन से जुड़े लोगों को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की तरफ से नोटिस भेजने का भी विरोध किया। किसान संगठनों के नेताओं ने बातचीत में कहा कि NIA का इस्तेमाल किसानों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि अगर ऐसा कोई बेगुनाह किसान आपको दिख रहा है तो आप लिस्ट दीजिए, केंद्र सरकार इस मामले को प्रायोरिटी पर रख कर देखेगी।

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सुप्रीम कोर्ट के कमेटी कल करेगी पहली बैठक

कृषि कानूनों के मुद्दे पर समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाई गई कमेटी के 3 सदस्यों ने मंगलवार को दिल्ली में पहली बैठक आयोजित की। कमेटी के मुताबिक 21 जनवरी को समिति किसान संगठनों के साथ बैठक करेगी। जो किसान नहीं आएंगे, उनसे मिलने भी जाएंगे। ऑनलाइन सुझाव लेने के लिए पोर्टल बनाया गया है। 15 मार्च तक किसानों के सुझाव लिए जाएंगे।

किसानों संगठनों की सदस्य बदलने की मांग पर आज सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सदस्य की पहली की राय को मद्देनजर रखते हुए उसे कमेटी में शामिल होने के अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।

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