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खत्म होने के कगार पर पहुंचे किसान आंदोलन में राकेश टिकैत के आंसुओं ने फूंकी जान, वेस्ट यूपी से दिल्ली की तरफ उमड रहा है किसान का रैला

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नई दिल्ली- 26 जनवरी को जो देश ने देखा उसके बाद किसान नेता बैकफुट पर थे। कई किसान संगठनों ने अपने अपने आंदोलन वापस भी ले लिए थे। और कई संगठन वापस लेने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन 28 जनवरी को जो हुआ उसने दोबारा से किसान आंदोलन में जान फूंक दी। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने भी आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी थी। लेकिन राकेश टिकैत के आंसुओं ने आंदोलन में जान फूंक की। राकेश टिकैत को रोता देख जाट लैंड सन्न रह गया। जिस आंदोलन को जबरदस्ती खत्म कराने की घोषणा हो चुकी थी उसके बाद पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश से जो समर्थन मिलने लगा उससे यूपी सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।

कहां गलती कर गई बीजेपी

राकेश टिकैत के अनुसार जब आंदोलन को खत्म कराने के लिए जनता के रूप में बीजेपी के स्थानीय कार्यकर्ता पहुंचे तो राकेश टिकैत के आंसु निकल गए। यहीं से पूरे देश में संदेश गया कि राकेश टिकैत को प्रताड़ित किया जा सकता है। उसके बाद उनके भाई नरेश टिकैत ने पश्चिम यूपी के मुजफ्फरनगर में महापंचायत करने का ऐलान कर दिया जिसके बाद सरकार को लगा कि स्थिति अब नाजुक हो सकती है।

मुजफ्फरनगर में की महापंचायत में फैसला

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गाजियाबाद में गाजीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत की सिसकी के बाद मुजफ्फरनगर में माहौल गरमा गया। किसानों के मसीहा माने जाने वाले महेंद्र सिंह टिकैत की जन्मस्थली सिसौली को किसानों की राजधानी कहा जाता है। गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन के समर्थन में अब मुजफ्फरनगर में महापंचायत दोपहर 12 बजे से शुरू हो गई थी । राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में हो रही महापंचायत में सुबह से ही किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर पहुंचने लगे थे। दोपहर होते-होते किसानों का रेला उमड़ पड़ा। इस बीच आरएलडी नेता जयंत चौधरी भी महापंचायत में पहुंच गए हैं। खबर है कि महापंचायत खत्म होने के बाद गाजीपुर बॉर्डर कूच करने की तैयारी है। महापंचायत में फैसला किया गया है कि किसान पैदलमार्च करके दिल्ली की तरफ रूख करेंगे।

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जयंत बोले मुकाबला उनसे हैं जो गलती नहीं मानते

जयंत चौधरी ने गुलाम मोहम्मद जौला, नरेश टिकैत से गले मिलकर संबोधन शुरू किया। कहा, मेरा जी रो रहा है। चौधरी चरण सिंह और चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत भावुक थे। अब सब पुरानी बात को भूल जाओ। आप पहले चूके अब गलती मान लो। हमें आगे नहीं चूकना है। आज अस्तित्व की लड़ाई है। हमारा मुकाबला उन लोगों से है जो गलती नहीं मानते। 26 जनवरी हो गई आज तक गन्ने का भाव तय नहीं हुआ। पंचायत का फैसला होना चाहिए। मेरा सुझाव है कि आपको गांव साथ लेना होगा।

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