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जेडीयू – बीजेपी में फिर दिखा टकराव, जानिए क्यों हो रही हैं मंत्रिमंडल विस्तार में देरी, बिहार के सियासत में बहुत कुछ है बाकी..

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पटना – बिहार विधानसभा चुनाव को सम्पन्न लगभग 3 महीने होने वाले है लेकिन अब तक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर किसी तरह की कोई सुगबुगाहट नही दिख रही है। ऐसे में सवाल है कि नई सरकार के गठन के बाद भी आखिर किन कारणों से मंत्रिमंडल का विस्तार नही हो पा रहा है।

आइये जानते है कि मौजूदा सत्ता किन परिस्थितियों से गुजर रही है, और क्यों हो रही है मंत्री मंडल विस्तार में देरी?

इससे पहले हम आपको बता दें कि वर्तमान में विभागों का बटवारां किस प्रकार किया गया हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ( जेडीयू) के पास पांच विभाग हैं। वहीं उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ( बीजेपी) के पास 6 विभाग हैं। उप मुख्यमंत्री रेणु देवी ( बीजेपी) के पास 3 विभाग हैं। श्री विजय कुमार चौधरी ( जेडीयू ) के पास 5 विभाग हैं। श्री विजेन्द्र प्रसाद यादव ( जेडीयू ) पास 4 विभाग हैं। श्री जिवेश कुमार ( बीजेपी) के पास 3 विभाग, राम सुरत राय ( बीजेपी) के पास 2 विभाग, रामप्रीत पासवान( बीजेपी) के पास 1 विभाग, अमरेंद्र प्रताप सिंह(बीजेपी) के पास 3 विभाग, मंगल पांडे (बीजेपी) के पास 3 विभाग, अशोक चौधरी ( जेडीयू ) के पास 5 विभाग, श्री मति शीला कुमारी( जेडीयू) के पास परिवहन विभाग हैं। संतोष कुमार सुमन( हम) के पास 2 विभाग हैं और वीआईपी अध्यक्ष मुकेश सहनी के पास 1 विभाग हैं।

उपरोक्त पूरी लिस्ट को देखते हुए हम कह सकते हैं कि एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के पास कुल 20 विभाग हैं। वहीं दूसरे नम्बर की पार्टी जेडीयू के पास भी 20 विभाग हैं। इसके अलावा हम पार्टी के पास 2 विभाग हैं। औऱ मुकेश सहनी के पास 1 विभाग हैं। अब सवाल है कि जब मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा तो इस विभागों को कैसे फिर से बांटा जाएगा।

जेडीयू की मांग 50-50 का हो बंटवारा

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सूत्रों के मुताबिक जेडीयू मंत्रिमंडल में बीजेपी के साथ 50 -50 का बंटवारा चाहती हैं। वर्तमान में भी विभागों का बंटवारा इसी आधार पर हैं। लेकिन बीजेपी को यह नामंजूर हैं। यही कारण है कि बीजेपी के सुशील मोदी समेत कई दिग्गज नेता दिल्ली में लगातार बैठक कर रहे हैं। इस बीच जेडीयू अपना पक्ष और मजबूत करने के लिए बसपा के एक मात्र विधायक को भी अपने पाले में खींच लिया हैं वहीं एआईएमआईएम के पांचों विधायक भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर चुके है। चर्चा है कि जल्द ही शुभ मुहुर्त में एआईएमआईएम के पांचों विधायक भी जेडीयू का दामन थाम लेंगे

टूट सकते है कांग्रेस के विधायक

दूसरी तरफ अटकलें यह भी हैं कि कांग्रेस के करीब 15 विधायक जेडीयू के संपर्क में हैं। अगर इन विधायकों का जेडीयू के साथ जाना हुआ तो बीजेपी पर दवाब बनना तय हो जाएगा। लेकिन सौ बात की एक बात यह है कि मंत्रिमंडल विस्तार में देर इसलिए हो रही है कि बीजेपी 50-50 नही बल्कि जेडीयू के साथ 60- 40 का बंटवारा चाहती हैं।

इधर हम और वीआईपी भी और एक – एक विभाग की मांग की हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार जब कभी भी हो यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर इन परिस्थितियों से एनडीए किस प्रकार निपटेगा।

वहीं विपक्षी पार्टी आरजेडी हर प्रकार से चौकन्नी है। एनडीए की जरा भी असावधानी सत्ता को इधर से उधर कर सकती हैं। इसलिए बिहार सियासी खेल में अभी बहुत कुछ है बाकी….

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