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अब बिहार में सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन तो नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, नीतीश सरकार का नया फरमान

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पटना-  बिहार में नीतीश सरकार सरकार के खिलाफ आवाजों दबाने के लिए नया फरमान ले आई है। बिहार में पुलिस विभाग की तरफ से जारी किए गए दो फरमान.. पहला सोशल मीडिया पर माननीयों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर तो दूसरा सड़क पर विरोध प्रदर्शन को लेकर। अगर आपने सरकार के खिलाफ कुछ बोला तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश करार दे रहा है।

सोशल मीडिया के बाद सड़क पर सरकार का पहरा

एक फरवरी को बिहार पुलिस के DGP एस के सिंघल ने एक चिट्ठी सभी जिलों के एसपी को जारी की है । 1 फरवरी 2021 को जारी इस चिट्ठी में लिखा है कि ”यदि कोई व्यक्ति किसी विधि-व्यवस्था की स्थिति, विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम इत्यादि मामलों में संलिप्त होकर किसी आपराधिक कृत्य में शामिल होता है और उसे इस कार्य के लिए पुलिस द्वारा आरोप पात्रित किया जाता है तो उनके संबंध में चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन में विशिष्ट एवं स्पष्ट रूप से प्रविष्टि की जाए। ऐसे व्यक्तियों को गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि उनमें सरकारी नौकरी/सरकारी ठेके आदि नहीं मिल पाएंगे।’

डीजीपी बिहार की चिट्ठी
इतना ही नहीं इसका सौ फीसदी पालन किया जाए, इसके लिए पुलिस महकमे के ऊपर से नीचे तक के अफसरों को निर्देश दिया गया है। साफ-साफ लिखा है कि ”प्रतिवेदन तैयार करने के लिए संबंधित थाना द्वारा सभी अभिलेखों यथा- अपराध अनुक्रमणी भाग-2 अल्फाबेटिकल पंजी, प्राथमिकी, आरोप-पत्र एवं अन्य सभी आवश्यक अभिलेखों का अध्ययन किया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में चूक नहीं होनी चाहिए। पुलिस सत्यापन प्रतिवेदन पूर्ण और सही-सही हो, यह संबंधित थानाध्यक्ष की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।”

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तेजस्वी ने बोला नीतीश पर हमला कहा हिटलर

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वहीं विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर जबरदस्त हमला बोला है उन्होंने कहा है कि ‘मुसोलिनी और हिटलर को चुनौती दे रहे नीतीश कुमार कहते है अगर किसी ने सत्ता व्यवस्था के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन कर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया तो आपको नौकरी नहीं मिलेगी। मतलब नौकरी भी नहीं देंगे और विरोध भी प्रकट नहीं करने देंगे बेचारे 40सीट के मुख्यमंत्री कितने डर रहे है?’

21 जनवरी को जारी हुए एक ऐसे ही खत ने पहले से ही सियासी हंगामा खड़ा कर रखा है। इस चिट्ठी में पुलिस विभाग की तरफ से साफ कर दिया गया कि सरकार के किसी मंत्री, सांसद, विधायक या सरकारी अफसर की छवि धूमिल के आरोप में पोस्ट लिखने वालों पर आइटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। आर्थिक अपराध इकाई के एडीजी नैयर हसनैन खान ने इस बारे में सभी विभागों के प्रधान सचिव और सचिव को चिट्ठी लिखी है।

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